Anand Negi

Anand Negi

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Social worker

04/12/2025

देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा में दिन-रात तत्पर, अपने अदम्य साहस, शौर्य और निष्ठा से राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले भारतीय नौसेना के सभी वीर जवानों एवं उनके परिजनों को ‘भारतीय नौसेना दिवस’ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

समुद्री सीमाओं के अडिग प्रहरी होने के साथ ही मानवता की सेवा, आपदा प्रबंधन और वैश्विक शांति स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाने वाली भारतीय नौसेना पर हमें गर्व है।

जय हिंद!

20/10/2025

मेरे राम के अस्तित्व की आभा मानवीय दुर्बलताओं की समस्त सीमाओं के पार जाकर भी मनुष्यता के समस्त पक्षों को सदा समग्रता से दीपित करती रहे तथा उनके चरित्र की शुभता हम सबके अंतर्मन में जमा अंधेरों को परम प्रकाशित करे, इस दीपावली यही कामना है। शुभ दीपावली।

16/07/2025

समस्त प्रदेशवासियों को प्रकृति और लोक परंपरा को समर्पित लोकपर्व हरेला की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

लोक पर्व हरेला हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक होने के साथ ही प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी पर्व है। यह पावन पर्व आस्था और पर्यावरण को एक साथ पिरोता है और हमें स्मरण कराता है कि प्रकृति हमारे जीवन का आधार है, और इसकी रक्षा हमारा धर्म।

आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।

31/05/2025

सेवा, धर्मनिष्ठा, न्यायप्रियता और लोक-कल्याण की प्रतीक, 'लोकमाता' अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर कोटिशः नमन!

उनका जीवन महिला सशक्तिकरण, सामाजिक उत्थान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रकाश स्तंभ है, जो हमें युगों-युगों तक प्रेरणा प्रदान करता रहेगा।

11/05/2025

श्रीनगर से मुंबई की उड़ान मे मै आराम से अपनी सीट पर बैठा था वाया चंडीगढ़ और दिल्ली होते हुए लगभग 3 घंटे की यात्रा थी। मैंने सोचा, एक अच्छी किताब पढ़ूंगा और एक घंटा सो लूंगा।

टेकऑफ़ से ठीक पहले, लगभग 10 सैनिक आए और मआसपास की सीटों पर बैठ गए। यह देखकर मुझे रोचक लगा, तो मैंने बगल में बैठे एक सैनिक से पूछा, “आप कहां जा रहे हैं?”

“पहले दिल्ली जायेंगे और फिर सड़क मार्ग से आगरा, सर! वहां दो हफ्ते की ट्रेनिंग है, फिर हमें एक ऑपरेशन पर भेजा जाएगा,” उसने जवाब दिया।

एक घंटा बीत गया। एक घोषणा हुई — “जो यात्री चाहें, उनके लिए लंच उपलब्ध है, खरीद के आधार पर।”

मैंने सोचा — अभी लंबा सफर बाकी है, शायद मुझे भी खाना लेना चाहिए। जैसे ही मैंने वॉलेट निकाला, मैंने बगल मे बैठे 3 सैनिकों की बातचीत सुनी।

“चलो, हम भी लंच ले लें?” एक ने कहा।

“नहीं यार, यहां बहुत महंगा है। दिल्ली उतरकर रस्ते मे किसी ढाबे में खा लेंगे,” दूसरे ने कहा।

“ठीक है,” पहला बोला।

मैं चुपचाप एयर होस्टेस के पास गया और कहा, “इन सभी को लंच दे दीजिए, भुगतान मै करूँगा ” और एयर होस्टेस को तभी मैंने सबका भुगतान कर भी दिया।

एयर होस्टेस थोड़ी भावुक हुई बोली, “मेरे छोटे भाई की पोस्टिंग कारगिल में है, सर। ऐसा लगा जैसे आप उसे खाना खिला रहे हों। धन्यवाद।”

उसने मेरी ओर कृतज्ञता भरी नजरो से देखा

वो पल मेरे दिल को छू गया।

आधे घंटे में सभी सैनिकों को उनके लंच बॉक्स मिल गए।

खाना खत्म करने के बाद, मैं फ्लाइट के पीछे वॉशरूम की ओर गया। पीछे की सीट से एक वृद्ध व्यक्ति आए।

“मैंने सब देखा। आप सराहना के पात्र हैं,” उन्होंने हाथ बढ़ाते हुए कहा।

“मैं भी इस पुण्य में भाग लेना चाहता हूँ,” उन्होंने चुपचाप ₹500 मेरे हाथ में रख दिए।

मैं वापस अपनी सीट पर आ गया।

आधे घंटे बाद, विमान का पायलट मेरी सीट तक आया, सीट नंबर देखता हुआ।

“मैं आपका हाथ मिलाना चाहता हूँ,” वह मुस्कुराया।

मैं खड़ा हुआ। उसने हाथ मिलाते हुए कहा, “मैं कभी फाइटर पायलट था। तब किसी ने यूं ही मेरे लिए भोजन खरीदा था। वो प्यार और परस्पर सम्मान का प्रतीक था, जो मैं कभी नहीं भूला। आपने वही याद ताज़ा कर दी।”

सभी यात्रियों ने ताली बजाई। मुझे थोड़ी झिझक हुई। मैंने ये सब प्रशंसा के लिए नहीं किया था — बस एक अच्छा कार्य किया।

मैं थोड़ा आगे बढ़ा। एक 18 साल का युवक आया, हाथ मिलाया और एक 500 का नोट मेरी हथेली में रख दिया।

यात्रा समाप्त हो गई।

जैसे ही मैं विमान से उतरने के लिए दरवाजे पर पहुंचा, एक व्यक्ति चुपचाप कुछ मेरी जेब में कुछ नोट रखकर चला गया। और नीचे उतरते ही कई यात्रियों ने मुझे धन्यवाद और कुछ पैसे आग्रहपूर्वक दिये

विमान से बाहर निकलते ही देखा, सभी सैनिक एकत्र थे। मैं भागा, और सभी यात्रियों द्वारा दिए गए सारे पैसे उन्हें सौंप दिए।

“इसे आप खाने या किसी भी ज़रूरत में उपयोग करिए जब तक ट्रेनिंग साइट पर पहुंचें। जो हम देते हैं, वो कुछ भी नहीं है उस बलिदान के आगे जो आप हमारे लिए करते हैं। भगवान आपको और आपके परिवारों को आशीर्वाद दे,” मैंने नम आंखों से कहा।

अब वे दस सैनिक केवल रोटी नहीं, एक पूरे विमान का प्यार साथ लेकर जा रहे थे।

मैं अपनी कार में बैठा और चुपचाप प्रार्थना की —
“हे प्रभु, इन वीर जवानों की रक्षा करना, जो इस देश के लिए जान देने को तैयार रहते हैं।”

एक सैनिक एक खाली चेक की तरह होता है — जो भारत के नाम पर किसी भी राशि के लिए भुनाया जा सकता है — यहां तक कि जीवन तक।

दुर्भाग्य है कि आज भी बहुत लोग इनकी महानता नहीं समझते।

भारत माता के बेटों का सम्मान — स्वयं का सम्मान है।

– जय हिंद🇮🇳

04/05/2025

#काफल से जुड़ी उत्तराखंड की यह लोक कथा आपके आंखें नम कर देगी, अंत तक ज़रूर पढ़ें,

कहते हैं बहुत समय पहले हमारे पहाड़ के गांव में एक औरत और उसकी 6-7 साल की बेटी रहते थे। बेटी के सिर से पिता का साया उठ चुका था इसलिए ये दोनो मां बेटी अकेले ही दिन काट रहे थे। एक बार माँ सुबह सवेरे घास के लिए गयी और घास के साथ काफल भी तोड़ के लाई। बेटी ने काफल देखे तो काफी खुश हो गई, तभी माँ ने कहा कि मैं खेत में काम करने जा रही हूँ, दिन में जब लौटूंगी तब काफल खाएंगे और माँ ने काफल टोकरी में रख दिए। बेटी दिन भर काफल खाने का इंतज़ार करती रही। बार बार टोकरी के ऊपर रखे कपड़े को उठा कर देखती और काफल के खट्टे-मीठे रसीले स्वाद की कल्पना करती। लेकिन उस आज्ञाकारी बच्ची ने एक भी काफल उठा कर नहीं खाया।

आखिरकार माँ आई, बच्ची दौड़ के माँ के पास गयी और बोली— ईजा अब काफल खाएं?

ईजा (माँ) बोली — थोडा साँस तो लेने दे बेटी।

कुछ देर बाद माँ ने काफल की टोकरी निकाली, उसका कपड़ा उठा कर देखा तो काफल काफी कम नज़र आ रहे थे। ये देखकर वो बोली — अरे ये क्या, काफल कम कैसे हुए ? तूने खाये क्या?

बेटी– नहीं माँ, मैंने तो चखे भी नही!

बेटी की इस बात पर मां को एतबार ना हुआ। जेठ की तपती दुपहरी में दिमाग गरम पहले ही हो रखा था, भूख और तड़के उठ कर लगातार काम करने की थकान, माँ को बच्ची के झूठ बोलने से गुस्सा आ गया और माँ ने ज़ोर से एक थप्पड़ बच्ची के सर पे दे मारा। बच्ची उस अप्रत्याशित वार से तड़प के नीचे गिर गयी और उसका सिर एक पत्थर से टकरा गया।

टूटती सांसों के साथ बेटी ने धीरे से कहा – "मैंने नहीं चखे माँ” और इतना कहते हुए उसके प्राण पखेरू उड़ गए।

एक क्षण के बाद माँ का क्षणिक आवेग उतरा तो उसे होश आया ! वह बच्ची को गोद में ले प्रलाप करने लगी ! ये क्या हो गया, दुखियारी का एक मात्र सहारा था वो भी अपने ही हाथ से खत्म कर दिया, वो भी तुच्छ काफल की खातिर,आखिर लाई किस के लिए थी। उसी बेटी के लिए ही तो, तो क्या हुआ था जो उसने थोड़े खा लिए थे।

माँ ने उठा कर काफल की टोकरी बाहर फेंक दी। रात भर वह रोती बिलखती रही। दरअसल जेठ की गर्म हवा से काफल कुम्हला कर थोड़े कम हो गए थे। रात भर बाहर ठंडी व् नम हवा में पड़े रहने से वे सुबह फिर से खिल गए और टोकरी पूरी हो गई तब माँ की समझ में आया और वह भी पश्चाताप से खुद का सिर पटक पटक कर मर गई।

कहते हैं कि वे दोनों मर के पक्षी बन गए और आज भी जब जंगल में काफल पकना शुरू होता है तो इन दोनों ने से एक पक्षी बड़े करुण भाव से गाता है “काफल पाको, मी नी चाखो”(काफल पके हैं, पर मैंने नहीं चखे हैं) और तभी दूसरा पक्षी चीत्कार कर उठता है “पुर पुतई पूर पूर”(पूरे हैं बेटी पूरे हैं)। ये भी मां बेटी हैं।

उत्तराखंड की यह लोक कथा आपको कैसी लगी कमेंट करके ज़रूर बताएं, साथ ही यह भी बताएं की क्या आपने भी खाए हैं काफल?

02/02/2025

समस्त देश वासियों को बसंत पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 🙏💐

नरेन्द्र सिंह नेगी - लोकगायक

12/10/2024

ॐ रां रामाय नमः!

धर्म, सत्य व न्याय की विजय के महापर्व विजयादशमी की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!

बुराई पर अच्छाई की विजय के इस पावन पर्व पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की शिक्षाओं को आत्मसात कर जीवन को सार्थक बनाएं।

आइए, क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, अहंकार रूपी रावणों का नाश कर आदर्श समाज के निर्माण का संकल्प लें।

जय श्री राम! 🙏🚩

11/10/2024

समस्त देशवासियों को महानवमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
जय माता दी! 🙏🚩

08/10/2024

“आशा उत्साह की जननी है। आशा में तेज है, बल है, जीवन है। आशा ही संसार की संचालक शक्ति है।“

ग्रामीण जीवन व गाँवों की संस्कृति को अपनी लेखनी के माध्यम से साहित्य में उतारने वाले आधुनिक हिन्दी के पितामह, उपन्यास सम्राट तथा अपनी रचनाओं से समाज में व्याप्त समस्याओं को दर्शाने वाले महान कहानीकार एवं प्रसिद्ध लेखक मुंशी प्रेमचंद जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

उनकी रचनाएं युगों-युगों तक पाठकों की प्रेरणास्रोत बनकर भारतीय ग्रामीण जीवन के महत्व को दर्शाती रहेंगी।

08/10/2024

🇮🇳 🛩️भारतीय वायु सेना के वीर जवानों को वायु सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
मां भारती की रक्षा के लिए सदैव तत्पर वायु सेना के वीर जवानों को सादर नमन।🙏🏻

#वायु_सेना_दिवस

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