23/05/2026
माता-पिता, शिक्षक और युवा साथियों से एक सवाल — क्या हम अपने बच्चों को केवल डिग्री दे रहे हैं या जिम्मेदार नागरिक भी बना रहे हैं
डिग्री एक व्यक्ति को नौकरी दिला सकती है, लेकिन जिम्मेदारी, संस्कार और चरित्र ही उसे समाज में सम्मान दिलाते हैं। एक शिक्षित व्यक्ति सफल हो सकता है, पर एक जिम्मेदार नागरिक समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाता है।
यदि हम बच्चों को केवल पढ़ाना सिखाएँगे, लेकिन सही-गलत की पहचान, ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी नहीं सिखाएँगे, तो हम केवल करियर बना रहे होंगे, चरित्र नहीं।
देश का भविष्य केवल बड़ी डिग्रियों से नहीं, बल्कि अच्छे विचारों, अच्छे संस्कारों और जिम्मेदार नागरिकों से बनता है।
“डिग्री नौकरी दिला सकती है, लेकिन जिम्मेदारी और संस्कार ही परिवार, समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं।”
— Md. Shahbaz Alam
Public Rights Activist & Social Worker
22/05/2026
“एक सवाल — क्या हम आज भी उम्मीदवार की योग्यता, ईमानदारी और जनसेवा से ज़्यादा प्रचार और प्रभाव देखकर निर्णय लेते हैं?”
“हम न अंध-विरोध में हैं, न अंध-समर्थन में। जो जनता के हित में होगा उसका समर्थन करेंगे, और जहाँ जनता की समस्या होगी वहाँ समाधान की आवाज़ उठाएँगे।”
आजकल सोशल मीडिया पर कई विषय और अभियान बहुत तेजी से वायरल होते हैं। हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है। लेकिन मेरा मानना है कि केवल कुछ दिनों की लोकप्रियता, पोस्ट या भाषण से जनता की वास्तविक समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं होता।
देश के करोड़ों लोग आज भी रोजगार, शिक्षा, किसानों की चुनौतियों, बाढ़-सूखा, भ्रष्टाचार, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं जैसे विषयों से जुड़े सवालों का सामना कर रहे हैं। इन मुद्दों का समाधान केवल चर्चा से नहीं, बल्कि ज़मीन पर काम, जनसेवा, ईमानदार प्रयास और प्रभावी नीतियों से निकलता है।
मेरे लिए वह व्यक्ति अधिक सम्मान का पात्र है जो अपने गाँव, पंचायत, वार्ड या समाज के लोगों के बीच रहकर उनके सुख-दुख में साथ खड़ा होता है, उनकी समस्याओं को सुनता है और उन्हें हल करने की कोशिश करता है। क्योंकि जनसेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने से सिद्ध होती है।
मैं अपने युवा साथियों से कहना चाहता हूँ — केवल नारों, भीड़ या सोशल मीडिया की लोकप्रियता देखकर निर्णय मत लीजिए। पढ़े-लिखे, ईमानदार, योग्य और जनहित में काम करने वाले लोगों को पहचानना और आगे बढ़ाना शुरू कीजिए। जिस दिन राजनीति में योग्यता और ईमानदारी को अधिक महत्व मिलेगा, उस दिन शिक्षा, रोजगार और व्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव और मजबूत होंगे।
हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि लोकतंत्र केवल नेताओं से नहीं चलता, बल्कि जनता की सोच और भागीदारी से भी मजबूत होता है। यदि हम उम्मीदवार की योग्यता, कार्यशैली और जनसेवा को प्राथमिकता देंगे, तो अच्छे लोगों के लिए आगे आने का रास्ता और मजबूत होगा।
जब से देश स्वतंत्र हुआ है, अलग-अलग समय पर बनी सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर देश के विकास के लिए योगदान दिया है और आज भी प्रयास जारी हैं। जहाँ अच्छे कार्य हो रहे हैं, उनकी सराहना होनी चाहिए और जहाँ सुधार की आवश्यकता है, वहाँ सरकार और जनता दोनों को मिलकर सकारात्मक प्रयास करना चाहिए।
यदि हम नफरत से ऊपर उठकर शिक्षा, योग्यता, ईमानदारी और सही नेतृत्व को महत्व देंगे, तो हमारा देश और अधिक मजबूत और विकसित बन सकता है।
एक बार व्यक्ति नहीं, उसकी योग्यता, ईमानदारी और जनसेवा को महत्व देकर देखिए — बदलाव की शुरुआत यहीं से हो सकती है।
“मजबूत सरकार और जागरूक जनता — यही मजबूत राष्ट्र की सबसे बड़ी पहचान है।”
— Md. Shahbaz Alam
Public Rights Activist & Social Worker
23/12/2025
डिस्क्लेमर: यह पोस्ट एक नागरिक की व्यक्तिगत राय है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, धर्म, समुदाय, संगठन या संस्था की आलोचना, अपमान या आरोप लगाना नहीं है। यह अभिव्यक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत प्रस्तुत की जा रही है।
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मैं Md. Shahbaz Alam, सामाजिक कार्यकर्ता एवं कसबा विधानसभा (पूर्णिया) का पूर्व प्रत्याशी (2020), किसी भी राजनीतिक दल से असंबद्ध रहते हुए, एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी बात साझा कर रहा हूँ।
हाल ही में बिहार में आयोजित एक सरकारी नियुक्ति कार्यक्रम से जुड़ा एक दृश्य सार्वजनिक चर्चा का विषय बना है। मेरा मानना है कि किसी भी सार्वजनिक घटना को पूरे संदर्भ, उद्देश्य और संवैधानिक दायरे में समझा जाना चाहिए, न कि आंशिक दृश्य या भावनात्मक प्रतिक्रिया के आधार पर।
इस पूरे प्रसंग में यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि संबंधित महिला डॉक्टर—
✔ अपनी योग्यता के आधार पर चयनित हुईं
✔ उन्हें सार्वजनिक मंच पर सम्मानपूर्वक नियुक्ति पत्र मिला
✔ उनका रोज़गार और गरिमा पूरी तरह सुरक्षित रही
भारत का संविधान हमें धार्मिक स्वतंत्रता देता है और साथ ही यह भी सुनिश्चित करता है कि सरकारी मंच सभी नागरिकों के लिए समान और धर्मनिरपेक्ष हों। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार सभी को है, परंतु संवाद संयम, तथ्य और शांति के साथ होना चाहिए।
संविधान, शांति और सामाजिक एकता — यही हमारे लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन की असली ताक़त है।
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— Md. Shahbaz Alam.
Social Activist | Former Kasba Assembly Candidate (2020), Purnea, Bihar.
Contact No — 9471661380.
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20/08/2025
📢 कसबा की जनता से सवाल
👉 एक विधायक का काम क्या होता है❓
👉 जिन्हें आप चुनते हैं – क्या उन्हें अपने काम की जानकारी होती है❓
👉 क्या उन्हें क़ानूनी और संवैधानिक जानकारी है❓
👉 क्या उन्हें जनता की समस्याओं की सही समझ है❓
👉 क्या उन्हें विधानसभा में जनता की आवाज़ उठाने और सवाल लिखने का हुनर आता है❓
अगर नहीं… तो सोचिए –
क्या ऐसे नेता से कसबा का विकास हो सकता है❓
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20/08/2025
📢 कसबा की जनता से एक सवाल
क्या सिर्फ़ किसी पार्टी के नाम पर जीतने से कसबा का विकास संभव है❓
अगर उम्मीदवार खुद समझदार न हो, जनता की आवाज़ न उठा सके, न बोलने की ताक़त हो, न नेता होने के गुण –
तो क्या पार्टी का नाम ही आपके गाँव–टोले की किस्मत बदल सकता है❓
👉 असली सवाल है –
पार्टी ज़रूरी है या जनता का सच्चा और मज़बूत नेता❓
अब फ़ैसला जनता के हाथ में है ✊
Seemanchal Mukhiya Facebook
20/08/2025
🚧 कसबा की सच्चाई 🚧
गाँव–टोला की ज़्यादातर सड़कें या तो टूटी पड़ी हैं, या फिर आज तक बनी ही नहीं।
जहाँ बनीं, वहाँ भी गड़बड़ी साफ़ दिखती है –
👉 नेता–अधिकारियों ने कमीशन लिया,
👉 ठेकेदार ने जैसे–तैसे सड़क–पुलिया खड़ी कर दी,
👉 और जनता आज भी धूल, कीचड़ और गड्ढों से गुजरने को मजबूर है।
अब सवाल है –
क्या कसबा की जनता को यही हालात मंज़ूर हैं❓
या फिर वह सच्चे और ईमानदार नेतृत्व के साथ बेहतर सड़कें चाहती है❓
20/08/2025
📢 कसबा की सबसे बड़ी सच्चाई –
👉 भ्रष्टाचार आज चरम पर है!
👉 जनता पूछ रही है – इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है❓
▶️ अब सवाल यह है –
क्या हम इसे ऐसे ही सहते रहें, या फिर एक मज़बूत और ईमानदार नेता को मौका दें? 🤔✊
19/08/2025
कसबा विधानसभा क्षेत्र के सभी माननीय वार्ड सदस्यगण/मुखियागण/समाजसेवीगण को,
नमस्कार, आदाब, सलाम।
बोचगाँव पंचायत वार्ड संख्या 3 के माननीय वार्ड सदस्य श्री मो. सरफ़राज़ जी से जानकारी मिली है कि कुछ योग्य लोगों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में पहले शामिल था, लेकिन बिना कोई कारण बताए बाद में हटा दिया गया। यह समस्या सिर्फ़ एक वार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य वार्डों में भी पात्र परिवारों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
साथ ही, यह भी सामने आया है कि कई परिवारों ने राशन कार्ड के लिए वर्षों पहले आवेदन किया था, लेकिन लगभग दो साल से उनके आवेदन लंबित पड़े हैं और अब तक उन्हें राशन कार्ड उपलब्ध नहीं हुआ है।
मैं हमेशा अपने क्षेत्र की जनता के अधिकारों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान की चिंता करता हूँ। इसलिए मेरा आप सभी माननीय वार्ड सदस्यों से अनुरोध है कि अगर आपके क्षेत्र की जनता भी ऐसी या किसी अन्य समस्या से जूझ रही है, तो कृपया मुझे इसकी जानकारी दें। मैं हर संभव प्रयास और सहयोग करने के लिए तैयार हूँ, ताकि हमारी जनता को उसका हक़ और अधिकार समय पर मिल सके।
आपका अपना,
मो. शहबाज़ आलम
पूर्व प्रत्याशी, कसबा विधानसभा