25/09/2026
स्व. पंडित दीन दयाल जी की जयंती पर शुभकामनाएँ
ध्येय मन्दिर की दिशा में पग सदा बढ़ते रहें।
ह्नदय में तव स्मृति लता नित पल्लवित होती रहें।
कृपा से हमको मिले गति मति सहित द्युति आपकी
कष्ट में सुख में सदा आ बसी हो छवि आपकी।
ध्येय निष्ठा ह्नदय उर में पथिक बस चलता रहे ॥१॥
देखकर चहुँ ओर दुःख दारिद्रय भीषण आपदा।
द्रवित होकर आपने फिर त्याग दी सब सम्पदा।
दंभ मोह हताश होकर आपको लखते रहे ॥२॥
शत युगों में आप जैसा अवतरित व्यक्तित्व पाया
आपके स्मृति कवच ने नित्य ही हमको बढ़ाया।
दृष्टि निश्चय भाव से धृव ध्येय पर केन्द्रिय रहे ॥३॥
धूल के प्रत्येक कण से घोष उठता है महा।
आपका पद-स्पर्श पाया देह धन्य हुई महा।
चरण की गति हो अखण्डित और बढ़ती रहे ॥४॥....
जब हम दूसरों द्वारा किए गए, अपमान और अपशब्द को अपने दिल में जगह देते हैं। जीवन में कुछ चीजों को जाने दिया करो। सब चीजों को मन मैं गांठ बनाकर रखने को आदत हो मानव जीवन में दुख और अशांति का, कारण है।
वास्तव में किसी व्यक्ति द्वारा किए गए अपमान के विरुद्ध प्रतिशोध का भाव हमारे उत्थान की राह को अवरुद्ध करता है। बदले के भाव से हम विचारों के एक ऐसे जाल में फंस जाते हैं, जो मन को शांति को छीन लेता है, हम तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं। प्रतिशोध की अग्नि में हम अपनी हथेलियों में जलते अंगारों को लेकर जीना शुरू कर देते हैं।
लिहाजा जीवन में जब तिरस्कृत होने की परिस्थिति आए तो मन को मजबूत करने की आवश्यकता है। अनादर और अपशब्द से खुद को सुरक्षित रखने की जरूरत है। वैसे ऐसा करना सहज तो नहीं है, लेकिन जब इसके कारण जीवन ही दांव पर लगा हो तो मन को कठोर रखने और विषाक्त बातों को छोड़ या भूला देने में ही जीवन की खुशी का रहस्य छुपा है।
आइए अंतिम व्यक्तियोदय हेतु स्व. पंडित दीन दयाल जी की जयंती पर संकल्पित हो!