07/10/2026
दवा ₹74 की, लेकिन बिल ₹4,980 का! आख़िर मरीज़ों की मजबूरी का यह धंधा कब रुकेगा?
उत्तर प्रदेश के फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) ने जब 214 अस्पतालों का डेटा खंगाला, तो जो आंकड़े सामने आए वो हैरान करने वाले हैं। अस्पताल की फार्मेसी जिस दवा को कौड़ियों के भाव खरीद रही है, उस पर छपी MRP आम आदमी की जेब खाली करने के लिए काफी है।
जरा इन आंकड़ों पर नज़र डालिए:
पॉलीमिक्सिन बी (Polymyxin B) इंजेक्शन: खरीद मूल्य सिर्फ ₹74, लेकिन MRP ठोंकी गई ₹4,980!
टेरलिप्रेसिन (Terlipressin) इंजेक्शन: फार्मेसी ने खरीदा महज ₹56 में, पर MRP रखी गई ₹3,050!
बेवाकिजुमैब (Bevacizumab 400mg): खरीद कीमत ₹7,541 और MRP सीधे ₹69,995 — यानी एक इंजेक्शन पर ₹62,453 का सीधा अंतर!
यह खेल सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं है, मेडिकल डिवाइसेज और सर्जिकल सामानों में भी यही लूट मची है।
अब कुछ लोग कह सकते हैं कि 'अस्पताल डिस्काउंट भी तो देते हैं।'
लेकिन सच हम सब जानते हैं—इमरजेंसी में काउंटर पर खड़ा तीमारदार बिल पर बहस करने की हालत में नहीं होता। अगर 10-20% की छूट मिल भी गई, तब भी ₹74 की दवा पर हजारों रुपये वसूलना कौन सी नैतिकता है?
सोचिए उन परिवारों के बारे में, जिन्होंने इतनी भारी MRP देखकर पैसों की तंगी की वजह से अपने मरीज़ की खुराक (dose) ही कम कर दी होगी। उनकी जान के इस नुकसान का ज़िम्मेदार कौन है?
यह सिर्फ एक राज्य की बात नहीं, पूरे देश के हेल्थकेयर सिस्टम का एक कड़वा सच है। इस तरह के गैर-वाजिब मुनाफ़े और मनमानी MRP पर कड़ी कानूनी नकेल कसना बेहद ज़रूरी है।