Hindu Yuva Sangthan

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समर्थ भारत ।। संगठित हिन्दू ।।

15/10/2023

*ॐ नवरात्र पर्व की आप सभी को हार्दिक बधाई शुभकामनाएँ ॐ*

04/04/2022

साल 1907 में सावरकर बंधुओं की पुश्तैनी जायदाद अंग्रेज सरकार ने जब्त कर ली। साल 1911 में सावरकर के श्वसुर की सारी संपत्ति भी अंग्रेज सरकार द्वारा जब्त कर ली गई। उसी वर्ष बंबई विश्वविद्यालय द्वारा सावरकर की बीए की डिग्री वापस ले ली गई। लंदन से वकालत की डिग्री पूरी करने के बावजूद उन्हें बार में स्थान नहीं दिया गया। इस तरह काला पानी से जिंदा लौटे सावरकर के पास मात्र 10वीं पास की शैक्षिक योग्यता रह गई थी। उनकी लिखी सारी किताबों पर पाबंदी थी इस तरह किसी प्रकार रॉयल्टी मिलने की संभावना भी नहीं थी।

बड़े भाई बाबा राव स्ट्रेचर पर जेल से रिहा हुए थे। तो ऐसे में पूरा परिवार सबसे छोटे भाई नारायण राव की डिस्पेंसरी पर निर्भर था। अहमदाबाद बम धमाके में पकड़े गए और नासिक षड़यंत्र केस में छह माह की जेल काट चुके नारायण राव पर और उनसे इलाज कराने आने वालों पर भी पुलिस की सख्त नजर रहती थी। ऐसे स्थिति में एक बार सावरकर को लगा कि इससे बेहतर स्थिति तो शायद काला पानी में ही थी कम से कम वहां रोटी का संकट नहीं था। इन तमाम परेशानियों के बीच केसरी के संपादक ने सावरकर परिवार की देखरेख के लिए एक अनुदान समिति का गठन किया। वहीं महाराष्ट्र के कई गणमान्य लोग ऐसी अनुदान समिति बनान के विरोध में खड़े हो गए। कड़ी पाबंदी झेल रहे सावरकर ने अपने एक भाषण में कहा कि ," अभी भी कुछ ऐसे रास्ते खुले हैं जहां मैं बेरोकटोक काम कर सकतू हूं, जैसे कि हिन्दू समाज को एकजुट करना, वैज्ञानिक और साहित्यिक रचनाएं लिखना परंन्तु अगर मैं इन क्षेत्रों में भी काम न कर सकू तो मैं उन युवाओं के पैर दबाने का ही काम कर लूंगा जो मातृभूमि का सेवा करके निढाल हो चुके हैं।"

केवल साढ़ चारे माह में सावरकर परिवार की सहायता के लिए स्थापित किए गए सहायता कोष ने महारष्ट्र भर से 12,757 रुपए और 210 रुपए विदेश से एकत्र कर लिए। अंग्रेज सरकार के बार-बार कार्यक्रम बदलवाने और भारी दबाव के बीच चांदी के कलश में 11,989 रुपए नगद और तिलक की गीता रहस्य की एक प्रति उन्हें भेंट की गई। 14 साल पहले जब सावरकर जेल गए थे तब भी उनके पास केवल एक ऐनक और एक आने की छोटी गीता ही बची थी।

ये आर्थिक सहायत स्वीकारते सावरकर ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि," मैं कैसे सोच सकता था कि ये बेड़ियां एक दिन फूल बन जाएंगी। युवाओं को केवल मेरी महिमामंडन न करके वीरता में मुझसे भी आगे निकलना चाहिए। मैं यह अनुदान आपसे बिना पूछे दी गई पिछली सेवाओं के लिए स्वीकार नहीं कर रहा हूं, बल्कि भविष्य में की जाने वाली राष्ट्र सेवा के लिए प्रोत्साहन स्वरूप स्वीकार कर रहा हूं " इस घटना के करीब 75 साल बाद विश्व की पहली क्राउडफंडिग करके बनाई गई फिल्म भी वीर सावरकर ही थी।

इधर अब 100 वर्षों के बाद राष्ट्रवादी धीरे-धीरे क्राउडफंडिंग की विधा में महारथ हासिल कर रहे हैं। हम ये जान गए है कि कि हमारे लिए फंडिंग करने के लिए कोई चर्च या वेटिगन नहीं बैठा है न साउदी से हमारे लिए भर-भर कर पैसा आना है। यहां तो हमें ही एक दूसरे का कंधा बनना है इसलिए दिल्ली दंगों के पीड़ितों के लिए 1 करोड़ रुपए जुटाना हो या झारखंड के रुपेश पांडेय के लिए 14 लाख रुपए इकट्ठा करना हो धीरे-धीरे समाज में अब ये समझ भी विकसित हो रही है।

जो कि बेहद आवश्यक है

Book Source- Savarkar: A Contested Legacy by Vikram Sampath
@अविनाश त्रिपाठी

11/02/2022

आज पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि है ।दीनदयाल जी के जीवन की अनेको एसी घटनायें है जो आज के सभी राजनीतिक दलो के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायी है । जिसकी कुछ घटनाओं का उल्लेख कर उन्हें मानस रूप से श्रद्धा - सुमन अर्पित करूँगा ।
भारत-चीन युद्ध के पूर्व चीन के राष्ट्रपति ने भारत के प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू पर गंदी टिप्पणी की ।इस टिप्पणी के संबंध में भारतीय जनसंघ की बैठक में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा की इस टिप्पणी से देश और देश के प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू दोनो का अपमान है ।इस विषय को हमें जनता तक ले जाकर चीन की नियत और नीति का पर्दाफ़ाश करना चाहिए ।बैठक में उपस्थित जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने कहा की सामने चुनावी वर्ष है ऐसा करने से भारतीय जनसंघ को नुक़सान होगा ।दीनदयाल जी ने कहा “देश से बड़ा दल का हित नही होता ।देशहित के लिए जनसंघ के हित को न्योछावर करना होगा ।” जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने चीन के राष्ट्रपति की नेहरू जी के लिए की गयी गंदी टिप्पणी को जनता तक ले जाकर चीन की नीति व नियत का पर्दाफ़ाश किया ।
भारतीय जनसंघ दलगत राजनीत से ऊपर उठकर देश के केंद्र की कांग्रेश सरकार व भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ खड़ी थी।उस समय विश्व के प्रायः देश चीन के साथ थे ।
दीनदयाल जी सभी दल के कार्यकर्ताओं को अपना ही मानते थे ।जिसकी एक घटना यहाँ उल्लेख करना प्रासंगिक होगा ।एक बार संघ शिक्षा वर्ग में पं.दीनदयाल उपाध्याय जी से प्रश्न हुआ की अब संसद में आपके कितने सांसद है ?दीनदयाल जी ने कहा पाँच सौ सांसद अपने है ।तो प्रतिप्रश्न हुआ पाँच सौ कैसे ? दीनदयाल जी ने कहा संसद के सभी सांसद अपने ही है ।फिर वापस प्रतिप्रश्न हुआ मै भारतीय जनसंघ के सांसदो की संख्या पूछ रहा था ।दीनदयाल जी ने उत्तर दिया अच्छा आप जनसंघ के सांसदो की संख्या पूछ रहे है ,उनकी संख्या पैंतीस है ।पं.दीनदयाल जी सभी दल के कार्यकर्ताओं को अपना ही मानते थे ।
दीनदयाल जी राजनीत में रहकर राजनीति से अलिप्त रहे । दीनदयाल जी अपने जीवन काल में अंग्रेज़ी साप्ताहिक अख़बार आर्गेनाईजर के स्थाई काँलम ‘पोलिटिकल डायरी’ में लिखा करते थे ।उनके ब्रम्हलीन होने के पश्चात् नाना जी देशमुख के प्रयासों से पोलिटिकल डायरी के चुनिंदा आलेखों को छाँटकर “पोलिटिकल डायरी” शीर्षक से ही साहित्य का प्रकाशन करवाया ।प्रकाशन पूर्व तब के प्रख्यात कांग्रेस के नेता ,विद्वान व काशी विद्यापीठ के कुलाधिपति डॉक्टर सम्पूर्णानंद के पास नाना जी देशमुख गए और साहित्य की प्रति देकर आग्रह किया की आप इसकी भूमिका लिखे ।डॉक्टर सम्पूर्णानंद ने कहा मै कांग्रेसी कार्यकर्ता हूँ और आप सभी जनसंघी है तो आप एसा क्यूँ चाहते है की मै इन लेखों के संग्रह की भूमिका लिखूँ ।नाना जी ने कहा की आप कांग्रेसी है और दीनदयाल जी जनसंघी है पर आप दोनो विद्वान है ।आप भारतीय परम्परा को जानते है,इसलिए आप लिखे हम आपको आश्वस्त करते है की आप जो लिखेंगे हम वैसी भूमिका छापेंगे । आपने यदि उनकी आलोचना की तो वो भी हम छापेंगे ।इसलिए आप भूमिका लिखे ।डॉक्टर सम्पूर्णानंद जी ने भूमिका लिखी ।उन्होंने उन आलेखों को कालजयी आलेख बताया ,और आश्चर्य किया की एक राजनीतिक दल के नेता ऐसा कैसे सोच सकते है ।डॉक्टर सम्पूर्णानंद ने भी पं.दीनदयाल उपाध्याय को दलवादी राजनेता ना मानकर सिद्धांतयुक्त राजनीत के लिए राजनीति में होना बताया ।पोलिटिकल डायरी के लेखों को डॉक्टर सम्पूर्णानंद अमूल्य बताते हुए लिखते है की “इस श्रेणी के लेख वर्तमान समय की सीमा से बहुत आगे पहुँच गए है ,मुझे आश्चर्य होता है कि क्या स्वयं उपाध्याय जी ने उनको अनुभव किया था ,या उनका अनुभव करने के लिए उनके पास समय था ।मै उदाहरण के लिए केवल एक ही चर्चा करूँगा , ‘आपका मत ‘ शीर्षक लेख वर्तमान मतदाताओं को लक्ष्य कर लिखे गए है ।”
यहाँ पर उल्लेख करना चाहूँगा की दीनदयाल जी “लोकमत परिष्कार” के नौ आलेख लिखे थे ।वे सिद्धांतहीन मतदान को सिद्धांतहीन राजनीति का जनक मानते थे ।दीनदयाल जी का मतदाताओं से आग्रह था की राजनीतिक दल चुनावों में टिकट देने में त्रुटि कर सकते है और एसे व्यक्ति को टिकट दे सकते है जो आपके मत का अधिकारी नहीं हो ।तो मतदाता की ये ज़िम्मेदारी है की वे राजनीतिक दलो को श्रेष्ठ टिकट देने हेतु बाध्य करे व ज़रूरी ये भी नहीं की उसे वे अपना मत दे जिसमें वे भारतीय जनसंघ को भी शामिल करते थे । साथ ही दीनदयाल जी ने एक प्रश्न के उत्तर में हमें उनका परिचय मिलता है जिसमें उन्होंने कहा था की “मै राजनीति के लिए राजनीत में नहीं हूँ,मै राजनीत में संस्कृति का राजदूत हूँ ।” इसको चरितार्थ दीनदयाल जी ने जोनपुर चुनाव में ब्राह्मणों को खुद ब्राम्हण होने के बाद भी जातीसूचक सम्बोधन नहीं दिया जबकी वह सीट ब्राम्हण बहुल थी। इस बाबत समाज के प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाक़ात कर आग्रह किया था ।मात्र जातीसूचक सम्बोधन नहीं करने से दीनदयाल जी चुनाव हारे ।बाद में उन्होंने कहा की यदि वे जातीसूचक सम्बोधन कर जीत जाते तो भी वह जनसंघ की विचारधारा की हार होती ।दीनदयाल जी जातिवाद के ख़िलाफ़ एसे समय खड़े हुए जब देश के सभी दल जातीवाद के आधार पर टिकिट का निर्णय करते थे ।”देश प्रथम - दल द्वितीय“ ,“जातपात नहीं - भारतीयता “, “राजनीत में राजनीति नहीं- राजनीति में संस्कृति” ,विदेशी नहीं स्वदेशी”,इसे कहना तो सरल है पर करना असम्भव ही है जो दीनदयाल जैसा विराट व्यक्तित्व ही कर सकता है ,एसे दीनदयाल के लिए आज राष्ट्र तरस रहा है ।
पं.दीनदयाल उपाध्याय जी को शत शत नमन.......अवधेश कुमार जैन

Photos 14/08/2016

दिनांक 14/08/16 दिन रविवार समय शाम 5 बजे भाठागांव तिरुपति भवन में अखंड भारत दिवस कार्यक्रम है जिसे विभाग प्रचारक श्री नारायण नामदेव जी संबोधित करेंगे सभी को अधिक से अधिक संख्या में स्वय मित्रों सहित आने की अपेक्षा है ।। समय का विशेस रूप से ध्यान रखे ।।

Photos 10/02/2016

आज के दिन वह ज्योति महाज्योति - परमज्योति में एकाकार-एकात्म हो गई.----महामानव एकात्ममानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के पुन्यतिथि पर शत शत नमन व् श्रधांजलि.........

28/03/2015

श्री राम नवमी की आपको एव आपके परिवार को हार्दिक बधाई एव शुभकामनायेँ।।विनीत-संगठन परिवार

Photos 11/10/2013

WISHING YOU A VERY HAPPY NAVRATRI MAY MATA RANI FULL FILL ALL YOUR WISHES :) JHOR S BOLO JAI MATA DI :)

Photos 13/08/2013

Hindu yuva seva sangathan had distributed note books to students of "KHO-KHO PARA GOVT. SCHOOL" Respectable Sanjay Shrivastva ji witnessed the programme

Photos 29/04/2013

On 28/04/2013(sunday) Chhattisgarh hindu yuva seva sangathan celebrated Hon. Rajesh munat ji's (Cab. Minister C.G. govt.)Birthday with orphon & street childrens..

Photos 29/04/2013

On 28/04/2013(sunday) Chhattisgarh hindu yuva seva sangathan celebrated Hon. Rajesh munat ji's (Cab. Minister C.G. govt.)Birthday with orphon & street childrens..

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