07/04/2026
दोस्तों ये कैसा न्याय है?
बिना सुने सूली पर चढ़ा देना — ये कैसा दस्तूर है?
हमारे देश की न्याय व्यवस्था की बुनियाद “प्राकृतिक न्याय” के सिद्धांत पर टिकी है —
कि हर व्यक्ति को सुना जाएगा, हर पक्ष को अवसर मिलेगा।
इतिहास गवाह है —
महात्मा गांधी के हत्यारों को भी लाल क़िला में पूरा अवसर दिया गया, उन्हें सुना गया, उनकी दलीलें सुनी गईं।
लेकिन मेरे मामले में क्या हुआ?
उच्च न्यायालय के कल अपलोड हुए फैसले के पैरा 37 में स्वयं अदालत ने लिखा:
“Be that as it may, in the compelling circumstances… this Court proceeds to consider and decide the matters on the basis of the submissions advanced by learned Counsel appearing for the CBI, the State, and the complainant…”
इसका सीधा अर्थ क्या है?
कि अदालत ने केवल एक पक्ष को सुनकर — CBI, राज्य और शिकायतकर्ता — के आधार पर निर्णय लिया।
यानी मुझे, मेरे वकीलों को — एक शब्द भी कहने का अवसर नहीं दिया गया।
क्या यह न्याय है?
आप स्वयं 78 पन्नों का पूरा निर्णय पढ़ लीजिए —
कहीं भी एक भी स्थान ऐसा नहीं मिलेगा जहाँ लिखा हो:
“अमित ने अपनी सफाई में यह कहा…”
क्यों?
क्योंकि मुझे सुना ही नहीं गया।
12,000 पन्नों के रिकॉर्ड, गवाहियों और साक्ष्यों वाले मामले में —
सिर्फ 7 दिनों के भीतर —
मुझे आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई।
और विडंबना देखिए —
उसी फैसले में यह भी कहा गया कि मैं और मेरे वकील कार्यवाही में विलम्ब कर रहे थे!
जो संस्थाएँ “सच, पूरा सच और सच के सिवा कुछ नहीं” सुनने, समझने और परखने की जिम्मेदारी निभाती हैं —
क्या उन्हें चयनात्मक होना चाहिए?
क्या न्याय एकतरफा हो सकता है?
और क्या हम यह मान लें कि कुछ “असाधारण” क्षमताएँ भी काम कर रही थीं—
जहाँ 12,000 पन्नों का रिकॉर्ड, पूरी दलीलें, और 78 पन्नों का फैसला
सिर्फ 3 दिनों में तैयार हो गया—
जबकि तीनों दिन अवकाश थे (Good Friday, शनिवार और Easter Sunday)?
मैं ये प्रश्न केवल अपने लिए नहीं —
बल्कि हर उस नागरिक के लिए पूछ रहा हूँ,
जो न्यायपालिका पर भरोसा करता है।
अब 20 अप्रैल को
माननीय सर्वोच्च न्यायालय
मुझे सुनवाई का अवसर देगी।
आख़िरकार — मेरी बात भी सुनी जाएगी।
मुझे न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।
मुझे सत्य पर विश्वास है।
और मुझे ईश्वर पर विश्वास है — कि मेरे साथ अन्याय नहीं होगा।
सत्य की जीत निश्चित है।
— अमित अजीत जोगी
06/04/2026
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आज उच्च न्यायालय द्वारा CBI को अपील की अनुमति दिए जाने के आदेश के विरुद्ध मेरी विशेष अनुमति याचिका (SLP) को स्वीकार कर लिया है। साथ ही, मुझे उच्च न्यायालय द्वारा CBI की अपील स्वीकार करने वाले निर्णय के विरुद्ध अपील दायर करने का निर्देश भी दिया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय का आदेश वेबसाइट पर अपलोड होने के कुछ ही मिनटों के भीतर उसके विरुद्ध अपील दायर करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय के दोनों निर्णय—अपील की अनुमति देना तथा अपील को स्वीकार करना—अब न्यायिक परीक्षण के लिए पूर्णतः खुले हैं।
मैं श्री कपिल सिब्बल, श्री मुकुल रोहतगी, श्री विवेक तन्खा एवं श्री सिद्धार्थ दवे—जो मेरे स्वर्गीय पिता श्री अजीत जोगी जी के निकट सहयोगी भी रहे हैं—का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में अत्यंत प्रभावी ढंग से मेरी ओर से पक्ष रखा।
यह केवल मेरी न्याय की लड़ाई नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की भी लड़ाई है जिनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है—विशेषकर वे, जिन्हें देश के सर्वोच्च न्यायालय में इस प्रकार का सक्षम प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं हो पाता।
मुझे अपने महान राष्ट्र की न्यायिक प्रक्रिया पर तथा सर्वोपरि परमात्मा के न्याय पर अटूट विश्वास है।
मैं मीडिया के अपने साथियों से अनुरोध करता हूँ कि आज अपलोड हुए निर्णय की रिपोर्टिंग के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम को भी उचित स्थान दें।
आप सभी की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद—आपकी प्रार्थनाएँ ही मेरी शक्ति हैं।🙏 Amit Jogi
06/04/2026
प्रेस विज्ञप्ति
अमित जोगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में 20 अप्रैल को होगी सुनवाई
रायपुर, छत्तीसगढ़/ नई दिल्ली दिनांक 6 अप्रैल2026। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आज माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के दो निर्णयों — दिनांक 25.03.2026 (जिसमें अपील दायर करने की अनुमति दी गई) और 02.04.2026 (जिसमें अपील को स्वीकार किया गया) — दोनों को एक साथ जोड़ते हुए 20.04.2026 को संयुक्त सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया।
इस मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ और माननीय न्यायमूर्ति श्री संजीव मेहता की पीठ द्वारा की गई। अमित अजीत जोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री कपिल सिब्बल, श्री मुकुल रोहतगी, श्री विवेक तन्खा और श्री सिद्धार्थ दवे उपस्थित हुए।
उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित उपरोक्त दोनों निर्णयों में प्राकृतिक न्याय के मौलिक सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया है और सर्वोच्च न्यायालय के 06.11.2025 के स्पष्ट आदेश का उल्लंघन करते हुए श्री अमित जोगी को बिना सुनवाई का कोई अवसर दिए दोनों निर्णय पारित किए गए।
न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि दिनांक 02.04.2026 का उच्च न्यायालय का निर्णय, जिसमें पैरा 37 में यह दर्ज है कि यह बिना श्री अमित जोगी को सुने पारित किया गया, आज ही सुबह उच्च न्यायालय की वेबसाइट में अपलोड किया गया। इस संबंध में रजिस्ट्रार (न्यायिक) ने उनके अधिवक्ता को दूरभाष पर सूचित किया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने श्री अमित जोगी को अंतिम निर्णय के विरुद्ध अपील 20.04.2026 से पहले दायर करने के निर्देश दिए ताकि सभी मामलों की उसी दिन संयुक्त रूप से अंतिम सुनवाई की जा सके।
अमित अजीत जोगी ने आज के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि उनके साथ हुआ यह गंभीर अन्याय माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवश्य सुधारा जाएगा।
अधिवक्ता भगवानू नायक
मुख्य प्रवक्ता
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)
02/04/2026
हम सत्य के साथ हैं, हम न्याय के साथ हैं।
हर परिस्थिति में हमारा विश्वास अडिग है।
सच ज़रूर सामने आएगा और न्याय की जीत होगी।
हम सब एकजुट होकर अपने नेता के साथ खड़े हैं। ✊
10/03/2026
13 मार्च की तैयारी को लेकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे की बैठक संपन्न
13 मार्च की तैयारी को लेकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे की बैठक संपन्न,
कोरबा, कोरबा में बालको लांट के मज़दूर साथियों और अन्य साथियों के साथ आगामी 13 मार्च को होने वाले विशाल धरना-प्रदर्शन...
10/03/2026
बालको के खिलाफ मज़दूरों का बड़ा आंदोलन, 13 मार्च को कोरबा पहुंचेंगे अमित जोगी
बालको के खिलाफ मज़दूरों का बड़ा आंदोलन, 13 मार्च को कोरबा पहुंचेंगे अमित जोगी - Soni Narad Muni News
कोरबा। बालको प्लांट के मज़दूरों की समस्याओं और मांगों को लेकर कल कोरबा में मज़दूर साथियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आ....
10/03/2026
कल कोरबा में बालको लांट के मज़दूर साथियों और अन्य साथियों के साथ आगामी 13 मार्च को होने वाले विशाल धरना-प्रदर्शन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़-जे के प्रदेश महामंत्री श्री निलेश चौहान शामिल हुए और मज़दूरों की समस्याओं व मांगों को गंभीरता से सुना।
बैठक के दौरान मज़दूरों की विभिन्न समस्याओं, उनके अधिकारों और लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी साथियों ने एकजुट होकर मज़दूरों के हक, सम्मान और न्याय की लड़ाई को मजबूती से लड़ने का संकल्प लिया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 13 मार्च को कोरबा में बालको प्लांट के मज़दूरों द्वारा विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में मज़दूर शामिल होंगे। इस आंदोलन में जेसीसीजे के सुप्रीमो श्री अमित जोगी शामिल होकर मज़दूरों की आवाज़ को बुलंद करेंगे। मज़दूरों के हक और न्याय के लिए अब बालको प्लांट की “खटिया खड़ी” करने का संकल्प लिया गया है।
इस आंदोलन की बैठक में प्रमुख रूप बालको एटक एवं कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड श्री एम.एल. रजक, मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ऋषिकर भारती, सुशील निर्मलकर, देवेंद्र सिंह ठाकुर, अजय चेट्टी, धर्मेंद्र तिवारी, हुसैन ख़ान, मन्नुलाल लठिया,अजय निराला, संतोष गड़ेवाल, शिव साहू, सुनील सुना, भूपेंद्र चौधरी, अरुण साहू, ईश्वर सिंह, लक्ष्मण , विदेशी, महादेव कुर्रे सहित बालको यूनियन के कई पदाधिकारी और मज़दूर साथी उपस्थित रहे।
नेताओं ने कहा कि यदि मज़दूरों की जायज़ मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। यह आंदोलन मज़दूरों के अधिकार, सम्मान और उनके भविष्य की रक्षा के लिए किया जा रहा है।