25/08/2024
संपादकीय [धार्मिक कट्टरता, इंसानियत की निर्बलता]
मेरे मन में कई बार विचार आया कि मैं इस विषय पर कुछ लिखूं मगर देश में मौजूदा माहौल को देखते हुए अपने आप को रोक लिया फिर सहसा मन में विचार आया कि " जो डर गया समझो मर गया" इस बात से हिम्मत जुटाते हुए यह लेख को लिखने का साहस कर रहा हूँ, मुझे पता है देश में विभिन्न विचारधारा के लोग रहते है और यही इस देश कि सबसे बड़ी खूबसूरती भी है। जैसे ही मैं धार्मिक कट्टरता कि बात करूँगा वैसे ही कई लोगों के कान खड़े हो जायेंगे साथ में मैं यह भी जानता हूँ कि कट्टरता वाली सोच ने हमारे देश का विभाजन किया और कट्टरपंथी ताकतों ने हाल फ़िलहाल में अफगानिस्तान और बांग्लादेश तक पर कब्ज़ा कर लिया और ये कट्टरपंथी सोच किसी धर्म विशेष तक ही सिमित नहीं है यह आज के दौर में हर धर्म में मिल जायेंगे। अब अगर किसी को ये लग रहा होगा कि मैं किसी खाश धर्म के बारे में बात कर रहा हूँ तो ये बुनियाद बात है मेरी बात तो हर धर्म में मौजूद कट्टरपंथी सोच को प्रबल बनाने वाले लोग जो अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए देश और समाज के लिए खतरा है उन सबके लिए ये बात कहना चाहता हूँ कि धार्मिक कट्टरता इंसानियत कि ऐसी निर्बलता है जो उसे अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए प्रेरित करती है या फिर मानसिक विक्षिप्तता को प्रदर्शित करती है। धार्मिक कट्टरता देश और समाज को हर दिन दीमक की तरह चाट रही है और स्वार्थी लोग इस कट्टरता को पाल-पोश रहे है जिनसे उन्हें कुछ वोट मिल जाये या फिर समाज के वो ठेकेदार बन सके और उनकी चौधराहट बनी रहे।
आईये देखते है धार्मिक कट्टरता किस प्रकार से इंसानियत की दुश्मन है:
१.: समाज में विभाजनकारी मानसिकता को बढ़ावा मिलेगा जिससे वैमनश्व बढ़ेगा।
२. आये दिन दंगे और फसाद होने कि स्थिति निर्मित होगी, जो देश की शांति और संवृद्धि के लिए अवरोधक है।
३. धर्म का मर्म तो इंसानियत और भाईचारा है इसमें कट्टरता बिलकुल विपरीत दिशा की तरफ ले जाती है।
४. कट्टरता धार्मिक उन्माद फैलाने का काम करती है और यह उन्माद आगे चलकर आतंकवाद में बदल जाता है।
५. विश्व में एक भी ऐसा विकसित राष्ट्र नहीं है जो धार्मिक कट्टरता से विकसित राष्ट्र बना हो।
६. जहाँ अशिक्षा, गरीबी और बेरोजगारी है वही धार्मिक कट्टरता की जड़ें गहरी होती है।
७. धार्मिक कट्टरता का ही असर है कि आपको जगह जगह कान फाडू डीजे, धार्मिक प्रदर्शन से रोड जाम और जबरदस्ती चंदे देने को मजबूर होना पड़ता है।
कुछ लोगो का कहना है कि अमुक धर्म के लोग ऐसा करते है तो हम भी वैसा ही क्यों न करें, तो मेरा कहना है कि अगर कुछ लोग समाज में गलत कर रहे है तो वो हमारे आदर्श कैसे हो सकते है और हम भी उनके जैसा ही करेंगे तो हमारे और उनके बीच क्या फर्क रह जायेगा
आईये गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार करें कि हमें कैसे भारत का निर्माण करना है ऐसा विचार करने से पूर्व एक बार पुरे विश्व का भ्रमण या उसकी जानकारी हाशिल जरूर कर लेवे क्यूंकि फ़िनलैंड एक ऐसा देश है जहाँ धर्म के लिए कोई स्थान नहीं है और वहां अपराध विश्व में सबसे कम है। धर्म से प्रगति होगी या नहीं होगी ये तो नहीं पता लेकिन इतना तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि कट्टरता से समाज और देश का नुकसान ही होगा बस कुछ चंद लोगो का विशेष व्यक्तिगत लाभ होगा। अगर ये बात सबके समझ आ जाये तो हम उन विशेष लाभ लेने वाले लोगो का हथियार नहीं बनेंगे और जो समय और ऊर्जा कट्टरता फ़ैलाने में लगा रहे है उससे हम अपने ऊपर खर्च करे तो हम जरूर सफल बन सकेंगे और समाज और देश का भी भला उसी से होगा।
इस लेख को समाप्त करने से पहले बस इतना कहना चाहूंगा कि सरकारों और लोगो का दोष निकलने के बजाय ये सोचने कि जरूरत है कि हमने अपने लिए, समाज और देश के लिए क्या कुछ अच्छा किया जिससे आने वाली पीढ़ी एक अच्छे माहौल में जीवन जी सके और भारत फिर से विश्व गुरु बन सके।
जय हिन्द, जय भारत, मेक इन इंडिया नंबर वन
लेखक : मिथिलेश सिंह [भारतीय सेवा रत्न अवार्ड से सम्मानित]

05/04/2024