| राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 समारोह में आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।
आज, 3 जून 2026 को नई दिल्ली के में आयोजित यह समारोह देशभर की उन उत्कृष्ट पंचायतों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है, जिन्होंने सतत् विकास, सुशासन, जनभागीदारी और समावेशी ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
Pibraipur
Official page of Press Information Bureau - PIB, Government of India Raipur, MINISTRY OF I & B, GoI
03/06/2026
| “महिला-हितैषी पंचायत” थीम के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सतत् विकास पुरस्कार (DDUPSVP) उन ग्राम पंचायतों को सम्मानित करता है, जो महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा, सम्मान एवं समान सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रेरणादायी प्रयास कर रही हैं।
यह सम्मान जागरूकता, संवेदनशीलता और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है, जिसने महिलाओं के लिए सुरक्षित, सशक्त और समावेशी ग्रामीण समाज के निर्माण में प्रेरणादायी योगदान दिया है।
03/06/2026
| “सुशासन वाली पंचायत” थीम के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सतत् विकास पुरस्कार (DDUPSVP) उन ग्राम पंचायतों को सम्मानित करता है, जो पारदर्शिता, जवाबदेही, जनभागीदारी एवं प्रभावी प्रशासन को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं।
यह सम्मान सुशासन, नवाचार और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है, जिसने सशक्त, उत्तरदायी और विकासोन्मुख ग्रामीण भारत के निर्माण में प्रेरणादायी योगदान दिया है।
03/06/2026
| “गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका युक्त पंचायत” थीम के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सतत् विकास पुरस्कार (DDUPSVP) उन पंचायतों को सम्मानित करता है, जो रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ग्रामीण जीवन को सशक्त बना रही हैं।
यह सम्मान उन ग्राम पंचायतों के प्रयासों की पहचान है, जो लोगों को बेहतर आजीविका के अवसर प्रदान कर गांवों को गरीबी मुक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही हैं।
योग, मानवता को भारत का कालातीत उपहार है, जो सीमाओं को लांघकर स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के नेतृत्व में, यह प्राचीन भारतीय विरासत कल्याण भावना के साथ विश्व को एकजुट करना जारी रखे हुए है।
01/06/2026
हर स्कैन सिर्फ एक लेन-देन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है!
के तहत, रेहड़ी-पटरी विक्रेता सहज डिजिटल भुगतान अपनाकर डिजिटल समावेशन की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
वाराणसी की सुशीला जी की मुस्कान, आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान है।
योजना से मिले सहयोग ने उनके छोटे व्यवसाय को नई मजबूती दी, आय बढ़ाई और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने का अवसर दिया।
जब छोटे उद्यमी सशक्त होते हैं, तभी विकसित भारत का सपना साकार होता है।
वर्ष 2020 में शुरू की गई योजना केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस योजना ने लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को पहचान, सम्मान और औपचारिक मान्यता प्रदान की है।
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