I Love Poem

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jeevan me bahavnao ko vyakt karne ka madhyam ha kavita

15/03/2023

शीश उठाये सीना ताने,
वर्दी में लग रहे सुहाने।
स्वस्थ प्रसन्न वीर मतवाले,
कन्धों पर बन्दूक संभाले।
कदम मिलाते कदम बढ़ाते,
बीच बीच में बैंड बजाते।
सेना के जवान जाते हैं,
हमें बहुत ही ये भाते हैं।
दोनो ओर सड़क पर भारी,
भीड़ लगायें हैं नर नारी।
उन्हें बधाई देते हैं सब,
बजा बजा कर ताली जब तब।
भारत की सीमा विशाल है,
कहीं चढ़ाई कहीं ढाल है।
दुर्गम घाटी ऊँचे टीले,
मीलों मार्ग कठिन बर्फीले।
वहाँ आ डटा है जो दुश्मन,
चाह रहा औ करे आक्रमण।
बढे वहाँ तक जायेंगे ये,
उस को मार भगायेंगे ये।
हम तो अभी निरे हैं बालक,
लेकिन देश भक्त प्रण पालक।
सीख रहे हैं शस्त्र चलाना,
कदम मिलाना ,कदम बढ़ाना।
और बड़े कुछ हो जाने पर,
हम भी वीर सिपाही बनकर,
इसी तरह से मार्च करेंगे,
अगर पुन: दुश्मन उभरेंगे।

17/10/2019

करवा चौथ
बदलता संसार
बदलता व्यवहार
बदलते सरोकार
बदलते संस्कार
बदलते लोग
बदलते योग
बदलते समीकरण
बदलते अनुकरण
बदलता सब कुछ
पर नहीं बदलता
नारी का सुहाग के प्रति समर्पण
साल दर साल निभाती है वो रिवाज
जिसे करवा चौथ के नाम से
जानता है सारा समाज
हे ईश्वर हमें इतना तो समर्थ कर
कि हम दे सकें उसे
उस के हिस्से की अनुभूतियाँ सोच

16/10/2019

मेरे बच्चे, मेरे प्यारे,
तू मेरे जिस्म पर उगा हुआ
इक प्यारा सा नन्हा फूल...
क्या है तेरा मुझसे रिश्ता?
बस....एक लाल धागे का...
टूटने पर भी उतना ही सच्चा, उतना ही पक्का
जितना परमात्मा से आत्मा का रिश्ता.

तेरी मुस्कुराहटों से जागता है
मेरी सुबहों का लाल सूरज.
तेरी संतुष्टी में ढलता है
मेरी शामों का सुनहरी सूरज.
तेरी हिम्मतों से खिलता है
मेरी रातों का सफेद चंद्रमा.
तेरी खुशियों में झिलमिलाते हैं
मेरी रातों के चंचल तारे.

तेरा जीवन सफ़र है मेरी आकाशगंगा
जहाँ तेरी कामयाबी ...है मेरा स्वर्णिम मुकाम वहीँ
जहाँ तू नहीं...वो स्वर्ग हो कर भी मेरे लिए स्वर्ग नहीं.

तेरी हिम्मत की बताये रास्तों पर चल कर
उलझने की बजाये तूने अपना रास्ता खुद चुना.

मोती मिलेंगे तुझे...मेरे बच्चे...

बस जिन्दगी की सिप्पियाँ खुद ही खोल कर देखना होगा.
अंतहीन नीले आसमान की ऊंचाइयो में अकेले पंछी की तरह धीरज से उड़ना होगा.
अपनी रातों के रंगीन सपनों को खुली आँखों से हकीकत में उतारना होगा.
अपनी खामोशियों में मचलते शब्दों को चुन चुन कर गीतों से संवारना होगा.
अपनी राहों में परमात्मा की उंगली थामे बादलों के महलों में छुपे खज़ाने को खुद ही तलाशना होगा.

वेदों की सच्चाईओं का आशीर्वाद देती हूँ तुझे...

तेरी आँखों में हर पल सूरज की रोशनी जगमगाए
वायू देवता तेरे प्राणों में निरंतर बसें
वाणी में अग्नी सी साफ़ सच्चाई और
चंद्रमा की चांदनी सी मासूमियत तेरे दिल में बसे.

ओ परमात्मा ...
मेरे बच्चे के संकल्प मंगलमय कर दे
उसके रोम रोम में चिंतन की काबिलियत भर दे
मेरे बच्चे के मन में सच्चाई, शांती और मुहब्बत भर दे
मेरे बच्चे को अपना प्रिय जान उसका जीवन सुखमय कर दे
अपने रहमों करम की बारिश से मेरे बच्चे के घर में दाने भर दे.

15/10/2019

वो हमेशा अक्षम रहे बोलने में।
बिना बोले सब किये जाने की आदत
और दूसरों को बोलने देने की आदत ठेठ हो गयी समय के साथ।
माँ खीजती रहती है अक्सर
और गाहे बगाहे हमलोग भी किसी ना किसी मुद्दे की धौंस जमा देते हैं।
कैसे कोई आदमी इच्छा नहीं करता किसी भी चीज़ की,
कैसे सीख जाता है बाँध लेना ज़रूरतों को मुट्ठियों तक।
उन्होंने जो किया बस इतनी ही दूर में करते रहे हैं।
सब लेते रहे हैं जो लेना रहा उनसे
और कहते रहे उनको कमतर क्योंकि
वो जोर से कभी बोले नहीं कुछ
और छीना नहीं कुछ किसी से।
मेरे हाथ देखने में उनके हाथों जैसे लगते हैं
और मेरी आँखें भी उनकी आँखों जैसी,
पेड़ों की छाँव में रहते-रहते बीजों के मन में भी पलती है इच्छा
पेड़ होने की।

14/10/2019

लौट आया हूँ तुम्हारे द्वार से , थक गया था मैं तुम्हे आवाज दे दे कर।
मोड़ पर वादा तुम्हारा आँख में आँसू लिए
लौट जाने की विनय करता हुआ व्याकुल मिला।
तब तुम्हारे मौन का रूमाल उसको सौंपकर
कह दिया अब फायदा क्या ! क्या शिकायत ! क्या गिला !
रह गया मेरा समर्पण ही कहीँ कुछ कम,
इसलिए खामोश था शायद तुम्हारा घर।
एक बिन्नी टूटकर जो थी बनी वरदायिनी
आज मुझसे कह रही तुमने मुझे माँगा न था।
बाँध आयीं डोर कच्ची बरगदों ने यह कहा
मावसों पर जो बंधा वह प्यार का धागा न था।
कुल मिलाकर दांव पर हैं आज मेरे भ्रम,
हार जाओगी बहुत कुछ जीतकर चौसर।
स्वप्न में भी मांग लो वह भी मिले तुमको सदा
प्रार्थना में मांग बैठा था कभी भगवान से।
आज मेरी प्रार्थना का फल तुम्हे मिल जाएगा
मुक्त कर दूंगा स्वयं को प्यार के अहसान से।
अब सतायेंगे मुझे बस याद के मौसम, और गीतों में तुम्हारे नाम के अक्षर।

06/10/2019

मैं कुछ दिनों तनहाई चाहूँ
हर बन्धन से बिदाई चाहूँ

कई ख़्वाब खेले पलकों पर
फिसले और खाक़ हो गये
बीते थे तेरे आगोश में
वो लम्हें राख हो गये
एक रात गुजरे दर्द के आलम में

क़ुछ ऐसी रहनुमाई चाहूँ.
मैं कुछ दिनों तनहाई चाहूँ...
रफ़्ता-रफ़्ता अश्क़ बहे थे
वो रात भी तो क़यामत थी
क़ैद समझ बैठे जिसे तुम
वो सलाख़ें नहीं मेरी मुहब्बत थी
ज़मानत मिली तेरी फुर्क़त को
अब दुनिया से रिहाई चाहूँ.
मैं कुछ दिनों तनहाई चाहूँ.

छलके थे लबों के पैमाने
उस मयख़ाने में तेरा ही वज़ूद था
महफूज़ जिस धडकन में मेरी साँसें थीं
आज हर शख़्स वहाँ मौजूद था
साँसों से हारी वफ़ा भी
अब थोङी सी बेवफ़ाई चाहूँ.
मैं कुछ दिनों तनहाई चाहूँ.

27/09/2019

जख़्म दिल का नहीं भरा शायद,
दर्द सा कुछ अभी उठा शायद।

कहते-कहते वो रुक गया ऐसे,
अजनबी मैं उसे लगा शायद।

उसने यूँ ही निगाहें बदली हैं,
सच उसे भी नहीं पता शायद।

कल वो मुझको करेगा याद ऐसे,
नाम था एक अजीब सा शायद।

बिन कहे साथ छोड़ कर जाना,
याद होगा वो वाकया शायद।

जब वो लौटेगा तब ही मानेंगे,
है कहीं ना कहीं ख़ुदा शायद।

साथ वो लम्हे ले गया सारे,
और एक लफ्ज़ रह गया शायद।

25/09/2019

ग़म की भट्टी में शौक़ ls उतर जाऊँगा
तप के कुंदन सा मैं इक रोज़ निखर जाऊँगा।

ज़िंदगी ढंग से मैं कर के बसर जाऊँगा
काम नेकी के ज़माने में मैं कर जाऊँगा।

मर के जाना है कहाँ मुझ को नहीं ये मालूम
रह के दुनिया में कोई काम तो कर जाऊँगा।

ग़म उठा लूँगा जो बख़्शेगा ज़माना मुझ को
तेरे दामन को तो ख़ुशियों से मैं भर जाऊँगा।

देखता जाऊँगा मुड़ मुड़ के तुम्हारी nlk
छोड़ कर जब मैं तुम्हारा ये नगर जाऊँगा।

ख़ाक पर गिरने से मिट जाएगी हस्ती मेरी
बन के आँसू तिरे दामन पे ठहर जाऊँगा।

लाख बे-रंग हो तस्वीर जहाँ की लेकिन
रंग तस्वीर के ख़ाके में मैं भर जाऊँगा।

तू ने इक बार हljr से जो देखा ऐ दोस्त
मैं ज़माने की निगाहों से उतर जाऊँगा।

मैं तो बढ़ता ही रहूँगा रह-ए-हक़ में ऐ 'नूर'
क्यूँ समझती है ये दुनिया कि मैं डर जाऊँगा।

22/08/2019

जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं
सच्चे दोस्त बाज़ार में बिकते नहीं हैं

ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपना रहे जो
सच है ऐसे लोग दिल में टिकते नहीं हैं

सूरतों में जो सीरत को छिपा लेते हैं
वो कभी सादा चेहरों में दिखते नहीं हैं

होती है नुमाया[1] दिल की हर बात, दोस्त!
मन के भेद यूँ परदों में छिपते नहीं हैं

इंसान है वह जो जाने इंसानियत को
हैवान कभी निक़ाबों में छिपते नहीं हैं

वक़्त तले दब जाती हैं कही-सुनी बातें
हम कभी कुछ अपने दिल में रखते नहीं हैं

पलटते हैं जो कभी माज़ी के पन्नों को
ये आँसू तेरी याद में रुकते नहीं हैं

न मरना आसाँ है, न जीना ही आसाँ है
चाहकर भी मिटने वाले मिटते नहीं हैं

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