13/02/2023
एक समाचार है कि बड़कोट के नौजवान अरुण को इस आधार पर नकल विरोधी कानून के अंतर्गत मुकदमाबद्ध किया गया है क्योंकि उसने प्रश्न पत्र पर सील न होने की शिकायत की। पोर्टल के लिए वह समाचार है उसने प्रकाशित किया। प्रश्न यह है कि सील है या नहीं है? या सील होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए? यदि होनी चाहिए तो फिर क्यों नहीं है? और यदि नहीं होनी चाहिए तो फिर स्पष्ट होना चाहिए कि सील होने की आवश्यकता नहीं है और यह बात सब परीक्षार्थियों को मालूम होनी चाहिए कि प्रश्न पत्रों को सील नहीं किया जा रहा है। यदि प्रश्न पत्रों को सील किया जाना आवश्यक है तो फिर अरुण का गुनाह क्या है? और उस पोर्टल का गुनाह क्या है? आप मैसेंजर को सूट करेंगे तो इसका अर्थ है आप जानकारियों को दबाएंगे! पहले भी यह चर्चा में रहा है कि PCS की परीक्षाओं में भी बिना सील के या कभी एक सील वाले प्रश्न पत्र दिए गए हैं तो यह कहां तक सत्य हैं! भ्रामक समाचार देना अपराध है, मगर इस भ्रम का निवारण करना किसका कर्तव्य है? यह भी तो निर्धारित होना चाहिए। हम सावधान करते रह गए कि जल्दी बाजी में परीक्षा मत करवाइए। पहले सिस्टम को क्लीनअप कर लीजिए, छात्रों को पूरा विश्वास हो जाए कि सिस्टम क्लीनअप हो गया है तो फिर इस तरीके की स्थितियां नहीं आएंगी। आप जिन छात्रों पर या जिन लोगों पर भी आप मुकदमा करेंगे, नकल विरोधी कानून के तहत नकल माफिया के बजाय जो है, जो नकल माफिया के विक्टिम हैं आप उनको दबाने के लिए इस नकल विरोधी कानून का उपयोग कर रहे हैं! अरुण नाम का छात्र है उसका पहला शिकार हो गया। मैं इस प्रवृत्ति का विरोध करता हूं और यदि ऐसा करना गुनाह है तो हमारे ऊपर भी नकल विरोधी कानून के तहत मुकदमा करिए।
िरोधी_कानून
Pushkar Singh Dhami

11/02/2023