11/05/2026
विषय: मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण विषय पर दो दिवसीय आवासीय कार्यशाला
दिनांक: 05 मई - 06 मई , 2026
स्थान: झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची , झारखण्ड
आयोजक: झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT) एवं ‘वर्ल्ड बीइंग’ (World Being)
झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT) तथा ‘वर्ल्ड बीइंग’ के तकनीकी सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण (Mental Health and Wellbeing) विषय पर दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 05 - 06 मई 2026 को किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वर्ल्ड बीइंग के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया, जिसमें विभिन्न महत्वपूर्ण सत्रों के माध्यम से विषय की व्यापक समझ विकसित की गई ।
प्रारंभिक सत्र में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता , इसका व्यक्ति के दैनिक जीवन पर प्रभाव, तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास में इसकी भूमिका क्या है । साथ ही, यह भी चर्चा की गई कि विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप मानसिक स्वास्थ्य को किस प्रकार सुदृढ़ किया जा सकता है।
सत्र के दौरान जीवन में आने वाली चुनौतीपूर्ण एवं विकट परिस्थितियों का सामना करने हेतु आंतरिक संसाधनों एवं भावनात्मक कल्याण के कौशल पर प्रभावी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को यह समझ विकसित कराई गई कि किस प्रकार व्यक्ति अपने कौशलों और क्षमताओं के माध्यम से कठिन परिस्थितियों से उबर सकता है।
एटिट्यूडिनल हीलिंग (Attitudinal Healing):
एटिट्यूडिनल हीलिंग से संबंधित विषयों, इसके प्रमुख स्तंभों (pillars) एवं सिद्धांतों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही, इन सिद्धांतों को व्यक्तिगत जीवन एवं शिक्षण-प्रक्रिया में समाहित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सकारात्मक मनोविज्ञान से जुड़े सत्र में वैज्ञानिक तरीकों से उन अध्ययन पर चर्चा की गई जो वेल बीइंग को बढ़ाने और जीवन में सफलता पाने से जुड़ा था।
भावनात्मक बुद्धिमत्ता के सत्र में भावनात्मक जागरूकता एवं भावनाओं के प्रबंधन पर चर्चा हुई।
निष्कर्ष एवं मुख्य बिंदु
इस दो दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से उपरोक्त सभी विषयों पर गहन समझ विकसित की गई। निष्कर्षतः यह स्पष्ट हुआ कि मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण का सीधा संबंध व्यक्तिगत जीवन से है, इसीलिए यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उनके साथ सकारात्मक जुड़ाव स्थापित करने का एक अनिवार्य आधार है।
29/04/2026
विषय: लैंगिक समानता विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला
दिनांक: 22 अप्रैल, 2026
आयोजक़ : झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT) ,राँची
तकनीकी सहयोग: सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (C3)
परिचय एवं सहभागिता
दिनांक 22 अप्रैल, 2026 को झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् ( जे.सी.ई.आर.टी ) के उप-निदेशक श्री विंध्यांचल पाण्डेय एवं सहायक निदेशक श्री बांके बिहारी सिंह के नेतृत्व में सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (Centre for catalyzing change , C 3) के तकनीकी सहयोग से लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बेहतर समझ विकसित करने और इसे झारखण्ड राज्य के परिप्रेक्ष्य में जेंडर से संबंधित निर्मित संकेतकों एवं टूल का मूल्यांकन करने हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् ,राँची में किया गया। इस कार्यशाला में जे.सी.ई.आर.टी. के संकाय सदस्यों , राज्य के विभिन्न जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs), और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBVs) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया ।
कार्यशाला का उद्देश्य
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में औपचारिक और अनौपचारिक माध्यमों से प्रचलित 'लैंगिक मानदंडों' (Gender Norms) में सकारात्मक बदलाव लाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा करना और इससे संबंधित संकेतकों एवं टूल का मूल्यांकन करना था।
प्रमुख संबोधन
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उप-निदेशक, जे.सी.ई.आर.टी., श्री विन्ध्याचल पाण्डेय ने लैंगिक संवेदनशीलता और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया । उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में विद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और उत्तरदायी है।
तकनीकी सत्र एवं सहयोग
इस कार्यशाला के सफल संचालन में सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (C3) द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया। विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने में मदद की कि कैसे पाठ्यक्रम और विद्यालयी परिवेश के जरिए बच्चों के व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता है।
निष्कर्ष
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों में लैंगिक संवेदनशीलता को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया, ताकि एक समतामूलक शैक्षिक वातावरण का निर्माण किया जा सके।
07/04/2026
विषय: मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण विषयक एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन
दिनांक: 02 अप्रैल, 2026
स्थान: झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) रांची, झारखंड
आयोजक: झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) एवं 'वर्ल्ड बीइंग' (World Being)
कार्यक्रम का परिचय एवं उद्घाटन
झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) तथा 'वर्ल्ड बीइंग' के संयुक्त तत्वाधान में स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण (Mental Health and Wellbeing) विषय पर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ JCERT और वर्ल्ड बीइंग के प्रतिनिधियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन और स्वागत समारोह के साथ किया गया।
मुख्य सत्र एवं प्रस्तुतियाँ
पाठ्यचर्या में एकीकरण की आवश्यकता: वर्ल्ड बीइंग की कंट्री डायरेक्टर, नंदिता भाटला ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल एक अतिरिक्त विषय नहीं, बल्कि जीवन कौशल का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्यों वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य में मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण की सामग्री को पाठ्यक्रम (Curricular Integration) के साथ जोड़ना अनिवार्य है।
JCERT का शैक्षणिक दृष्टिकोण: JCERT के सहायक निदेशक, श्री बांके बिहारी सिंह ने स्कूली छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति विभाग के शैक्षणिक दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार शिक्षकों और शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से छात्रों के मानसिक स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है।
विशिष्ट संबोधन: कार्यक्रम के दौरान JCERT के उप-निदेशक, श्री प्रदीप कुमार चौबे एवं श्री विंध्याचल पांडेय ने अपना विशेष संबोधन दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्य के विद्यालयों में एक सकारात्मक वातावरण निर्माण हेतु विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नीतिगत तालमेल (NEP 2020 एवं NCF 2023): वर्ल्ड बीइंग के नेशनल प्रोग्राम मैनेजर, श्री हरि शंकर सिंह ने कल्याण (Wellbeing) की पृष्ठभूमि और इसके महत्व पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने तकनीकी सत्र में यह रेखांकित किया कि किस प्रकार यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के लक्ष्यों के साथ पूर्णतः संरेखित (Align) है।नेशनल ट्रेनिंग मैनेजर (वर्ल्ड बीइंग) मधुलिका मणि ने प्रतिभागियों के साथ mindfulness practice के साथ wellbeing की समझ पर चर्चा की, साथ ही CPD ट्रेनिंग के साथ इसको जोड़ने और उपयोगी परिणाम की चर्चा भी की।
निष्कर्ष एवं मुख्य बिंदु
कार्यशाला में इस बात पर सहमति बनी कि छात्रों के समग्र विकास के लिए उनके भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है।प्रतिभागियों ने module की समीक्षा की इस प्रकार कार्यक्रम के अंत में आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की गई ताकि इन सिद्धांतों को जमीनी स्तर पर विद्यालयों में लागू किया जा सके।
26/03/2026
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (बुनियादी चरण एवं स्कूली शिक्षा) के संताली भाषा में अनुवाद हेतु कार्यशाला का आयोजन (17.03.2026 - 25.03.2026)
प्रस्तावना
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), भुवनेश्वर के निर्देशानुसार, झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (बुनियादी चरण एवं स्कूली शिक्षा) के संताली भाषा में अनुवाद हेतु एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पूर्व में आयोजित चार चरणों के अनुवाद कार्यों को समेकित (Consolidate) करना और उन्हें अंतिम रूप देना था।
कार्यशाला का विवरण
आयोजन संस्था: झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची।
सहयोग एवं मार्गदर्शन: क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), भुवनेश्वर।
अवधि: दिनांक 17 मार्च 2026 से 25 मार्च 2026 तक (नौ दिवसीय)।
प्रकृति: आवासीय कार्यशाला।
कार्यक्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन
इस कार्यशाला का आयोजन प्रोफेसर देवाशीष महापात्रा (कार्यक्रम समन्वयक, RIE भुवनेश्वर) के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित होकर अनुवाद की बारीकियों और पाठ्यचर्या की तकनीकी शब्दावली के सटीक रूपांतरण हेतु प्रतिभागियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।
JCERT की ओर से इस संपूर्ण कार्यक्रम का सफल समन्वय संगीता कुमारी (कार्यक्रम समन्वयक, JCERT राँची) द्वारा किया गया।
प्रमुख गतिविधियाँ एवं उपलब्धियाँ
अनुवाद का समेकन: पूर्व के चार चरणों में किए गए अनुवाद कार्य की गहन समीक्षा की गई और उन्हें एकरूपता प्रदान करते हुए समेकित किया गया।
भाषाई शुद्धता: संताली भाषा की विशिष्टता को ध्यान में रखते हुए बुनियादी और स्कूली शिक्षा के मापदंडों का सरल एवं सुबोध अनुवाद सुनिश्चित किया गया।
शिक्षकों की सहभागिता: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए चयनित शिक्षकों को इस कार्य हेतु JCERT में आवासीय व्यवस्था के अंतर्गत प्रतिनियुक्त किया गया था, जिन्होंने निर्धारित अवधि में कार्य को पूर्ण किया।
निष्कर्ष
दिनांक 25 मार्च 2026 को कार्यशाला के समापन तक, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के संताली अनुवाद का एक ठोस प्रारूप तैयार कर लिया गया है। यह अनुवादित दस्तावेज़ संताली भाषी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को समझने में अत्यंत उपयोगी साबित होगा।
19/03/2026
शिक्षक प्रशिक्षकों हेतु तीन दिवसीय (आवासीय) क्षमता संवर्धन कार्यक्रम
दिनांक: 11 मार्च 2026 से 13 मार्च 2026 (प्रथम चरण)
स्थान: जे.सी.ई.आर.टी. परिसर, राँची
प्रतिभागी: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के शिक्षक प्रशिक्षक एवं झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT) के संकाय सदस्य।
पृष्ठभूमि एवं उद्घाटन सत्र
समग्र शिक्षा के अंतर्गत राज्य कार्यकारिणी समिति के निर्णयानुसार, शिक्षक प्रशिक्षकों के सतत पेशेवर विकास (Continuous Professional Development) हेतु इस कार्यशाला का आयोजन झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), राँची,में दिनांक 11 मार्च 2026 से 13 मार्च 2026 (प्रथम चरण) तक किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ जे.सी.ई.आर.टी. के उपनिदेशक श्री विंध्याचल पाण्डेय के प्रेरणादायी उद्बोधन से हुआ। उन्होंने ज्ञानार्जन संबंधी भावों को उद्धृत करते हुए शिक्षक प्रशिक्षकों को सक्षम यानि क्षमता से युक्त होने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग में दक्ष होकर प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत ग्रहण क्षमता (Learning Capacity) के अनुरूप शिक्षण करना चाहिए। उन्होंने बच्चों को वैश्विक पटल पर लाने के विजन को साझा किया।
प्रथम दिवस: अनुसंधान प्रविधि एवं सांख्यिकी
मुख्य वक्ता: डॉ. मनोज कुमार (सहायक प्रोफेसर, डोरंडा कॉलेज राँची )
प्रथम दिन का सत्र शैक्षिक अनुसंधान की गुणवत्ता और सांख्यिकीय शुद्धता पर केंद्रित रहा। मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
अनुसंधान की निष्पक्षता: शोधकर्ता को 'Biased' (पूर्वाग्रही) न होकर शोध के वास्तविक उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
सांख्यिकीय विश्लेषण: डेटा विश्लेषण में मीन (Mean), मीडियन (Median) और मोड (Mode) की महत्ता पर प्रकाश डाला गया।
सांख्यिकीय परीक्षण: दो समूहों के बीच के अंतर का विश्लेषण करने के लिए 'टी-टेस्ट' (T-test) जैसे उपकरणों के प्रयोग को समझाया गया, ताकि यह निर्धारित हो सके कि परिणाम वास्तविक हैं या संयोग ।
साक्षात्कार के विभिन्न प्रकारों और अवलोकन हेतु 'रूब्रिक्स' निर्माण का प्रयोगात्मक ज्ञान दिया गया।
गतिविधि - प्रतिभागियों ने दिए गए शोध पत्रों की व्याख्या की और उसका प्रस्तुतीकरण किया ।
द्वितीय दिवस: डिजिटल शिक्षा एवं समावेशी प्रयास
मुख्य वक्ता: प्रो. डॉ. इंदु कुमार (NCERT) एवं टीम
द्वितीय दिन तकनीकी नवाचारों और समावेशी शिक्षा पर विस्तृत चर्चा हुई:
ICT एवं सरकारी पोर्टल: भारत में ICT की विकास यात्रा और NROER, SWAYAM, तथा 'SWAYAM PRABHA' की भूमिका पर चर्चा की गई।
PM e-Vidya: टीवी चैनलों के माध्यम से घर-घर शिक्षा पहुँचाने की पहल और गुजरात के 'विद्या समीक्षा केंद्र' के मॉडल को समझाया गया।
समावेशी शिक्षा: 21 प्रकार की दिव्यांगताओं की पहचान (Screening) और उनके लिए विशेष सहायता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
मानसिक स्वास्थ्य: 'मनोदर्पण' पोर्टल और 'सहयोग टीवी' के माध्यम से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने पर चर्चा हुई।
तकनीकी सत्र एवं 'दीक्षा' (DIKSHA):
डॉ. श्वेता तिवारी एवं डॉ. ख्याति (NCERT) द्वारा 'दीक्षा' पोर्टल और 'e-जादुई पिटारा' पर व्यावहारिक (Hands-on) प्रशिक्षण दिया गया। इसमें निम्नलिखित AI फीचर्स का प्रदर्शन किया गया:
टेक्स्ट टू ऑडियो एवं रीड अलाउड।
वीडियो कीवर्ड सर्च और अनुवाद (Translation)।
'आस्क दीक्षा' (Ask DIKSHA): जो पुस्तकों से संबंधित ऑथेंटिक संदर्भ प्रदान करता है।
e-जादुई पिटारा: कथा सखी, टीचर तारा और पैरेंट तारा जैसे व्हाट्सएप-आधारित एआई बॉट्स का उपयोग।
तृतीय दिवस: वैयक्तिक एवं अनुकूलित अधिगम (PAL)
अंतिम दिन का मुख्य विषय पर्सनलाइज्ड एडेप्टिव लर्निंग (PAL) रहा।
इसमें बताया गया कि प्रत्येक प्रश्न का मूल्य समान नहीं होता; बच्चों की सीखने की गति के अनुसार शिक्षण सामग्री उपलब्ध करानी चाहिए।
गतिविधियाँ: प्रतिभागियों ने दीक्षा कोर्सेज और 'किताब एक, पढ़े अनेक' (ऑडियो बुक्स) पर हैंड्स-ऑन एक्टिविटी की।
समापन एवं संकल्प
कार्यशाला का समापन उपनिदेशक श्री विंध्याचल पाण्डेय के 'सम्भाषण' के साथ हुआ। उन्होंने ऋग्वेद के मंत्र और चरेवेति के संदेश से सभी को अभिप्रेरित किया :
"तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु" > (अर्थात्: मेरा वह मन कल्याणकारी संकल्पों वाला हो।)
उन्होंने "चरैवेति चरैवेति" (निरंतर आगे बढ़ते रहो) के मंत्र के साथ प्रशिक्षण के ज्ञान को धरातल पर उतारने का आह्वान किया। सत्र के अंत में उपनिदेशक महोदय एवं NCERT की टीम द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
05/03/2026
स्कूल लीडरशिप अकादमी प्रभाग (SLA) के अंतर्गत विभिन्न चयनित विषयों पर मॉड्यूल प्रूफ-रीडिंग एवं अंतिम संपादन कार्यशाला
पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य
जे.सी.ई.आर.टी. राँची के ज्ञापांक 1199, दिनांक 20.08.2025 के आलोक में राज्य के प्रत्येक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के दो-दो संकाय सदस्यों द्वारा स्कूल लीडरशिप अकादमी प्रभाग (SLA) के अंतर्गत विभिन्न चयनित विषयों पर मॉड्यूल लेखन का कार्य प्रारंभ किया गया था। इन मॉड्यूल्स के लेखन, डिजाइनिंग और ले-आउटिंग की प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत, मुद्रण (Printing) से पूर्व इनकी सघन जाँच और त्रुटि-निवारण के उद्देश्य से इस दो दिवसीय आवासीय कार्यशाला (25 - 26 फ़रवरी 2026 ) का आयोजन किया गया।
कार्यशाला की मुख्य गतिविधियाँ
दो दिनों तक चली इस कार्यशाला में निम्नलिखित चरणों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
भाषाई शुद्धता: मॉड्यूल में प्रयुक्त भाषा, व्याकरण और वर्तनी की बारीकी से जाँच की गई।
तथ्यात्मक जाँच: सुनिश्चित किया गया कि संकलित आंकड़े और सूचनाएं नवीनतम एवं सटीक हैं।
डिजाइन एवं ले-आउट समीक्षा: ग्राफिक्स, चित्रों और तालिकाओं के स्थान और उनकी स्पष्टता का अवलोकन किया गया ताकि पठन सामग्री आकर्षक और सुगम हो।
एकरूपता: सभी डायट्स द्वारा तैयार सामग्री में एक मानक प्रारूप (Standard Format) सुनिश्चित किया गया।
निष्कर्ष एवं उपलब्धि
26 फ़रवरी, 2026 को कार्यशाला के समापन तक सभी प्रस्तावित मॉड्यूल्स का प्रूफ-रीडिंग कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया। अब ये मॉड्यूल त्रुटिहीन अवस्था में मुद्रण के लिए तैयार हैं। इसे NCSL - NIEPA के वेब साईट पर भी अपलोड किया जायेगा
05/03/2026
स्कूली पाठ्यक्रम में शिक्षा के माध्यम से सतत विकास (ESD) और वैश्विक नागरिकता शिक्षा (GCED) के एकीकरण एवं कार्यान्वयन पर रोलआउट कार्यशाला।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् NCERT, नई दिल्ली एवं झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (JCERT), रांची द्वारा दिनांक 25 फरवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक चार दिवसीय आवासीय कार्यशाला का आयोजन JCERT राँची में किया गया ।
कार्यशाला का परिचय और उद्देश्य
इस चार दिवसीय आवासीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्कूली शिक्षा में 'सतत विकास के लिए शिक्षा' (ESD) और 'वैश्विक नागरिकता शिक्षा' (GCED) के सिद्धांतों को शामिल करना था । वैश्विक मुद्दे - जलवायु परिवर्तन ,गरीबी,गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, शांति - अहिंसा ,सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिकता - अपने अधिकारों और कर्तव्यों की समझ ,सामाजिक न्याय, समानता ,पर्यावरण संरक्षण ,सामुदायिक सेवा आदि इन विषयों पर कार्यशाला में शिक्षक और शिक्षक-प्रशिक्षकों को आवश्यक कौशल और विषयों को लागू करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों से अवगत कराया गया।
प्रथम दिवस (25.02.2026): उद्घाटन एवं परिचय
उद्घाटन: कार्यशाला का शुभारंभ NCERT और J.C.E.R.T. के पदाधिकारियों द्वारा 'दीप प्रज्ज्वलन' के साथ किया गया। J.C.E.R.T के उप-निदेशक श्री विंध्याचल पांडेय ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया।
प्रो. आशिता रवींद्रन द्वारा कार्यशाला की रूपरेखा और उद्देश्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया।
डॉ. पी. डी. सुभाष और डॉ. डेविड लाल ने GCED की अवधारणा पेश की। इसके उपरांत प्रो. शर्मिष्ठा शर्मा ने "ESD में मार्गदर्शक के रूप में शिक्षक" विषय पर चर्चा करते हुए शिक्षकों को परिवर्तन का वाहक बताया।
झारखण्ड के परिप्रेक्ष्य में जिला शिक्षा अधीक्षक (राँची ) श्री बादल राज ने अपनी बातों को रखा और सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया ।
द्वितीय दिवस (26.02.2026): दिशा-निर्देश और नीति कार्यान्वयन
प्रो. आशिता रवींद्रन ने ESD और GCED को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश साझा किए।
डॉ. वंदना पुन्नक्कल ने शिक्षक-प्रशिक्षकों के लिए विशिष्ट मार्गदर्शिका तैयार करने पर सत्र लिया। सभी विषयों से ESD और GCED को किस तरह जोड़ा जाए इसे विस्तारपुर्वक बताया । प्रश्न पत्रों के निर्माण में और आकलन में भी ESD और GCED को समाहित करते हुए चलना है , इसे उदहारण के साथ बताया ।
सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL): डॉ. डेविड लाल ने सामाजिक-भावनात्मक अधिगम और कार्य योजनाओं के डिजाइन पर जोर दिया।
Suchitra Sychinth ने स्कूलों में ESD को लागू करने और उनकी संकल्पना पर सत्र का संचालन किया।
सत्र में मानवाधिकार ,शांति एवं अहिंसा ,विविधता ,लैंगिक समानता सभी विषयों को पाठ्यक्रम में जोड़कर कक्षा शिक्षण में शामिल करने पर बल दिया गया ।
तृतीय दिवस (27.02.2026): व्यवहारिक कार्यान्वयन और प्रस्तुतीकरण
रोडमैप निर्माण: सभी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने ESD और GCED के कार्यान्वयन के लिए समूह-वार 'प्रोजेक्ट प्रेजेंटेशन' और रोडमैप तैयार किए।
कार्य योजना: Suchitra Sychinth और सुसन सुकन्या ने ESD को लागू करने के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया।
छात्र कल्याण: अनन्या चटर्जी द्वारा छात्र कल्याण और वैश्विक नागरिकता पर 'हैंड्स-ऑन' (व्यावहारिक) गतिविधियाँ आयोजित की गईं।प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किये और इन गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता दिखाई ।
चतुर्थ दिवस (28.02.2026): सामुदायिक जुड़ाव एवं समापन
समुदाय से जुड़ाव: सुसन सुकन्या ने बताया कि विद्यालय की पहुँच को बढ़ाना है इसके लिए स्थानीय समुदाय को जोड़कर कक्षाओं में और विद्यालय में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है।
समापन सत्र: प्रतिभागियों ने कार्यशाला के अनुभवों को साझा किया। इस तरह से कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
मुख्य निष्कर्ष एवं भविष्य की कार्ययोजना
शिक्षकों में ESD और GCED को पाठ्यक्रम में एकीकृत करने के लिए व्यावहारिक समझ बनी विद्यालय में इसके क्रियान्वयन के लिए आधार, प्रोजेक्ट के रूप में बनाया गया ।
स्कूलों में सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया।
स्थानीय समुदायों और स्कूल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की रणनीतियों पर सहमति बनी।
26/02/2026
पाठ्यपुस्तक निर्माण कार्यशाला – द्वितीय चरण (कक्षा 3 से 8)
दिनांक: 18 फरवरी 2026 से 21 फरवरी 2026
अवधि: चार दिवसीय
लक्ष्य: गुणवत्तापूर्ण, दक्षता-आधारित एवं राज्य-विशिष्ट पाठ्यपुस्तकों का निर्माण
1. पृष्ठभूमि एवं परिचय
कक्षा 3 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों के निर्माण हेतु द्वितीय चरण की चार दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन दिनांक 18 फरवरी से 21 फरवरी 2026 तक किया गया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व प्रथम चरण में दो दिवसीय उन्मुखीकरण (Orientation) कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका था। उस चरण में लेखक मंडल एवं पैनल सदस्यों को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020' (NEP 2020) तथा NCERT द्वारा विकसित 'राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023' (NCF 2023) की मूल दृष्टि, दर्शन एवं संरचनात्मक अपेक्षाओं से विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया था।
2. कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य एवं शैक्षणिक विमर्श
द्वितीय चरण की इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पूर्व में प्रारंभ हुए अकादमिक विमर्श को तार्किक परिणति तक पहुँचाना था। कार्यशाला के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा एवं सहमति बनी:
साझा शैक्षणिक समझ: पाठ्यपुस्तक लेखन के लिए सभी सदस्यों के मध्य एक समान और एकमत अकादमिक दृष्टिकोण विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
दिशानिर्देश एवं संरचना: विषय-वार 'शिक्षक मार्गदर्शिका' (Teacher Guidelines) की समीक्षा की गई तथा 'पुस्तक संरचना' (Book Architecture Design) की वैज्ञानिक रूपरेखा पर पुनर्विचार कर उसे सुदृढ़ किया गया।
प्रारूप निर्धारण: गहन विचार-विमर्श के उपरांत 'अध्याय रूपरेखा' (Chapter Template Design) को सर्वसम्मति से अंतिम रूप प्रदान किया गया।
3. व्यावहारिक उपलब्धियाँ एवं लेखन प्रक्रिया
कार्यशाला मात्र चर्चा तक सीमित न रहकर व्यावहारिक उत्पादन की दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावी रही:
प्रथम प्रारूप (First Draft): अधिकांश पैनलों द्वारा कार्यशाला के दौरान ही कम से कम एक-एक अध्याय का प्रथम प्रारूप तैयार कर साझा किया गया।
मानक संचालन प्रक्रिया (SOP): पाठ्यपुस्तक निर्माण की 'मानक संचालन प्रक्रिया' को पुनः स्पष्ट किया गया, जिससे लेखन की चरणबद्ध प्रणाली पर सामूहिक सहमति बनी।
कार्य आवंटन: कार्यशाला के समापन सत्र में लेखकों ने अपनी रुचि एवं स्वैच्छिक सहमति के आधार पर अध्यायों का आवंटन स्वीकार किया और निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने का उत्तरदायित्व लिया।
4. विकसित एवं समेकित सामग्री
इस प्रक्रिया के दौरान आगामी लेखन हेतु निम्नलिखित महत्वपूर्ण सामग्री को अंतिम रूप दिया गया:
झारखंड लेखक दिशा निर्देश: विषय-वार एवं पैनल-वार विशिष्ट मार्गदर्शिका।
वैज्ञानिक पुस्तक संरचना: स्व-प्रमाणीकरण डिजाइन फ्रेमवर्क (Self-Certification Design Framework) सहित विस्तृत रूपरेखा।
कार्य आवंटन सूची: लेखकों के मध्य विषय/अध्याय का स्पष्ट विभाजन।
यह चार दिवसीय कार्यशाला अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूर्णतः सफल रही। इन प्रयासों के माध्यम से झारखंड राज्य की विशिष्टताओं को समाहित करने वाली गुणवत्तापूर्ण एवं दक्षता-आधारित पाठ्यपुस्तकों के निर्माण हेतु एक सुदृढ़ अकादमिक आधार स्थापित किया गया है। यह प्रक्रिया राज्य के शैक्षिक परिदृश्य में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
13/02/2026
झारखण्ड शिक्षा सेवा वर्ग-2 के नवनियुक्त पदाधिकारियों हेतु 42 दिवसीय (आवासीय ) विभागीय प्रेरण प्रशिक्षण
झारखण्ड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 'झारखण्ड राज्य संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा, 2023 ' की अनुशंसा के आलोक में 'झारखण्ड शिक्षा सेवा वर्ग-2 (मूल कोटि) के 09 नवनियुक्त पदाधिकारियों का 42 दिवसीय विभागीय प्रेरण (Induction) प्रशिक्षण कार्यक्रम झारखण्ड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (J.C.E.R.T.), राँची में दिनांक 07.02.2026 से प्रारंभ हो गया है।
प्रशिक्षण का समन्वय एवं उद्देश्य
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु श्री प्रदीप कुमार चौबे, उपनिदेशक, J.C.E.R.T., राँची को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है। 42 दिवसीय इस आवासीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नवनियुक्त पदाधिकारियों को विभागीय कार्यप्रणाली, नियमों और उत्तरदायित्वों से अवगत कराना है।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु एवं विषय-वस्तु
प्रशिक्षण के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की जा रही है:
प्रशासनिक ढाँचा: क्षेत्रीय शिक्षा पदाधिकारी की भूमिका, निदेशालय एवं संबद्ध कार्यालयों का परिचय तथा विद्यालयों के विभिन्न प्रकार।
नियमावली एवं सेवा शर्तें: झारखण्ड -बिहार शिक्षा सेवा (वर्ग-2) नियुक्ति नियमावली-1973, झारखण्ड सहायक शिक्षक सेवा शर्त नियमावली-2021, अनुशासनिक नियमावली-1994, एवं अवर शिक्षा सेवा नियमावली-2023 आदि ।
अधिनियम एवं अधिकार: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE)-2009, नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा नियम-2011, RTE की धारा 12(1)(c) तथा विद्यालयों की मान्यता के मानक आदि ।
नियोजन एवं प्रोन्नति: झारखण्ड प्राथमिक विद्यालय सहायक आचार्य नियुक्ति एवं सेवा शर्त नियमावली-2022, प्राथमिक शिक्षक प्रोन्नति नियमावली-1993, तथा शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय नियुक्ति नियमावली-2016 आदि ।
वित्तीय एवं माध्यमिक शिक्षा: बजट एवं योजना निर्माण, विभिन्न छात्रवृत्तियाँ, झारखण्ड प्लस-टू स्कूल शिक्षक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मी नियुक्ति नियमावली-2012 (संशोधित 2022), एवं शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2019 (संशोधित 2022), आदि ।
विधिक एवं परिषद संबंधी: झारखण्ड न्यायाधिकरण अधिनियम (संशोधित 2017), झारखण्ड अधिविध परिषद् (JAC) अधिनियम एवं इसके कार्य, तथा बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् (BEPC) सेवा नियमावली-1994 आदि ।
क्षेत्र भ्रमण एवं व्यावहारिक अनुभव
प्रशिक्षु पदाधिकारियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने हेतु विभिन्न स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है:
शैक्षणिक संस्थान: प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय, मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय जिला स्कूल, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV), झारखण्ड आवासीय बालिका विद्यालय, मॉडल स्कूल (मांडर) एवं आकांक्षा केंद्र आदि ।
प्रशासनिक कार्यालय: प्राथमिक शिक्षा निदेशालय, मध्याह्न भोजन निदेशालय, जे.ई.पी.सी. (JEPC), नेतरहाट, उपायुक्त (DC) कार्यालय, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) कार्यालय, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) एवं जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) कार्यालय आदि ।
अन्य: डायट (DIET), SDO कार्यालय, ADPO कार्यालय, बी.आर.सी. (BRC) एवं रुक्का डैम आदि ।
इस प्रशिक्षण के माध्यम से नवनियुक्त पदाधिकारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020), गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, झारखण्ड कोषागार संहिता (Treasury Code) और पेंशन नियमों से भी पूर्णतः अभिज्ञ हो सकेंगे, जिससे भविष्य में विभागीय कार्यों का निष्पादन सुगमतापूर्वक किया जा सके।
04/02/2026
राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 के अनुरूप पाठ्यपुस्तक निर्माण हेतु राज्य लेखक पैनल का फेज - I ओरिएंटेशन कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न
राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा स्कूली शिक्षा (NCF SE 2023) तथा झारखण्ड राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (SCF 2023), के आलोक में कक्षा III से VIII तक की पाठ्यपुस्तकों के विकास हेतु आयोजित फेज - I ओरिएंटेशन कार्यशाला दिनांक 29 एवं 30 जनवरी 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस दो-दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य राज्य लेखक पैनल के सदस्यों को NEP-2020 के मूल सिद्धांतों - जैसे दक्षता-आधारित शिक्षा, बाल-केंद्रित दृष्टिकोण, “Light but Right” दर्शन, अवधारणात्मक समझ, अनुभवात्मक अधिगम तथा स्थानीय (झारखण्ड) संदर्भीकरण से गहराई से परिचित कराना था। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी लेखकों को NCF SE - 2023 एवं SCF - 2023 (झारखण्ड) के अनुरूप पाठ्यपुस्तक निर्माण की सूक्ष्म बारीकियों, अधिगम प्रतिफलों (Learning Outcomes) की मैपिंग, अध्याय संरचना, भाषा-स्तर, समावेशन, मूल्यांकन संकेतकों तथा गुणवत्ता-मानकों पर विस्तृत अभिमुखीकरण प्रदान किया गया।
इस ओरिएंटेशन के माध्यम से आगामी विषय-वार एवं कक्षा-वार कार्यशालाओं के लिए लेखकों की पाठ्यपुस्तक लेखन दक्षताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे राज्य में मानक-सम्मत, समकालीन एवं शिक्षार्थी-अनुकूल पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की दिशा में एक सशक्त आधार तैयार हुआ है। कार्यक्रम का सफल आयोजन सहभागी लेखकों, विषय समन्वयकों, अकादमिक विशेषज्ञों एवं आयोजन टीम के समन्वित प्रयासों से संभव हो सका।