03/01/2024
Jharkhand
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03/01/2024
Jharkhand
08/10/2023
हरियाणा के सोनीपत जिले में गोहाना तहसील के न्यात गांव मे तलाब की खुदाई से प्राचीन गुर्जर प्रतिहार कालीन एक अनुठी पत्थर की एक महिषासुर मर्दिनी( दुर्गा ) की 12 भुजाओं वाली अनूठी प्रतिमा मिली है जिसे वर्तमान मे दादा खेडे के पास स्थापित किया गया है माता महिषासुर मर्दिनी के नामकरण के वारे मे प्राचीन कथा/किंदवती है कि
विजयदशमी के दिन जहां एक ओर भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था, तो वहीं दूसरी ओर मां दुर्गा ने महिषासुर का वध भी इसी दिन किया था। देवी भागवत की कथा के अनुसार नौ दिनों तक मां दुर्गा और महिषासुर का युद्ध होता रहा। दसवें दिन मां दुर्गा ने भगवान शिव प्रदत त्रिशूल से महिषासुर का वध कर दिया था। इसी कारण मां दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं कि महिषासुर को मारने के लिए क्यों लेना पड़ा था मां दुर्गा को अवतार.....
महिषासुर को ब्रह्मा जी का वरदान
पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्यराज महिषासुर के पिता रंभ नाम का एक असुर थे। रंभ को एक भैंस से प्रेम हो गया जो जल में रहती थी। रंभ और भैंस के योग से ही महिषासुर का जन्म हुआ। इसी कारण महिषासुर अपनी इच्छानुसार भैंस और इंसान का रूप बदल सकता था। कहा जाता है कि महिषासुर ने कठोर तपस्या कर सृष्टिकर्ता ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया। ब्रह्मदेव ने वरदान दिया कि उस पर कोई भी देवता और दानव विजय प्राप्त नहीं कर पाएगा।
मां दुर्गा का अवतरण
ब्रह्मदेव से वरदान मिलने के बाद महिषासुर स्वर्ग लोक में उत्पात मचाने लगा। एक दिन महिषासुर ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया। महिषासुर ने इंद्र को परास्त किया और स्वर्ग पर कब्जा कर लिया। उसने सभी देवताओं को वहां से बाहर निकाल दिया। सभी देवगण इससे परेशान होकर त्रिमूर्ति ब्रम्हा, विष्णु और महेश के पास गए और अपनी समस्या बताई। लेकिन ब्रह्मा जी के वरदान के कारण स्वयं ब्रम्हा, विष्णु और महेश भी महिषासुर को हरा नहीं सकते थे। अंततः महिषासुर को मारने के लिए सभी देवताओं नें मां दुर्गा का सृजन किया।
महिषासुर का वध
त्रिदेवों के शरीर से शक्ति पुंज निकल कर एकत्रित हुए। इस शक्ति पुजं ने मां दुर्गा का रूप धारण कर लिया। सभी देवताओं नें मां दुर्गा को अपनी-अपनी शक्ति और अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। मां दुर्गा ने महिषासुर से लगातार नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध कर दिया। यही कारण है कि हिंदू धर्म में नौ दिनों तक दुर्गा पूजा मनाई जाती है। वहीं, दसवें दिन को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। महिषासुर के मर्दन के कारण ही मां दुर्गा का नाम महिषासुद मर्दिनी पड़ा।
ये प्राचीन मूर्ति दादा खेडे के पास स्थित है
और ये गांव सहरावत गौत्र के जाटो ने महिपालपुर दिल्ली से आ कर बसाया था जिस मे वर्तमान मे सभी जाति के लोग मिल जुल कर रहते है इस गांव मे वर्तमान मे 1500 परिवार रहते है
लेखक डाँ विनय कुमार
11/09/2023
कौआ बैठा है की खड़ा है
11/06/2023
ॐ
27/04/2023
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07/02/2023
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ब्रह्मा
23/07/2022
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