झारखंड के धनबाद में जो हुआ, वो किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। सड़क पर इंसानों को बांधकर घुमाना—ये कानून नहीं, ये खुली गुंडागर्दी है।
क्या झारखंड पुलिस अब अदालत बन चुकी है?
किस अधिकार से किसी आरोपी को सज़ा देने का फैसला सड़क पर किया जा रहा है?
अगर यही “न्याय” है, तो फिर संविधान और अदालतों का क्या मतलब बचता है?
हेमंत सोरेन जी, अब चुप्पी नहीं चलेगी
आपको जवाब देना ही होगा: माननीय Hemant Soren जी
क्या यही आपका “सुशासन” है?
जहां कानून की जगह लाठी और अपमान ने ले ली है?
जहां पुलिस वर्दी में इंसाफ नहीं, बल्कि डर दिखा रही है?
याद रखिए—
आज अगर किसी को “आरोपी” बताकर सड़क पर बेइज्जत किया जा सकता है,
तो कल यही सिस्टम किसी भी आम नागरिक के साथ खड़ा हो सकता है।
ये मामला सिर्फ एक समुदाय का नहीं—
ये हर उस भारतीय का है जो संविधान और कानून के राज में विश्वास रखता है।
हम साफ मांग करते हैं:
👉 इस पूरे मामले की निष्पक्ष और न्यायिक जांच हो
👉 जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को तुरंत निलंबित किया जाए
👉 जनता के सामने सच्चाई लाई जाए
👉 कानून का राज बहाल किया जाए
लोकतंत्र में इंसाफ अदालत में होता है, सड़क पर नहीं।
अगर आज भी आवाज़ नहीं उठी, तो कल बोलने का हक भी छिन जाएगा।
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All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen Jharkhand
Aimim- All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen Official Page Jharkhand Asaduddin Owaisi Akbaruddin Owaisi
जैसे कांग्रेस का शिवसेना से गठबंधन, कल्याण सिंह व मुलायम सिंह का गठबंधन, नीतीश कुमार का BJP से गठबंधन, JMM का बीजेपी से गठबंधन, ममता बनर्जी व बीजेपी का गठबंधन आदि आदि संवैधानिक…वैसे ही ओवैसी व हुमायूं कबीर का गठबंधन पूर्णतः संवैधानिक है!
01/03/2026
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
आपकी बहादुरी को हमारी नस्ल ने अपनी आँखों से देखा है, और हमारे बेटे भी इसे याद रखेंगे। हमारे और उनके ज़ेहन में आपका नाम हमेशा ज़िंदा रहेगा। आने वाली नस्लों को वे ज़रूर बताएँगे कि हमने वह दौर देखा था जब ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद आयतुल्लाह अली ख़ामनेई 86 साल के एक बुज़ुर्ग मगर अटल मुजाहिद तन्हा खड़े होकर अमेरिका और इस्राइल के ज़ायोनिस्ट ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डटकर मुकाबला कर रहे थे।
उन्होंने इस्राइल को चुनौती दी, अमेरिका के सामने झुके नहीं, और दुनिया की सुपर पावर कही जाने वाली ताक़त के घमंड को ललकारा।
जब कुछ इस्लामी मुल्कों के हुक्मरान फ़िलस्तीन और ग़ज़ा में मासूमों पर हो रहे ज़ुल्म और क़त्ल-ए-आम को ख़ामोशी से देखते रहे, बे-हिसी की नींद में डूबे रहे — तब भी ख़ामनेई इस उम्र में साबित-क़दम रहे। न थके, न झुके; बल्कि हक़ की आवाज़ बुलंद करते रहे।
यह तारीख़ का वह बाब है जिसे आने वाली नस्लें हैरत और फ़ख़्र के साथ पढ़ेंगी।
अल्लाह मरहूम को मग़फ़िरत अता फ़रमाए और ईरान को इस इम्तिहान में कामयाबी और फ़तह नसीब करे।
झारखंड Aimim- All India Majlis-E-Ittehadul Muslimeen में गुटबाजी चरम पर, वायरल वीडियो विवाद से संगठन में मचा घमासान बिना जांच के जिला अध्यक्ष से इस्तीफे की मांग, कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी
रांची। झारखंड में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के भीतर गुटबाजी और आपसी खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा मामला एक मामूली लेन-देन के विवाद से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर महिला से संबंध का विवाद बताकर मारपीट का रूप देकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
पार्टी से जुड़े लोगों का आरोप है कि पैसे के लेन-देन को लेकर हुए हल्के विवाद को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है। वीडियो वायरल होने के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी और असंतोष बढ़ गया है।
जांच के बजाय बयानबाजी, जिम्मेदारों पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे अधिक विवाद तब बढ़ गया जब कोल्हान प्रमंडल प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर सच्चाई जानने या जांच कराने के बजाय घटना को सही मानते हुए जिला अध्यक्ष से इस्तीफा देने की मांग कर दी। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि प्रमंडल प्रभारी को पहले निष्पक्ष जांच करानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने बिना तथ्यों की पुष्टि किए ही सार्वजनिक बयान जारी कर दिया।
2023 में खुद लाए, अब बदनाम करने का आरोप
पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा है कि जिन जिला अध्यक्ष पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें वर्ष 2023 में कोल्हान प्रमंडल प्रभारी ने ही अपने नेतृत्व में पार्टी में शामिल कराया था। इसके बाद प्रदेश में पद पाने की मंशा से उन्होंने जिला अध्यक्ष पद भी फकरुद्दीन को सौंप दिया।
हालांकि, बाद में जब फकरुद्दीन ने जेबा खान और जेबा कादरी के समर्थन में प्रदेश महासचिव बाबर खान के साथ खड़े होकर जेबा खान का समर्थन किया, तो उनके खिलाफ कथित तौर पर बदनाम करने का अभियान शुरू कर दिया गया।
संगठन सिमटकर रह गया, 50 लोग भी नहीं सक्रिय
पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रदेश नेतृत्व शाकिर के कार्यकाल में झारखंड में मजलिस लगातार कमजोर होती गई। उनका दावा है कि अब पूरे राज्य में मुश्किल से 50 लोग ही पार्टी में सक्रिय बचे हैं और उनमें भी गुटबाजी का माहौल है।
कार्यकर्ताओं के अनुसार, झारखंड में संगठन की जिम्मेदारी अब केवल शाकिर और उनके तीन करीबी लोगों तक सीमित होकर रह गई है।
ओवैसी समर्थक हजारों, पर मंच नहीं मिल पा रहा
पार्टी समर्थकों का कहना है कि झारखंड में आज भी बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी को चाहने वालों की संख्या हजारों में है, लेकिन संगठनात्मक विफलता और आपसी विवाद के कारण समर्थक एकजुट नहीं हो पा रहे हैं।
गंभीर आरोप: विरोधियों से मासिक पैकेज लेने का दावा
पार्टी के कुछ नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शाकिर पार्टी को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर करने में लगे हैं। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह तक दावा किया कि शाकिर और उनकी टीम को विरोधियों से कथित तौर पर मासिक पैकेज मिल रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पद से चिपके रहने पर उठे सवाल
पार्टी के भीतर यह सवाल भी जोर पकड़ रहा है कि लगातार विफलताओं, संगठन की किरकिरी और समर्थकों की नाराजगी के बावजूद शाकिर आखिर किस आधार पर पद पर बने हुए हैं। कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व से जवाबदेही तय करने और संगठन में सुधार की मांग की है।
पक्ष जानने की कोशिश
इस मामले में प्रदेश नेतृत्व और कोल्हान प्रमंडल प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिला।
15/02/2026
हैदराबाद: 68वें दारुस्सलाम डे के मौके पर बिहार के एमएलए'स और महाराष्ट्र में कामयाब होने वाले नौ-मुन्तख़ब कॉर्पोरेटर्स को एज़ाज़ से नवाज़ा गया।
पुलवामा हमले में शहीद हुए तमाम जवानों को ताज़ियत पेश करता हूँ।
15/02/2026
इंसाफ़, तरक़्क़ी और हक़ की लड़ाई में
भारत का हर गरीब, हर मज़लूम AIMIM के साथ मज़बूती से खड़ा है।
हैदराबाद:
68वें दारुस्सलाम डे के ऐतिहासिक और यादगार मौके पर
AIMIM के केंद्रीय दफ़्तर दारुस्सलाम में मुनक़्क़िद अज़ीम-उश-शान जलसे की कुछ खास और यादगार तस्वीरें। जोश, जज़्बा और एकता का शानदार नज़ारा!
Insaaf, taraqqi aur haq ki ladai mein Bharat ka har ghareeb aur mazloom AIMIM ke saath mazbooti se khada hai.
Hyderabad: 68th Darussalam Day ke tareekhi aur yaadgaar mauqe par All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) ke markazi daftar Darussalam mein munaqqid Azeem-ush-Shaan Jalsa ki kuch khaas tasveerein.
14/02/2026
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