All Jharkhand Indian Union, is a state political party of Jharkhand state, India. AJSU was founded June 22, 1986, modelled after All Assam Students Union.
अविभाजित बिहार से अलग होकर झारखंड प्रदेश के गठन के इतिहास के पन्नों को पलटते हैं तो उन पन्नों में आजसू के समझौता- विहीन संघर्षों के अध्याय-दर-अध्याय दर्ज मिलते हैं। दर-असल आजसू का गठन 22 जून 1986 को जमशेदपुर में शोषणमुक्त प्रगतिशील झारखंड राज्य के गठन के लिए सतत् और सघन संघर्ष के उद्देश्य से किया गया था, जिस पर पार्टी अंत तक कायम रही। पार्टी ने तब खुद को चुनावी राजनीति से दूर रखते हुए पृथक झारखंड
के निर्माण की लड़ाई अंततः 15 नवम्बर 2000 को उस वक्त सफलीभूत हुई, जब शहीद बिरसा मुंडा की जंयती पर ‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’ का सपना साकार हुआ। समय के साथ पूरे झारखंड में आजसू के प्रति आम जनता का झुकाव बढ़ता गया और उसकी पहचान जनता के हित में सोचने वाली पार्टी के रुप में होने लगी है। गठन के 26 साल पुरे कर चुकी पार्टी न केवल अपनी यौवनावस्था में पहुँच चुकी है, बल्कि नौजवानों की तरह समाज , प्रांत और देश के पर्ति अपनी जिम्मेदारी भी समझने लगी है। आजसू की बढ़ती लोकप्रियता का यह आलम है कि बड़ी संख्या में लोग अपनी पार्टी त्यागकर आजसू में सम्मिलित हो रहे हैं। सर्वधर्म समभव के सिद्धांत को स्थापित करना, राज्य में बेहतर शैक्षणिक, आर्थिक, सामजिक, सांस्कृतिक अवं राजनैतिक माहौल विकसित करना, क्षेत्रिय झारखंडी भाषाओं को उचित स्थान दिलाना एंव इसको विकसित करना, प्रकृतिक संसाधनों का झारखण्डी हित में बेहतर उपयोग जहाँ आजसू पार्टी की विचारधारा में समाहित हैं, वहीं झारखंड राज्य को समतामूलक, शोषण-मुक्त भ्रष्ट्राचार-मुक्त, प्रगतिशील झारखंड राज्य के रूप में स्थापित करना तथा समाज के सबसे निचले स्तर पर जीवनयापन करने वालों की आवाज बनकर उनके हक और हुकूक की लड़ाई को नेतृत्व प्रदान करना पार्टी के सिद्धांत का महत्वपुर्ण हिस्सा। स्वच्छ, सुदृढ़ तथा जवाबदेह शासन व्यवस्था लागू करना, झारखंड राज्य के साथ ओड़िशा तथा पश्चिम बंगाल के कुछ सिमावर्ती जिलों को मिलाकर वृहत झारखंड राज्य का निर्माण करना आजसू की सकारात्मक राजनीतिक सोंच का परिचायक है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक और सामजिक विकास के सूचकांक की दृष्टि से समाज के हाशिये पर पहूँचे आम आदमी के प्रति आजसू की हितकारी सोच का सबसे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है कि जहाँ अन्य सभी दल धन, जन और बल देखकर अपने उम्मीदवार तय करते हैं, वहीं आजसू पार्टी गरीबी रेखा के निचे रहने वाले (बी. पी. एल.) उम्मीदवारों को तलाश रही है, ताकी आम जन को कम से कम उसके मौलिक अधिकार तो प्राप्त हो सके। आजसू यह सोचती है कि मतदान में गरीबों की भले ही समान हिस्सेदारी हो, लेकिन चुनाव परिणाम के बाद उन्हें भूला दिया जाता है। गरीबों को बराबर का सम्मान दिलाना और उन्हें एकजुट करना आजसू पार्टी का उद्देश्य है। इसमें कतई कोई संदेह नहीं कि पृथक झारखंड का गठन जिस सपने को लेकर किया गया था, वह सपना आज तक हकीकत में नहीं बदल सका है। यह प्रदेश का दुर्भाग्य ही है कि कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी है। राजनीतिक अस्थिरता इस प्रदेश के माथे पर कलंक की तरह है। अपनी-अपनी कुर्सी बचाने और जोड़जोड़ की रजनीति में प्रदेश को अविभाजीत बिहार से अलग होने का उतना लाभ नहीं मिला जितनी उम्मीद की जा रही थी। आजसू पार्टी को इस बत का निश्चित तौर पर गर्व होना चाहिए की सरकार बनाने में हमेसा उसकी अहमियत समझी गई और इसे वर्ष 2000 एंव 2005 तथा एक बार फिर 2009 में सरकार में शामिल करना पड़ा। आंकड़े झूठ नहीं बोलते और झारखंड में विकास की कमोबेस जो धारा बही, उसमें हमारी भूमिका कि अजरंदाज नहीं किया जा सकता । सरकार में शामिल होने के बाद हमारी प्रथमिकता राज्य में विधि-व्यवस्था सूचारू ढ़ंग से चलाने और विकास गति प्रदान करने की रही। वर्ष 2000 में आजसू पार्टी को सरकार में बहुत छोटा दायित्व मिला था, इसे उसने बखूबी निभाया। वर्ष 2005 में उसे पुनः अवसर मिला और इस बार भी इसने विकास के नये-नये आयाम गढ़े। राज्य में विधि व्यवस्था सुधारने के लिए 77 नये थान भवन बनाये गये। थाने में गरीब बिना भय के पहूंच सके, ऐसी व्यवस्था की गयी, लेकिन वातावरण तैयार हो ही रह था कि सरकार चली गयी। सन् 2009 में ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी मिलने पर हमारी पार्टी ने ऐसा काम कर दिखाया जो एक मिसाल के रूप में है। चाहे जलसंसाधन विभाग की जिम्मेदारी हो या वन एंव पर्यावरण विभाग की , पंचायती राज का कार्यभार हो या ग्रामीण विकास अथवा खेल-कूद, कला-संस्कृति एंव युवा प्रभाग या विज्ञान एंव प्रौद्धोगिकी विभाग का उत्तरदायित्व, हमने वह सब कर दिखाया है, जो शायद ही किसी अन्य मंत्रालयों में किसी ने किया हो। इसका एक और ताजा उदाहरण है। इन संस्थाओं में उन्हें योजना तैयार करने, उसे लागू करने एंव शासन के विभिन्न विधाओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
स्वयं सहायता समूहों के माधयम से महिला सशक्तीकरण के लिए संजीवनी परियोजना का क्रियान्वयन हमारी महत्वपुर्ण प्राथमिकताओं में से एक है। महिलाओं के कौशल विकास एंव उन्हें जीवन बीमा की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘संजीवनी योजना’ की शुरूवात करने का निर्णय हमने लिया। इस योजना से जहाँ महिलाओं के आर्थिक रूप से सबल बनाने में मदद मिलेगी वहीं उनमें सुरक्षा की भवना का भी संचार होगा। हमारी कुछ महत्वपुर्ण परियोजनाओं में से एक है – ‘जोहार परियोजना’, जिसका उद्देश्य वैसे परिवारों की क्षमता का विकास कर आय बढ़ाने हेतू तकनीकि एंव वित्तीय सहायता प्राप्त करना, जिनकी आजीविका कृषि, पशुपालक, कृषि श्रम और परम्परागत कौशल पर आधारित हैं। पांच महत्वपुर्ण विभागों- कृषि, प्रथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण, महिला एंव समाज क्ल्याण – के जिला एवं प्रखंड – स्तरीय कर्मियों को पंचायती राज संस्थांओं के प्रशासनिक नियंतण में लाने की कारवाई आजसू का मुख्य मकसद रहा है। पंचायती राज संस्थाएं अपने क्षेत्रधिकार के अंतर्गत अराजपत्रितकर्मियों को स्थानांतरित एंव दंडित भी कर सकेगी तथा राजपत्रित पदाधिकारी के मामले में राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं भेज सकेंगी। हमने ग्राम पंचायतों को एक लाख रूपये तक योजना स्वीकृत्त के अधिकार दिलाए हैं। पंचायत समिति को पाँच लाख तथा जिला परिषद को 25 लाख रुपये तक की योजनाओं पर स्वीकृति के अधिकार दिये गए हैं। हमने दो लाख रूपये तक की योजनाएं बिना निविदा के लाभूक समिति के माध्यम से कराने के अधिकार भी पंचायतों को दिए हैं।