साहित्य/उपन्यास संग्रह

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सॉहित्य, उपन्यांस, ई-बुक्स, कॉमिक्स, स्टोरीज

20/12/2025

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आइए सशक्त, आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और कदम बढ़ाए। 🇮🇳

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27/11/2024

पुस्तक का नाम : Sacred Vedas - Ancient Wisdom of Sanatan Dharma : पवित्र वेद - सनातन धर्म का प्राचीन ज्ञान

PAGE : 192 | PDF Size : 7 MB {SHQ}

"पवित्र वेद - सनातन धर्म का प्राचीन ज्ञान" के साथ हिंदू दर्शन के केंद्र में एक गहन यात्रा शुरू करें। यह ज्ञानवर्धक ईबुक प्राचीन और पवित्र वेदों, सनातन धर्म के मूलभूत ग्रंथों पर प्रकाश डालती है, जो पाठकों को चार वेदों: ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद की व्यापक खोज प्रदान करती है।

मूल वेदों से परे, "पवित्र वेद - सनातन धर्म का प्राचीन ज्ञान" उपवेद और वेदांगों का पता लगाने के लिए आगे बढ़ता है, जो वैदिक शिक्षाओं के पूरक सहायक ज्ञान और विषयों पर प्रकाश डालता है। पता लगाएं कि कैसे ये पवित्र ग्रंथ सनातन धर्म का आधार बनते हैं, जो अनुष्ठानों और समारोहों से लेकर खगोल विज्ञान, ध्वन्यात्मकता और व्याकरण तक जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करते हैं।

चाहे आप एक अनुभवी अभ्यासी हों, जिज्ञासु साधक हों, या विश्व धर्मों के विद्वान हों, यह ई-पुस्तक वेदों में समाहित कालातीत ज्ञान के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करती है। स्पष्टता और श्रद्धा के साथ लिखा गया, यह प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक पाठक के बीच एक सेतु प्रदान करता है, जिससे वेदों की गहन शिक्षाएँ सभी के लिए सुलभ हो जाती हैं।

"पवित्र वेद - सनातन धर्म का प्राचीन ज्ञान" सिर्फ एक किताब नहीं है; यह हिंदू धर्म की आध्यात्मिक विरासत का पता लगाने का निमंत्रण है, जो आपको पवित्र वेदों में निहित शाश्वत सत्य से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है। इस परिवर्तनकारी यात्रा में हमारे साथ जुड़ें और उस कालातीत ज्ञान को उजागर करें जिसने पीढ़ियों को प्रेरित किया है और सनातन धर्म के विशाल महासागर में साधकों के मार्ग को रोशन करना जारी रखा है.... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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26/11/2024

पुस्तक का नाम : Dil Apna Preet Parayi : दिल अपना प्रीत पराई

PAGE : 496 | PDF Size : 5 MB {SHQ}

कुंदन ये इसी जगह से जुड़ी एक कहानी है जो वक्त की रेत में कही खो गयी हैं।

पर भाभी आपने ये कहानी मुझे क्यों बतायी ? कुंदन से सवाल किया।

भाभी : मैंने सोचा तुम्हे पता होनी चाहिए क्योंकि बुराई को अगर कुछ हरा सकता है तो सिर्फ अच्छाई। ज़िन्दगी में कितने ही पल हम गुस्सा करते है हमे कुछ कमजोर लम्हो में लगता है की कुछ कर जाये पर अगर हम तसल्ली से सोचे तो कुछ हल निकल ही आता है।

मैं कभी-कभी मैं सोचता हूँ आप किस मिट्टी की बनी है भाभी! कुंदन विस्मय होते हुए बोला।

भाभी : उस मिटटी की जिसके तुम बने हो, खैर आओ तुम्हे कुछ ऐसा दिखाती हू जो शायद तुम्हारी कल्पना से परे है।

भाभी ने अपना हाथ बावड़ी के पानी की ओर किया और जैसे ही रक्त ने पानी को महसूस किया पानी सूखने लगा और धीरे-धीरे गायब हो गया और नीचे की गीली मिट्टी फटने लगी और उसके बाद जो मैंने देखा आँखों ने होने से मना कर दिया।

मेरे सामने अकूत दौलत थी इतना सोना-चांदी, आभूषण और पता नहीं क्या-क्या था पर वो नजारा कुछ सेकंड ही रहा और फिर सब पहले जैसा हो गया मैं हैरत से कभी बावड़ी को देखता और कभी भाभी को।

कुंदन : कैसे किया आपने?

भाभी ने कहा- मैं मालकिन हूँ इस खजाने की।

कुंदन ने फिर सवाल दागा- कैसे?

भाभी : जैसे तुम हो।

कुंदन का मन रहस्य के भवर मे गोते लगाने लगा। कहाँ कुंदन पूजा को रहस्यमयी कहता था, और भाभी ने जो आज किया था कुंदन का सर चकरा गया था। खैर दोनो ने माता के दर्शन किये पर कुंदन के चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थी।

कुंदन ने भाभी का हाथ पकड़ लिया- कही मुझसे ऐसा कुछ तो नहीं हुआ न कि मुझे उसका अफ़सोस हो!

अभी तक तो नहीं आगे का पता नहीं.... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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21/11/2024

पुस्तक का नाम : Chikhati Haweli : चीखती हवेली

PAGE : 294 | PDF Size : 3 MB {SHQ}

उस अचानक हुई आवाज़ से मैं घबरा सी गई थी और मैं तुरन्त अपनी कुर्सी से उठी और उस अफरा-तफरी में वो कुर्सी जमीन पर गिर गई थी। मैंने अपने आपको को उस मेज का सहारा लेकर उठाया और मैं उन आवाज की दिशाओं में देखने लगी। किचन में तो पूरी तरह से शांति थी और केवल मेरे दिल की धड़कन ही उस समय सुनाई पड़ रही थी जो कि काफी तेज धड़क रहा था।

मैं ये विश्वास दिलाना चाहती थी की मैने वो आवाज़ नही सुनी थी। कि वो उन अजीब घटनाओ की तरह ही थी जो कि सबके साथ कभी न कभी हो जाती है। जैसे कि घन्टी बजने की आवाज़ या फिर ऐसा लगे कि कोई आपका नाम पुकार रहा है मगर असल मे ऐसा ना हो।

मगर मेरे दिल की बढ़ी हुई धड़कन ये मानने को तैयार नही थी कि मैंने कुछ सुना नही था। वो घन्टी अभी बजी थी। और इसलिए केवल एक ही जवाब बचता है और वो ये है कि घर के अंदर कोई मौजूद है।

मैं उस मेज़ से थोड़ा दूर हटकर खड़ी हुई और उस घन्टी पर बराबर नजर बनाए हुए थी की अगर वो फिर से बजती है तो मुझे साफ-साफ पता चल सके। मैं किचन के काउंटर पर पहुंची और मेरे हाथ किसी अंधों की तरह एक चीज़ की तलाश कर रहे थे जो कि मुझे थोड़ी ही देर में मिल चुकी थी... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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21/11/2024

पुस्तक का नाम : Rudraveera : रुद्रवीरा

PAGE : 49 | PDF Size : 1 MB {SHQ}

एक लड़की जंगल में बुरी तरह घायल अवस्था में सर्वम को मिलती है। इलाज होने पर पता चलता है कि उसकी याददाश्त चली गई है... क्या ये सच है?

अचानक सर्वम पर जानलेवा हमला होता है.. क्या ये हमला उस लड़की से जुड़ा है? उस लड़की की क्या है सच्चाई...?

रहस्य और रोमांच से भरपूर पढ़े कहानी रूद्रवीर.... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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21/11/2024

पुस्तक का नाम : Rooh Ka Pichha : रूह का पीछा

PAGE : 62 | PDF Size : 1 MB {SHQ}

सूरज की रोशनी मोहन के चहरे पे पड़ते ही उसकी आंख खुल जाती है। उसके सामने एक पुराना पंखा लटक रहा है। दांये बांये नजर घुमाया तो वह चकित होते हुए उठ बैठा। यह तो उसी का घर है। लेकिन वह घर कैसे आया और प्रिया, वो कहाँ है? वह तुरंत बिस्तर से उठता भागा।

हॉल में आते ही प्रिया काली साड़ी पहने दिख गई उसके बाल खुले हुए थे। माथे पे काली बिंदी लगाई हुई थी और काली चूड़ी पहनी हुई थी। वह अपने ही धुन में झाड़ू लगा रही है। प्रिया को देखते ही मोहन रुक गया और उसे गौर से देखने लगा।

दिबाल पे एक छिपकली है, जिसपे प्रिया की नजर पड़ती है। प्रिया छिपकली को ऐसे देखती है, जैसे उसे खा जाएगी। वह छिपकली के करीब जाती है । छिपकली के आंखों में आंखे मिला कर देखती है। जबकि मोहन को जितना पता है कि प्रिया को छिपकिल और कीड़ो मकोड़े से बहोत डर लगता है। लेकिन आज अचानक प्रिया को हुया क्या है? वह छिपकली के साथ क्या करने बाली थी। वह उसे इतने ध्यान से क्यूँ देख रही थी? इससे पहले प्रिया कुछ छिपकली के साथ करती की माँ बाहर से आ गई... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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21/11/2024

पुस्तक का नाम : Divya Shakti : दिव्य शक्ति

PAGE : 49 | PDF Size : 5 MB {SHQ}

अनन्या मेरी ओर देखते हुए मुझसे कहा- आपको एक बात बताऊँ? आप विश्वास नहीं करेंगे।

मैंने सरलता से कहा- हाँ, कहो।

अनन्या ने कहना आरंभ किया- दो अवसरों पर एक विचित्र बात, मैंने अनुभव की है कि मेरी आँखे, जब आपकी आँखों से मिलती हैं तब, आपकी और मेरी आँखों से मुझे, रेनबो रेज़ निकलती और आँखों में प्रविष्ट होते दिखती हैं। पहली बार जब ऐसा हुआ तब मुझे, यह अपना भ्रम लगा। साथ ही मैंने सोचा कि यदि अगर यह मेरी आंखों का कोई रोग होता तो मुझे अन्य किसी को देखते हुए भी ऐसा लगना चाहिए था। मगर अन्य किसी को देखते हुए मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ।

फिर जब कल मैं आपसे मिली तब दूसरी बार, मेरी और आप की दृष्टि आपस में मिलने के समय मैंने ऐसा अनुभव पुनः किया है। क्या आप विश्वास करते हैं कि ऐसा होना संभव है? और अगर ऐसा हो रहा है तो क्या यह सामान्य बात है?

अनन्या के बताने से मुझे पुष्टि हो गई थी कि हमारे बीच ऐसा होता है।

तब भी अनन्या को उत्तर देते हुए मैं अत्यंत सतर्क रहना चाहता था। मैं नहीं चाहता था कि इसके पीछे दिव्य... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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21/11/2024

पुस्तक का नाम : Siyaah - Aawaje Andhero Ki : सियाह - आवाजें अँधेरोंं की

PAGE : 243 | PDF Size : 9 MB {SHQ}

"अभी नीचे किसी बच्चे की आवाज़ ने मुझसे पानी माँगा था!"

वो सुनकर वेद चौंक पड़ा। उसे भी कुछ देर पहले किसी बच्चे का स्वर सुनाई दिया था। उन्हें होश भी नहीं था कि उनके पीछे क्या हो सकता है! मगर इस समय कोई और उन्हें देखता तो उसकी रूँह काँप उठती।

आसमानी रंग का फ्रॉक पहने एक चार-पाँच वर्ष की बच्ची बारी-बारी से उन तीनो के पीछे प्रगट हो रही थी तो कभी गायब हो रही थी।

"लेकिन ये जो भी है वो..कबीर!!!" आशिता बोलती हुई चीख पड़ी। उसने नज़रें उठाकर कबीर की तरफ देखा था। उसे ऐसा लगा जैसे कबीर के कंधे के पीछे से कोई उसे झाँककर देख रहा हो। कोई बच्ची!

"क्या हुआ!" कबीर बोला और उसकी नज़रे पहचानते हुए जल्दी से अपने पीछे देखा। वहाँ कोई नहीं था।

"म..मुझे लगा तुम्हारे पीछे कोई था!" आशिता डरती हुई बोली।

"था नहीं थी। और मैंने उसे तुम्हारे पीछे देखा था।" वेद बोला जो अजीब सम्मोहित सा लग रहा था... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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21/11/2024

पुस्तक का नाम : Bhootnath Babu Devkinandan Khatri : सम्पूर्ण भूतनाथ सिरीज (7 खंड 21 अध्याय)

PAGE : 1900 | PDF Size : 13 MB {SHQ}

चन्द्रकान्ता सन्तति के एक पात्र को नायक का रूप देकर देवकीनन्दन खत्री जी ने इस उपन्यास की रचना की।

किन्तु असामायिक मृत्यु के कारण वे इस उपन्यास के केवल छः भागों को लिख पाये उसके बाद के शेष पन्द्रह भागों को उनके पुत्र दुर्गाप्रसाद खत्री ने लिख कर पूरा किया।

कितने प्रतीकात्मक लगते हैं ‘चन्द्रकान्ता’ के मठों-मन्दिरों के खँडहर और सुनसान, अँधेरी, खौफनाक रातें, ऊपर से शान्त, सुनसान और उजाड़-निर्जन, मगर सब कुछ भयानक जालसाज हरकतों से भरा... हर पल काले और सफेद की छीना-झपटी, आँख-मिचौनी। खत्राी जी के ये सारे तिलिस्मी चमत्कार, ये आदर्शवादी परम नीतिवान, न्यायप्रिय सत्यनिष्ठावान राजा और राजकुमार, परियों जैसी खूबसूरत और अबला नारियाँ या बिजली की फुर्ती से जमीन-आसमान एक कर डालने वाले ऐयार सब एक खूबसूरत स्वप्न का ही प्रक्षेपण हैं।

‘चन्द्रकान्ता’ को आस्था और विश्वास के युग से तर्क और कार्य-कारण के युग संक्रमण का दिलचस्प उदाहरण भी माना जा सकता है... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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07/11/2024

पुस्तक का नाम : Mai Tera Aashik : मैं तेरा आशिक

PAGE : 124 | PDF Size : 2 MB {SHQ}

वो लड़की अपने अंजाम से बेखबर भागे जा रही थी उसका दिल मानो जोर-जोर से धड़क रहा था, किसी सोच में डूबी थी शायद। वो बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी, यकीनन किसी से भाग रही थी। उस लड़की ने सफेद पारदर्शी पतली सी शरीर के पशीने से भीगी नाइटगाउन पहनी थी, जो कि गले से बिल्कुल खुली हुई थी, और यकीनन उसमें वो काफी सेक्सी लग रही थी। वो तेजी से दौड़ रही थी, चारों तरफ कारें खड़ी हुई थीं।

तभी वो शटर के पास आई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी- "कोई है? कोई है बाहर ? मुझे बचा लोss मेरा दम घुट रहा है, प्लीज... कोई मुझे सुन रहा है?"

उसके चेहरे पर मानो खरोंचें थी और वो किसी जख़्मी के रूप में थी। उसकी आँखों से आँसुओं ने काजल को पूरे चेहरे पर फैला दिया था, मानो वो किसी के जाल में हो। उसके रोने से उसके गाल एकदम पिंक थे, उसके बाल गीले थे जो उसके हिलने से उसके चेहरे पर गिर रहे थे, मानो कि उस पर पानी फेंक दें तो उसका जिश्म पूरा दिखने लगे। वो चिल्ला रही थी, और चिल्लाए जा रही थी। उसका गला बैठ गया। पर बाहर सुनसान सड़क पर उसकी चीख सुनने वाला कोई नहीं था।

वो पीछे हुई और नंगे पाँव लड़खड़ाते हुये वो जमीन पर पीठ के बल गिरी, उसकी आँखें धुंधली होने लगीं, होंठ सुख चुके थे, उसके शरीर पर नीले-नीले निशान पड़ गये थे, और उसकी आँखों में आँसू जम गये थे। वो सबकुछ फिर से याद करने लगी। एक गहरी सोच में डूब गई आँखें धुंधली सी होकर बंद हो गई और दिमाग भी सुन्न पड़ गया... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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27/10/2024

पुस्तक का नाम : Chandrakanta Santati Complete Set : सम्पूर्ण चंद्रकान्ता संताति (6 खंड 24 अध्याय)

PAGE : 1616 | PDF Size : 15 MB {SHQ}

‘चंद्रकांता’ उपन्यास की जबरदस्त सफलता के बाद पाठकों की अत्यंत माँग पर देवकीनंदन खत्री ने “चंद्रकांता संतति” को लिखा था।

“चंद्रकांता संतति” में देवकीनंदन खत्री ने 6 उपन्यास लिखे हुए है और हर उपन्यास में 4 भाग है। हर एक भाग में कई सारे बयान मौजूद है।

“चंद्रकांता संतति” में देवकीनंदन खत्री ने ‘चंद्रकांता’ उपन्यास में शुरू हुई लौकिक प्रेम कहानी को ही आगे बढ़ाया हुआ है।

‘चंद्रकांता संतति’ - भाग १ में चंद्रकांता और वीरेंद्र सिंह की शादी हो जाती है। जिसके बाद चंद्रकांता दो पुत्रों को जन्म देती है। जिसका नाम इंद्रजीतसिंह और आनंदसिंह होता है। जिन्हें कैद करने के लिए शिवदत्त अय्यारी सीखता है और हमेशा अपनी योजना को सफल करने के लिए नए नए पैंतरे अपनाता है और मौके की खोज में लगा रहता है।

वहीँ मायावती की पुत्री माधवी इंद्रजीत सिंह को अपनी जाल में बांधने की चाह रखती है... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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27/10/2024

पुस्तक का नाम : Chandrakanta : चन्द्रकांता (4 in 1)

PAGE : 314 | PDF Size : 4 MB {SHQ}

"चंद्रकांता" एक रोमांटिक कल्पना और शुद्ध लौकिक प्रेम कथा है। ऐसे दो प्रेमियों की कहानी है, जो प्रतिद्वंदी राज्यों से थे। विजयगढ़ में रहने वाली दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ का राजुकमार वीरेंद्र सिंह, जो बहुत बड़ा महारथी था। जिसने अपने जीवन का कोई भी युद्ध नहीं हांरा था। साथ ही वीरेंद्र सिंह सभी जादुई शक्तियों का मालिक था, जिसने 100 साल बाद अपनी अधूरी प्रेम कहानी को पूरा करने और जादुई शक्तियों को गलत हाथों में जाने से बचाने के लिए दुबारा जन्म लिया था।

“चंद्रकांता“ उपन्यास में तिलिस्म और ऐयारी के अनेक चमत्कार पाठक को चमत्कृत करती है। विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ के राजुकमार वीरेंद्र सिंह की प्रेम कहानी के साथ-साथ ऐयार तेजसिंह और ऐयारा चपला सिंह की प्रेम कहानी का भी वर्णन किया हुआ है और इस उपन्यास के खलनायक क्रूरसिंह के द्वारा की गयी सारी क्रूरता और प्रेम इस प्रेम कथा में उत्पन्न की गई हर बाधा का वर्णन है किया गया है... 𝑅𝑒𝑎𝑑 𝑀𝑜𝑟𝑒

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