25/12/2023
विज्ञान हमें कहां से कहां ले आया !
हम तो फिर भी कहेंगे और सब कहते हैं कि विज्ञान बहुत तरक्की कर रहा है पर बीमारी घटने के बजाय बढ़ कैसे रही है ?
हर घर में कोई ना कोई दवाई क्यों खा रहा है? नहीं पता न ?
मैं बताता हूँ, हुआ ये है कि हमारे रसोई की मूलभूत चीजों में बहुत मिलावट, गिरावट और घटियापन आ गया है।
कौन कौन सी हैं वो चीजें ?
1. नमक
2. गुड़
3. तेल
4. घी
5. दूध
6. आटा
7. पानी
8. शक्कर
जी हाँ बस इन चीजों में सुधार कीजिये और 6 महीनो में फर्क देखिये।
1. सब से पहले समुंद्री नमक- आयोडीन नमक को बदल के सेंधा नमक (रॉक सॉल्ट) कर दीजिये, वो भी बड़े टुकड़े लाके घर में ही कूट लें और हाँ नमक केवल रसोई बनाते वक्त ही डालें। टेबल पे रख के भोजन के समय डालने की आदत छोड़ें।
2. गुड़ हमेशा डार्क चॉकलेट कलर का ही लायें।सफ़ेद गुड़ में मिलावट होती है।
3. Refined oil के बदले घानी का फिल्टर तेल ही खायें, वो भी मुंगफली, तिल या सरसों; कोई अन्य नहीं।
4. घी असली वो है जो देसी गाय के दूध से दहीं, दहीं से मख्खन और मख्खन से बनता है। सीधे मलाई निकाल के या विदेशी गाय के दूध से जो बनता है, वो बटर आयल है, घी नहीं।
5. दूध पिओ तो केवल देसी गाय का, नहीं तो पिओगे ही नहीं तो कोई नुकसान नहीं है।
6. आटा हमेशा मोटा पिसवाओ और बिना चोकर निकले प्रयोग में लाओ। मैदा कभी ना खायें।
7. पानी हमेशा मटके का या गुनगुना ही पीओ। ठंडा फ्रिज का पानी कभी नहीं पीना।
8. चीनी सफ़ेद जहर है। उसकी जगह गुड़ ही खायें या शक्कर जो थोड़ी पीली होती है। बड़े टुकडों में मिलती है, उसे प्रयोग करें।
अब आप कहेंगे इतना कुछ कौन करेगा ? टाइम नहीं है, तो टेंसन नहीं लेने का, मस्त से जियो,
कुछ नहीं होता है।
तो दोस्तों, आस-पास के जो लोग गोलियां खा रहे हैं, वो भी ऐसा ही सोचते थे लेकिन
अब वो हॉस्पिटल में डॉक्टर के चक्कर काटने में टाइम निकाल ही रहे हैं।
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थोड़ा सा बदलाव और सेहत बनाओ।
25/08/2023
#माँ_के_भी_सहनशीलता_की_लिमिट_होती_है_यार
े__माँ को माँ वाला प्रेम देना सीख लो दोस्तों
#फिर_देखो माँ कितनी ममता वान है
#पढ़कर रोना मत, परिवर्तन लाना
सुधा जी की आदत थी कि सुबह उन्हें गर्म पानी चाहिए होता था। इसलिए सुबह से दो बार उठकर कमरे के बाहर निकल कर आ कर देख चुकी थी लेकिन अभी तक बहु वृंदा और बेटा पलाश उठे तक नहीं थे। जब तक उन लोगों में से कोई एक उठेगा नहीं तब तक उन्हें गर्म पानी मिलेगा नहीं। बात ये नहीं थी कि सुधा जी गरम पानी कर नहीं सकती थी। बात यह थी कि बहु वृंदा रात को रसोई का काम खत्म कर रसोई में ताला लगा देती थी।
अब जब तक ताला खुलेगा नहीं सुधा जी को गर्म पानी मिलेगा नहीं। आखिरकार घड़ी में जब 9:00 बज गए और सुधा जी से रहा नहीं गया तो उन्होंने हिम्मत करके बेटे के कमरे का दरवाजा खटखटाया। दो-तीन बार दरवाजा खटखटाने के बाद वृंदा की जगह पलाश ने आकर दरवाजा खोला और तमतमाते हुए बोला,
" क्या हैं मां? सुबह-सुबह परेशान कर रही हो?"
" बेटा मुझे गर्म पानी चाहिए था। रसोई में ताला लगा हुआ है तो तुम रसोई का दरवाजा खोल दो। ताकि मैं गर्म पानी कर सकूं"
"एक दिन गर्म पानी के बगैर नहीं रह सकती हो क्या माँ? रोज तो वृंदा करके दे ही देती है ना। आज संडे था इसलिए सोचा था कि थोड़ा आराम से उठेंगे, पर आप भी ना"
कहते-कहते पलाश अंदर कमरे में गया और वृंदा को जगाया। वृंदा भी तिलमिलाते हुए उठी और चाबी लाकर सुधा जी के हाथ में रख दी,
" अब रसोई का दरवाजा आप ही खोल लीजिए। खुद के लिए गर्म पानी करो तो हमारे लिए भी चाय बना देना। जल्दी नींद खुलने से सिर दर्द होने लगा है मेरा। कभी कोई सास खुश हुई है क्या अपनी बहू को सोता देख कर। इन सास लोगों का बस चले तो बस बहू को मशीन बनाकर रख दे"
वृंदा बड़बड़ाती हुई वापस जाकर पलंग पर लेट गई। आखिर सुधा जी ने जाकर रसोई का दरवाजा खोला। खुद के लिए भी पानी गर्म किया और बेटे बहू के लिए चाय बनाकर उन्हें देकर आई। गर्म पानी लेकर अपने कमरे में आई ही थी कि पाँच साल का पोता मनु जाग गया। जगते से ही बोला,
" दादी, मेरा दूध"उसे देख सुधा जी मुस्कुरा कर बोली,
" हां मेरे बच्चे अभी लेकर आई"
गरम पानी वही रखकर पहले मनु के लिए दूध गर्म करने गई। अभी दूध गर्म कर ही रही थी कि इतने में पलाश की आवाज आई,
" मां, ओ मां, कहां हो तुम? क्या आप भी सुबह-सुबह संभाल नहीं सकती इसे। पता है ना वृंदा के सिर में दर्द हो रहा है"
कहते कहते पलाश भी रसोई में आ गया। साथ में मनु भी गोद में था। उसे देखते ही सुधा जी बोली,
" बेटा मैं तो दूध गर्म करने आई थी। मुझे नहीं पता ये कब तुम्हारे कमरे में चला गया"
" तो ध्यान रखना चाहिए था ना आपको। बस काम का बहाना चाहिए। मानता हूं कि आप सास हो, पर बहू को भी तो इंसान समझो। वही है जो आपकी जिम्मेदारी निभा रही है। नहीं तो दूसरे बेटे बहू ने तो आपको रखने से ही मना कर दिया था"
मनु को सुधा जी के पास छोड़कर ही पलाश वापस अपने कमरे में चला गया। सुधा जी देखती ही रह गई। आंखों में आंसू आ गए। मन ही मन सोचने लगी कि मैं कुछ ना करने पर भी बदनाम हो रही हूं। ऐसी कौन सी जिम्मेदारी उठा ली इन लोगों ने मेरी जो इतना सुना जाते हैं। ऐसा सोच कर अपने आंसू पोछे और मनु और उसका दूध लेकर कमरे में आ गई। नाश्ते के समय पलाश ने वृंदा से कहा,
" तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तो मैं माँ से कह कर नाश्ता बनवा लेता हूँ ताकि तुम आराम कर सको"
" रहने दो, उनसे कुछ मत कहना। मैं नाश्ता खुद ही बना लूंगी"
" अरे पर तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है"
" नहीं नहीं, मैं खुद ही नाश्ता बना लूंगी। उनका क्या भरोसा। कौन सा सामान उठाकर अपने दूसरे बेटे बहु को देकर आ जाए। अक्सर रसोई से सामान कम हो जाता है। मुझे तो पूरा यकीन है माँ जी ही सामान की हेराफेरी करती है और अपने उन बेटे बहू को देकर आ जाती है"
और जाकर रसोई में नाश्ता तैयार करने लगी। वृंदा को रसोई में नाश्ता तैयार करते देखकर पलाश गुस्से में आकर सुधा जी से बोला,
" देख लो, ये सब आपके कारण है। उसकी तबीयत खराब है, पर फिर भी नाश्ता तैयार कर रही है। आपकी इन्हीं हरकतों के कारण परेशान हो चुके हैं हम। पता नहीं भगवान भी हमें चैन से कब रहने देगा?"
सुधा जी उसकी बात सुनकर हैरान रह गई। सुनकर अपने कमरे में चुपचाप शांति पूर्वक बैठ गई। आंखों से झर झर आंसू बहे जा रहे थे। क्या इसी दिन के लिए इन बेटों को जन्म दिया था। जब शादी के सात साल बाद मंदिर मंदिर माथा टेकने के बाद दो जुड़वा बेटे हुए, तो कितने खुश हुए थे घर में सब लोग।
यार, दोस्त, रिश्तेदार, सब लोगों ने कितनी बधाईयां दी थी। सासू मां तो बलैया लिए जा रही थी,
" अरे! दो-दो बेटों की मां बनी है। बुढ़ापे में बैठकर राज करेगी राज"
कुछ साल बाद जब पति का देहांत हो गया, तब भी सुधा जी ने हिम्मत करके अपनी दोनों बेटे पलाश और सुहास को संभाला। कितनी परेशानी झेलकर भी इन लोगों को पढ़ाया लिखाया, इतना बड़ा किया। दोनों की शादी कराई, पर उसके बाद सब कुछ बदल गया। दोनों बहुओं की आपस में बनी नहीं। इस कारण बेटों में भी झगड़े होने लगे। आखिरकार दोनों बेटे अलग हो गए। सुधा जी के पति ने दो मंजिला मकान बनवाया था। उसी में ऊपरी मंजिल पर सुहास अपने पत्नी के साथ रहने लगा और नीचे वाले फ्लोर पर पलाश अपनी पत्नी और सुधा जी के साथ रहने लगा।
सुधा जी को रखने को लेकर भी दोनों भाइयों में बहस हुई थी।
"बचपन में जब दोनो भाई माँ के लिए लड़ते थे तो कहते थे माँ मेरी है माँ मेरी है। जब से दोनों की शादी हुई है माँ के लिए अब भी लड़ते हैं। एक दूसरे से कहते हैं की माँ तेरी है, माँ तेरी है।”
सुहास ने साफ मना कर दिया कि वो मां को अपने पास नहीं रखेगा। तो पलाश को अपने पास सुधा जी को रखना पड़ा। सच कहे तो उस समय की बधाईयाँ आज कानों में चुभ रही थी।
थोड़ी देर बाद पलाश कमरे में आया और पोहे की प्लेट सुधा जी के सामने टेबल पर रखते हुए या यूँ कहे पटकते हुए बोला,
" लो, नाश्ता कर लो आखिर एक बहू को ही परेशान करते जाओ। दूसरी से कोई लेना-देना ही नहीं"
सुधा जी को पलाश की बात बहुत बुरी लग रही थी। उन्हे ऐसा लग रहा था जैसे पोहे की प्लेट उन्हें चिढ़ा रही है। ऐसा खाना भी किस काम का जो तिरस्कार करके दिया जाए। आखिर सुधा जी ने उस नाश्ते की प्लेट को हाथ भी नहीं लगाया। आखिरकार सुधा जी ने काफी सोचा। और सोच समझकर वो एक निर्णय पर पहुंची।
शाम को सुहास अपनी पत्नी के साथ बाहर कहीं घूमने जा रहा था। पलाश और वृंदा भी बाहर खड़े हुए थे कि तभी एक प्रॉपर्टी ब्रोकर उनके घर पर आया। उसे देखकर चारों बेटे बहू हैरान रह गए। उसने आते ही पूछा,
" क्या मैं सुधा जी से मिल सकता हूं"
" आपको सुधा जी से क्या काम है? हमें बताइए, हम उनके बेटे हैं" पलाश ने कहा
" जी मुझे सुधा जी ने फोन करके बुलाया है"
सब एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे। इतने में सुधा जी अंदर से आई,
" क्या आप ही सुधा जी है"
" जी मैं ही सुधा हूं। आप.."
" जी आपने सुबह फोन किया था मकान को बेचने की बात करने के लिए "
" अरे हां, मैंने ही आपको फोन किया था"
इससे पहले सुधा जी आगे कुछ कहती, पलाश बोला,
" कौन सा मकान बेच रही हो आप? हमसे पूछे बगैर आप ये निर्णय कैसे ले सकती हो?"
" माँ मकान बेच दोगी तो हम कहां जाएंगे" सुहास ने भी कहा।
" कभी मेरे बारे में सोचा था कि मैं कहां रहूंगी? कैसे रहूंगी? सुनाने में तुम लोग तो मुझे कोई कसर नहीं छोड़ते हो। मकान तो मेरे पति का बनाया हुआ है। मेरे नाम पर है। फिर किस हक से मकान में हिस्सा मांग रहे हो"
" पर माँ जी, समस्या क्या है? मकान को बेच दोगी तो आप उन पैसों का करोगी क्या?" वृंदा ने कहा
" सोच रही हूं कि वापस गांव चली जाऊँ। जहां से जिंदगी की शुरुआत हुई थी, वही जाकर अपनी जिंदगी के अंतिम दिन देखूँ। इसलिए मैं मकान बेचकर गांव में ही जमीन खरीद रही हूं। और वही रहूंगी"
" फिर हम लोगों का क्या" छोटी बहू ने कहा
" मुझे नहीं पता, तुम लोगों के तो हाथ पैर चलते हैं। और उससे भी तेज जबान चलती है। अपने आप कमाओ और अपनी प्रॉपर्टी बनाओ। बाकी मुझे नहीं पता"
" माँ तुम इतनी स्वार्थी कैसे हो सकती हो?" पलाश और सुहास एक साथ बोले।
" मां को महानता का चोला मत पहनाओ। जैसे बेटे स्वार्थी हो सकते हैं, वैसे ही मां भी स्वार्थी हो सकती है। और तुम जैसे बेटे हो तो माँ ऐसी ही होनी चाहिए। मैं यह मकान बेच रही हूं और यह मेरा अंतिम निर्णय है। तुम लोग अपना बंदोबस्त देख लो"
कह कर सुधा जी उस ब्रोकर को मकान दिखाने चल दी।
एक महीने बाद वो मकान बिक गया और उनके दोनों बेटे शहर में किराए के मकान में रहने लगे और सुधा जी गांव में एक मकान लेकर वहीं रहने लगी।साथ ही अपनी देखभाल और घर के कामकाज के लिए एक गरीब महिला को रख लिया. अब वह फ्री टाइम वहाँ बच्चों को पढ़ाती थी और गांव के शांत वातावरण में अपनी शकुन की जिंदगी जीती थी।
दोस्तो, आपमें से कुछ पाठक सुधा जी को स्वार्थी भी कहेंगे, लेकिन ऐसे नालायक बेटों को सबक भी सिखाना जरूरी था....
प्रमोद त्यागी, आगरा
17/06/2023
बॉलीवुड के एक्टर अजय देवगन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार, रितिक रोशन, अमिताभ बच्चन, रणवीर सिंह ने जहां ₹5 के गुटके के लिए अपना आत्मसम्मान बेच दिया हो
वहीं हिंदुस्तान के सबसे बड़े सुपरस्टार रॉकी भाई (केजीएफ) ने नितेश कुमार के निर्देशन में बनने वाली फिल्म रामायण में रावण का रोल इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उन्होंने उस फिल्म में प्रभु श्री राम का रोल रणबीर कपूर और माता सीता का रोल आलिया भट्ट कर रही है !
यश ने यह रोल ही यह बोलकर ठुकराया है कि रणबीर कपूर और आलिया भट्ट गौ मांस खाते हैं !
जो कि हमारे धर्म में नहीं है। यह थप्पड़ उन बॉलीवुड वालों के लिए है जो पैसे कमाने के लिए एक फिल्म के सीन में अपनी मां का बलात्कार भी कर सकते हैं।
ग्रैंड सैल्यूट रॉकी भाई 🙏❣️🙂
25/07/2022
वेशभूषा और पहनावे से कोई फर्क नहीं पड़ता.?
महिला दिवस के नाम पर मोहल्ले में महिला सभा का आयोजन किया गया सभा स्थल पर महिलाओं की संख्या अधिक और पुरुषों की कम थी मंच पर तकरीबन पच्चीस वर्षीय खुबसूरत युवती आधुनिक वस्त्रों से सुसज्जित माइक थामें कोस रही थी पुरुष समाज को
वही पुराना आलाप कम और छोटे कपड़ों को जायज और कुछ भी पहनने की स्वतंत्रता का बचाव करते हुए पुरुषों की गन्दी सोच और खोटी नीयत का दोष बतला रही थी तभी अचानक सभा स्थल से तीस बत्तीस वर्षीय सभ्य, शालीन और आकर्षक से दिखते नवयुवक ने खड़े होकर अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति मांगी अनुमति स्वीकार कर माइक उसके हाथों मे सौप दिया गया हाथों में माइक आते ही उसने बोलना शुरु किया माताओं बहनों और भाइयों मैं आप सबको नही जानता और आप सभी मुझे नहीं जानते कि आखिर मैं कैसा इंसान हूं लेकिन पहनावे और शक्ल सूरत से मैं आपको कैसा लगता हूँ बदमाश या शरीफ सभास्थल से कई आवाजें गूंज उठीं पहनावे और बातचीत से तो आप शरीफ लग रहे हो शरीफ लग रहे हो शरीफ लग रहे हो बस यहि सुनकर अचानक ही उसने अजीबोगरीब हरकत कर डाली सिर्फ हाफ पैंट टाइप की अपनी अंडरवियर छोड़ कर के बांकि सारे कपड़े मंच पर ही उतार दिये ये देख कर पूरा सभा स्थल आक्रोश से गूंज उठा मारो मारो गुंडा है बदमाश है, बेशर्म है, शर्म नाम की चीज नहीं है इसमें मां बहन का लिहाज नहीं है इसको नीच इंसान है ये छोड़ना मत इसको ये आक्रोशित शोर सुनकर अचानक वो माइक पर गरज उठा रुको पहले मेरी बात सुन लो फिर मार भी लेना चाहे तो जिंदा जला भी देना मुझको अभी तो ये बहन जी कम कपड़े तंग और बदन नुमाया छोटे छोटे कपड़ों की पक्ष के साथ साथ स्वतंत्रता की दुहाई देकर गुहार लगाकर नीयत और सोच में खोट बतला रही थी
तब तो आप सभी तालियां बजा-बजाकर सहमति जतला रहे थे फिर मैंने क्या किया है
सिर्फ कपड़ों की स्वतंत्रता ही तो दिखलायी है नीयत और सोच की खोट तो नहीं ना और फिर मैने तो, आप लोगों को मा बहन और भाई भी कहकर ही संबोधित किया था फिर मेरे अर्द्ध नग्न होते ही आप में से किसी को भी मुझमें भाई और बेटा क्यों नहीं नजर आया मेरी नीयत में आप लोगों को खोट कैसे नजर आ गया मुझमें आपको सिर्फ मर्द ही क्यों नजर आया भाई, बेटा, दोस्त क्यों नहीं नजर आया
आप में से तो किसी की सोच और नीयत भी खोटी नहीं थी फिर ऐसा क्यों सच तो यही है कि झूठ बोलते हैं लोग कि वेशभूषा और पहनावे से कोई फर्क नहीं पड़ता हकीकत तो यही है कि मानवीय स्वभाव है कि किसी को सरेआम बिना आवरण के देख लें तो घिन्न-सी जागती है मन में
अब बताइए हम भारतीय हिन्दु महिलाओं को हिन्दु संस्कार में रहने को समझाएं तो स्त्रियों की कौन-सी स्वतंत्रता छीन रहे हैं
सम्भालीए अपने आप ओर समाज को क्योंकि भारतीय समाज और संस्कृति का आधार नारीशक्ति है और धर्म विरोधी, अधर्मी, चांडाल बॉलीवुड, वामपंथी, ये हमारे समाज के आधार को तोड़ने का षड्यंत्र कर रहे हैं रिपोस्ट
जय श्री राम 🙏🙏🚩🚩
14/10/2020
पतंजलि योगपीठ शाखा चाकघाट में आप सभी का स्वागत है
निशुल्क ज्वाइन करें योग कक्षा ।
91792 46093
21/09/2016
** अब भी जिसका खून न खौले
खून नही है पानी है
** भारत माँ के काम न आए
वो बेकार जवानी है ।।।।।
08/05/2016
व्हिसिल ब्लोअर एक्ट म . प्र मे लागू होता तो ये न हो पाता.....