Arun Mishra rewa

Call Directions Website

Arun Mishra rewa अरुण मिश्रा कांग्रेस शहर अध्यक्ष आईटी सेल एंड सोशल मीडिया रीवा ( मध्य प्रदेश)

कांग्रेस के स्थापना दिवस पर जानें वाकई कांग्रेस क्या है और उसने क्या किया 28 दिसंबर 1885 को कांग्रेस पार्टी की स्थापना ऐ...
29/12/2025

कांग्रेस के स्थापना दिवस पर जानें वाकई कांग्रेस क्या है और उसने क्या किया

28 दिसंबर 1885 को कांग्रेस पार्टी की स्थापना ऐसे समय में की गई जब चारों तरफ निराशा का माहौल था।

महात्मा गांधी जनवरी 1915 में जब भारत आए तब 1857 का महान विद्रोह को कुचला जा चुका था। किसान आंदोलन, क्रांतिकारी आंदोलन, आदिवासी विद्रोह को भी अंग्रेजों ने कुचल दिया था। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के नेतृत्व में शुरू हुए बंग भंग के महान आंदोलन से पैदा हुई स्वराज्य प्राप्ति की ज्वाला मध्धम पढ़ चुकी थी।

महात्मा गांधी ने भारत की जनता को पहला संदेश दिया: डरो मत। गांधी जी ने भारत की जनता के बिखराव को समाप्त किया। उन्होंने उत्तर दक्षिण, हिंदू-मुस्लिम, अगड़े -पिछड़े -दलित, स्त्री-पुरुष सब का भेद खत्म कर भारतीय राष्ट्र की आत्मा को जगाया। महात्मा गांधी ने पहली बार भारत की जनता को ब्रिटिश गुलामी के वास्तविक षड्यंत्र से अवगत कराया और वह रास्ता दिखाया जिस पर चलकर आजादी प्राप्त की जा सकती थी।

महात्मा गांधी के नेतृत्व में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बताया की 1.25 लाख अंग्रेज 30 करोड़ भारतवासियों पर इसलिए राज करते हैं क्योंकि वह भारत की जनता का सहयोग हासिल कर चुके हैं, अगर भारत के 30 करोड लोग 1.25 लाख अंग्रेजों का सहयोग बंद कर दें तो अंग्रेज भारत पर 1 दिन भी शासन नहीं कर सकते।

अंग्रेजी शिक्षा, अंग्रेजी नौकरियां, अंग्रेजी अदालत, अंग्रेजी कपड़े और अंग्रेज सरकार को दिए जा रहे टैक्स को अगर भारत की जनता बंद कर दे तो आजादी दूर नहीं है।अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में हुए असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी ने भारत की जनता को इसी काम के लिए प्रेरित किया।

कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि आजादी का मतलब सत्ता परिवर्तन मात्र नहीं है भारत के हर व्यक्ति की मानसिक, आर्थिक और सामाजिक आजादी का मतलब ही संपूर्ण आजादी है।

आजादी मिलने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस महान राष्ट्र में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत की। हर धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के लोगों को भारतीयता की भावना से ओतप्रोत किया।
पंडित नेहरू ने बांध बनाकर कृषि, जमीदारी खत्म करके किसान, संविधान में आरक्षण का प्रावधान करके वंचित वर्ग, विश्व स्तरीय शिक्षा संस्थान बनाकर युवा और स्वायत्त संस्थान बनाकर लोकतंत्र की जड़ें मजबूत की।

कांग्रेस पार्टी की सरकारों ने देश की सरहद को मजबूत करने के लिए देश में आयुध कारखानों का निर्माण किया, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को नया स्वरूप दिया, लोकतांत्रिक मजबूती के लिए स्वतंत्र निर्वाचन आयोग बनाया गया, न्याय में छोटे और बड़े का भेद खत्म करने के लिए न्यायपालिका को पूरी तरह से सरकार से अलग रखा।

श्री लाल बहादुर शास्त्री और श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकारों ने हमारे दुश्मन देशों को सरहद पर सबक सिखाया। श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने जो अदम्य साहस दिखाया उससे बांग्लादेश के रूप में एक नए देश का उदय हुआ। भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बना।

श्री राजीव गांधी ने पंचायती राज और कंप्यूटर क्रांति के जरिए एक साथ ही गांव और शहर के लिए 21वीं सदी के दरवाजे खोले। श्री राजीव गांधी की सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ सख्त कानून बनाया गया।

श्री नरसिंह राव और श्री मनमोहन सिंह की कांग्रेसी सरकारों ने देश में उदारीकरण शुरू कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए। सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, वन अधिकार कानून, महात्मा गांधी नरेगा, किसानों की कर्ज माफी जैसी पहल कर कांग्रेस पार्टी ने भारत की आम जनता को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से और ज्यादा सक्षम बनाया।

ए ओ ह्यूम एक ऐसा नाम जिसे आरएसएस ने यह कहकर प्रचारित किया कि अंग्रेज ने कांग्रेस की स्थापना की थी वह पार्टी कैसे देशहित ...
29/12/2025

ए ओ ह्यूम एक ऐसा नाम जिसे आरएसएस ने यह कहकर प्रचारित किया कि अंग्रेज ने कांग्रेस की स्थापना की थी वह पार्टी कैसे देशहित में सोच सकती है उन्हें आज एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम की जीवनी से हम परिचय कराते हैं पढ़ने के बाद आप कह उठेंगे की वो वास्तव में महान इंसान थे।

ह्यूम प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिक सुधारक थे।तथा एक माहिर पक्षी विज्ञानी भी थे उनके इस अनूठे योगदान की वजह से उन्हें "भारतीय पक्षी विज्ञान का पितामह" कहा जाता है।

ह्यूम का जन्म 1829 को इंग्लैण्ड में हुआ था प्रकाण्ड बुद्धिजीवी ह्यूम महज 20 वर्ष की आयु में सन 1849 में अधिकारी बनकर सर्वप्रथम उत्तरप्रदेश के जनपद इटावा में आए, जब भारत में सर्वप्रथम आजादी की बिगुल बजी तब वे अंग्रेजी हुकूमत में इटावा के कलेक्टर थे,उनके अंदर 8 वर्षों के भीतर ही भारतीयों से अथाह प्रेम हो गया था,उन्होंने 1856 में ही लोगों के स्वास्थ्य को मद्देनजर रखते हुए मुख्यालय पर ही एक सरकारी अस्पताल का निर्माण कराया तथा स्थानीय लोगों की मदद से और स्वयं के सहयोग से स्कूल का निर्माण कराया जिसमें 5683 बालक और बालिका अध्ययनरत रहे खास बात यह है कि तब शिक्षा जो न के बराबर थी और आरंभ में मात्र दो बालिका ही अध्ययन के लिए सामने आई थी।
उन्होंने ह्यूमनगंज नाम से बाजार खुलवाया जो आज बड़ा व्यापारिक केंद्र बन गया है।
इन सब कार्यों की जानकारी ब्रिटिश तक पहुंच गई और गोरों ने सैनिकों को ह्यूम और उनके परिवार को जान से मारने का गुप्त आदेश दे दिया जिसकी भनक ह्यूम को लग गयी और वो महिला के भेष में इटावा से निकलकर बढ़पुरा पहुंच गए और 7 दिनों तक बढ़पुरा में ही छिपे रहे।
इस तरह उनके जीवन के 27 वर्ष भटकते हुए और गोरों की उपेक्षा में बीते थे।
तदुपरांत 1884 के अंतिम भाग में महात्मा गांधी,सुरेंद्र नाथ बनर्जी, और व्योमेश चन्द्र बनर्जी के साथ मिलकर इंडियन नेशनल यूनियन का संगठन किया।

ह्यूम भारतवासियों के सच्चे मित्र थे 27 दिसम्बर 1885 को भारत के भिन्न-भिन्न भागों से भारतीय नेता बंबई पहुंचे और 28 दिसंबर को सम्मेलन हुआ और उसे इंडियन नेशनल कांग्रेस का नाम दिया गया।

ह्यूम ने कांग्रेस के सिद्धांतों का प्रचार अपने लेखों,व्याख्यानों द्वारा किया जिसका प्रभाव इंग्लैंड की जनता पर संतोषजनक पड़ा,जिस कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें वायसराय लार्ड डरफिन के शासनकाल में ही भारत छोड़ने का आदेश दे दिया।

ह्यूम के परम मित्रों में गांधी जी दादाभाई नौरोजी,सर सुरेंद्र नाथ बनर्जी,सर फिरोज शाह मेहता,श्री गोपाल कृष्ण गोखले,श्री व्योमेश चन्द्र बनर्जी,श्री बाल गंगाधर तिलक आदि थे।

कांग्रेस का गठन होने के बाद ह्यूम ने गोरों को बताया कि भारतवासी इस योग्य हो गए हैं कि वे स्वयं अपना प्रबंधन कर सकते हैं और उन्हें सरकारी नौकरी में अब समानता देनी चाहिए जब तक ऐसा नहीं होगा वे चैन से नहीं बैठेंगे।

इंग्लैंड की सरकार को इस सुझाव को अंततः स्वीकार करना पड़ा और भारतीयों को सरकारी पदों पर नियुक्ति मिलने लगी ह्यूम खुद को भारतीय समझते थे उन्हें भारतीय भोजन अतिप्रिय था,वे गीता पाठ किया करते थे।

वे कहते थे भारत में एकता और संगठन की बड़ी आवश्यकता है जिस समय भारतवासी इन दोनों गुणों को अपना लेंगे उसी समय अंग्रेज भारत छोड़कर चले जायेंगे,वे गांधी बाल गंगाधर तिलक, नेहरू को सच्चा देशभक्त मानते थे।

किन्तु भारतीय न तब उनकी बातें समझे थे और न आज समझे हैं तभी तो भारत को आजादी मिलने में कई दशक लगे और आज फिर से गुलाम बन चुके हैं उसी विचारधारा के जो अंग्रेजों ने हिंदुस्तानियों पर थोपा था,फूट डालो शासन करो।

28दिसंबर 1885

29/12/2025

Address

Rewa
486341

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Arun Mishra rewa posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share