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कोच्चि में आयोजित 16वें राष्ट्रीय कॉर्निया एवं आई बैंकिंग सम्मेलन में ऋषिकेश आई बैंक टीम ने हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धिया...
09/09/2026

कोच्चि में आयोजित 16वें राष्ट्रीय कॉर्निया एवं आई बैंकिंग सम्मेलन में ऋषिकेश आई बैंक टीम ने हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

कोच्चि, केरल: आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया (EBAI) द्वारा IMA House, कोच्चि, केरल में आयोजित 16वें राष्ट्रीय कॉर्निया एवं आई बैंकिंग सम्मेलन में ऋषिकेश आई बैंक, एम्स ऋषिकेश की टीम ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। देशभर एवं विदेशों से आए नेत्र रोग विशेषज्ञों, आई बैंक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इस सम्मेलन को ज्ञान, अनुभव और नवीन तकनीकों के आदान-प्रदान का एक उत्कृष्ट एवं प्रेरणादायक मंच बनाया।

सम्मेलन के दौरान डॉ. नीति गुप्ता, मेडिकल डायरेक्टर, ऋषिकेश आई बैंक, एम्स ऋषिकेश ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया तथा एक उत्कृष्ट अकादमिक सत्र लिया, जिसे प्रतिभागियों द्वारा सराहा गया।

श्री महिपाल चौहान, आई बैंक मैनेजर, ने देशभर से आए आई बैंक मैनेजरों एवं नेत्र रोग विशेषज्ञों के साथ फ्री रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन में भाग लिया। उनके शोध पत्र को रनर-अप एवं बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि ऋषिकेश आई बैंक के लिए गौरव का विषय है।

इसी क्रम में श्री आलोक सिंह, आई बैंक काउंसलर-कम-टेक्नीशियन ने सम्मेलन के दौरान आयोजित EBAI सर्टिफिकेट कोर्स परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। यह परीक्षा देशभर के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित एवं मूल्यांकित की गई थी। श्री पवन सिंह, आई बैंक काउंसलर-कम-टेक्नीशियन ने भी सम्मेलन में सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।

ऋषिकेश आई बैंक टीम की इन उपलब्धियों ने एम्स ऋषिकेश एवं ऋषिकेश आई बैंक का गौरव बढ़ाया। सम्मेलन टीम के लिए अत्यंत सफल, ज्ञानवर्धक, उत्साहवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा तथा इससे आई बैंकिंग सेवाओं, शोध और व्यावसायिक दक्षता को और बेहतर बनाने के लिए नई ऊर्जा मिली।

👁️ नेत्रदान जागरूकता हेतु नुक्कड़ नाटक का आयोजन41वें राष्ट्रीय नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े के अवसर पर AIIMS ऋषिकेश के नेत्...
02/09/2026

👁️ नेत्रदान जागरूकता हेतु नुक्कड़ नाटक का आयोजन

41वें राष्ट्रीय नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े के अवसर पर AIIMS ऋषिकेश के नेत्र विज्ञान विभाग के OPD क्षेत्र के सामने कॉलेज ऑफ नर्सिंग, AIIMS ऋषिकेश के नर्सिंग विद्यार्थियों द्वारा नेत्रदान जागरूकता पर आधारित एक प्रभावशाली रोल प्ले/नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया।

रोल प्ले के माध्यम से विद्यार्थियों ने आमजन को नेत्रदान के महत्व, नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में दृष्टि का उजाला लाने का संदेश दिया।

इस अवसर पर डॉ. नीती गुप्ता, एडिशनल प्रोफेसर, नेत्र विज्ञान विभाग, डॉ. स्मृति अरोड़ा, प्रिंसिपल, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, श्री विश्वास, असिस्टेंट प्रोफेसर, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, डॉ. सारस्वत शेखर, असिस्टेंट प्रोफेसर, नेत्र विज्ञान विभाग, श्री महिपाल चौहान, आई बैंक मैनेजर, तथा श्रीमती बिंदिया एवं श्री संदीप, नेत्रदान काउंसलर-कम-टेक्नीशियन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. नीती गुप्ता एवं महिपाल चौहान द्वारा नेत्रदान के संबंध में जागरूकता वार्ता भी दी गई। उन्होंने नेत्रदान की प्रक्रिया, इसकी उपयोगिता तथा समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा—

“नेत्रदान महादान है—आपकी मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया रोशन हो सकती है।”

इस जागरूकता अभियान में नर्सिंग विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने समाज को नेत्रदान के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

*नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एम्स ऋषिकेश के नेत्र विज्ञान विभाग ने आयोजित की साइक्लोथॉन रैली* ऋषिकेश, 30 अग...
30/08/2026

*नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एम्स ऋषिकेश के नेत्र विज्ञान विभाग ने आयोजित की साइक्लोथॉन रैली*

ऋषिकेश, 30 अगस्त 2026:
नेत्रदान जागरूकता पखवाड़े के अंतर्गत एम्स ऋषिकेश के नेत्र विज्ञान विभाग एवं ऋषिकेश आई बैंक द्वारा रविवार को नेत्रदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से साइक्लोथॉन रैली का आयोजन किया गया। रैली का उद्देश्य समाज में नेत्रदान के महत्व का संदेश पहुंचाना तथा कॉर्नियल अंधत्व से जूझ रहे दृष्टिबाधित लोगों के लिए नेत्रदान को प्रोत्साहित करना था।

साइक्लोथॉन रैली को प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स ऋषिकेश ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर डॉ. सत्यश्री बालीजा, चिकित्सा अधीक्षक, एम्स ऋषिकेश, प्रो. संजीव मित्तल, विभागाध्यक्ष, नेत्र विज्ञान विभाग, डॉ. नीति गुप्ता, निदेशक, ऋषिकेश आई बैंक, सहित संस्थान के अन्य वरिष्ठ संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

रैली में 75 से अधिक साइकिल सवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने साइकिल रैली के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया कि मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में दृष्टि का अनमोल उपहार दिया जा सकता है।

इस अवसर पर ऋषिकेश आई बैंक टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई जिसमें महिपाल चौहान, बिन्दिया भाटिया, संदीप गुसाईं, आलोक सिंह एवं पवन सिंह ने भी रैली के आयोजन एवं जागरूकता अभियान में महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई।

जागरूकता रैली में एम्स ऋषिकेश के संकाय सदस्यों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ, सुरक्षा अधिकारियों, तथा अन्य कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर नेत्रदान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में अपना योगदान दिया।

ऋषिकेश के विभिन्न साइक्लिंग क्लबों, विशेष रूप से रेड राइडर्स और ब्लू राइडर्स, के सदस्यों ने भी रैली में सक्रिय सहभागिता की। इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता श्री गोपाल नारंग, लॉयंस क्लब ऋषिकेश ने भी रैली में भाग लेकर नेत्रदान जागरूकता अभियान को अपना समर्थन दिया।

रैली की विशेष बात यह रही कि इसमें आठ वर्ष की आयु के बच्चों से लेकर वरिष्ठ प्रतिभागियों तक ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

रैली का समापन इस प्रेरणादायी संदेश के साथ हुआ—
“नेत्रदान करें, किसी के जीवन में रोशनी भरें।”

26/08/2026

नेत्रदान - महादान

“दृष्टि जीवन के बाद भी—मानवता के लिए सबसे अनमोल विरासत”41वाँ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हमें यह संदेश देता है कि नेत्रदा...
25/08/2026

“दृष्टि जीवन के बाद भी—मानवता के लिए सबसे अनमोल विरासत”

41वाँ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हमें यह संदेश देता है कि नेत्रदान केवल एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में दृष्टि और नई आशा प्रदान करने का महान संकल्प है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला लाया जा सकता है।

आइए, इस पखवाड़े के दौरान हम अस्पतालों, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों, जनप्रतिनिधियों तथा आमजन को नेत्रदान के प्रति जागरूक करें और इस अभियान को केवल पखवाड़े तक सीमित न रखते हुए वर्षभर निरंतर जन-जागरूकता एवं नेत्रदान गतिविधियों के रूप में आगे बढ़ाएँ।

हम सभी मिलकर अस्पताल आधारित कॉर्निया रिट्रीवल कार्यक्रम, परिवार परामर्श, स्वैच्छिक नेत्रदान तथा जन-जागरूकता के माध्यम से कॉर्नियल अंधत्व को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

आइए, संकल्प लें—
“मृत्यु के बाद भी किसी की आँखों में रोशनी बनकर जीवित रहें।”

नेत्रदान करें—दृष्टिदान करें।
अंधत्व मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

एक साथ, एक संकल्प—कॉर्नियल अंधत्व का उन्मूलन।

सादर,
ऋषिकेश आई बैंक,
नेत्र रोग विभाग, एम्स ऋषिकेश
41वाँ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा
25 अगस्त – 8 सितंबर 2026

 # विश्व नेत्रदान दिवस – 10 जून 2026नेत्रदान मानवता की सबसे महान सेवाओं में से एक है। यह मृत्यु के पश्चात भी किसी व्यक्त...
10/06/2026

# विश्व नेत्रदान दिवस – 10 जून 2026

नेत्रदान मानवता की सबसे महान सेवाओं में से एक है। यह मृत्यु के पश्चात भी किसी व्यक्ति को दृष्टि का अमूल्य उपहार देकर उसके जीवन में प्रकाश ला सकता है। विश्व नेत्रदान दिवस का उद्देश्य समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अधिक से अधिक लोगों को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करना है।

ऋषिकेश आई बैंक, एम्स ऋषिकेश, उत्तराखण्ड द्वारा अब तक 1,276 कॉर्निया संग्रहित किए गए हैं तथा 937 सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि उन सभी नेत्रदाताओं एवं उनके परिजनों की संवेदनशीलता और समाजसेवा की भावना का परिणाम है।

आइए, इस विश्व नेत्रदान दिवस पर हम सभी नेत्रदान का संकल्प लें और दूसरों के जीवन में उजाला फैलाने का संदेश जन-जन तक पहुँचाएँ।

"नेत्रदान करें – किसी के जीवन में रोशनी भरें।"

एम्स ऋषिकेश आई बैंक ने पार किया 1246 नेत्रदान का आंकड़ा कई दृष्टिबाधितों को मिलेगी नई रोशनीबीते दिवस दिवंगत सुरेंद्रवती,...
13/04/2026

एम्स ऋषिकेश आई बैंक ने पार किया 1246 नेत्रदान का आंकड़ा
कई दृष्टिबाधितों को मिलेगी नई रोशनी

बीते दिवस दिवंगत सुरेंद्रवती, सुदेश कुमारी एवं राहुल पंवार के परिजनों ने उनके प्रियजनों के निधन के उपरांत उनकी आंखें दान कर मानवता की मिसाल पेश की। इन आई डोनेशन के साथ ही अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश के आई बैंक में अब तक नेत्रदान का आंकड़ा 1246 हो गया है। इस नेक पहल से छह से आठ दृष्टिबाधित व्यक्तियों को पुनः दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने इस पुनीत कार्य के लिए दानदाता परिवारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायक कदम समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं और अन्य लोगों को भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए ऋषिकेश आई बैंक, एम्स की टीम को भी बधाई दी।

एम्स ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉक्टर) संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि सुरेंद्रवती (85 वर्ष, निवासी उग्रसेन नगर) के पुत्र अनुराग भारद्वाज, सुदेश कुमारी (79 वर्ष, निवासी गंगा नगर) के पुत्र राजेश जुनेजा तथा राहुल पंवार (29 वर्ष, निवासी रायवाला) के भाई विक्रम सिंह ने नेत्रदान की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग किया।

सभी परिवारों ने एम्स आई बैंक के साथ समन्वय स्थापित कर यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कराया।

उन्होंने यह भी बताया कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है, चाहे वह चश्मा पहनता हो या उसने मोतियाबिंद की सर्जरी कराई हो।
प्रो. मित्तल के मुताबिक नेत्रदान की प्रक्रिया लगभग 15 मिनट की सरल प्रक्रिया में संपन्न होती है, जिसमें कॉर्निया को सुरक्षित रूप से निकालकर संरक्षित किया जाता है।

आई बैंक की चिकित्सा निदेशक डॉ. नीति गुप्ता के अनुसार प्राप्त कुल 1246 कॉर्निया में से 61% ऋषिकेश, 22% हरिद्वार, 3% देहरादून, 1% रुड़की, 8% उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों तथा 5% देश के अन्य शहरों से प्राप्त हुए हैं।

निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने समाज में नेत्रदान को बढ़ावा देने में विभिन्न संस्थाओं एवं समाजसेवियों के योगदान की विशेषरूप से सराहना की। इनमें सुप्रयास कल्याण संस्थान के डॉ. सत्या नारायण एवं डॉ. शिवम शर्मा, लायंस क्लब ऋषिकेश के गोपाल नारंग, देह दान समिति, हरिद्वार के सुभाष चंद्र, मुस्कान फाउंडेशन की नेहा मलिक तथा मारवाड़ी महिला सम्मेलन (ऋषिकेश शाखा) की नूतन अग्रवाल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त समाजसेवी अनिल कक्कड़, संगीता आनंद (ऋषिकेश), अनिल अरोड़ा, समीर चावला, अशोक कालरा (हरिद्वार), विवेक अग्रवाल, हरदीप सिंह (देहरादून) तथा सीमा जैन (रुड़की) द्वारा नेत्रदान जागरूकता में किए गए प्रयासों को भी सराहा गया।

इस उपलब्धि के पीछे ऋषिकेश आई बैंक, एम्स की समर्पित टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जो 24×7×365 निरंतर सेवाएं प्रदान कर रही है। टीम में आई बैंक मैनेजर महिपाल चौहान तथा परामर्शदाता सह तकनीशियन बिंदिया भाटिया, संदीप गुसाईं, पवन सिंह एवं आलोक सिंह का योगदान सराहनीय रहा।

एम्स ऋषिकेश आई बैंक की यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि समाज में नेत्रदान के प्रति जनजागरूकता और सहभागिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है,

ग्लूकोमा (नेत्र जनित काला मोतियाबिंद) : पहचान एवं निदानअखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्...
12/03/2026

ग्लूकोमा (नेत्र जनित काला मोतियाबिंद) : पहचान एवं निदान

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार मित्तल जी ने बताया कि ग्लूकोमा एक गंभीर नेत्र रोग है, जो धीरे-धीरे दृष्टि को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है। प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए इसे अक्सर “साइलेंट विज़न थिफ” भी कहा जाता है।

उन्होंने विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नियमित नेत्र जांच कराने की सलाह दी। समय पर पहचान, नियमित जांच और उचित उपचार के माध्यम से ग्लूकोमा से होने वाली दृष्टि हानि को काफी हद तक रोका जा सकता है। समाज में जागरूकता बढ़ाना इस रोग की रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है।

https://youtu.be/YuQ5v2kokRs?si=HVAQdTVIbrU3DRZw

एम्स ऋषिकेश में 42 वर्षीय रघु पासवान ने अंगदान से 5 को दिया नया जीवनऋषिकेश। मृत्यु को जीवन का अंत कहा गया है, लेकिन विज्...
25/01/2026

एम्स ऋषिकेश में 42 वर्षीय रघु पासवान ने अंगदान से 5 को दिया नया जीवन
ऋषिकेश। मृत्यु को जीवन का अंत कहा गया है, लेकिन विज्ञान ने अब इसे एक नया आयाम भी दे दिया है। 42 वर्षीय रघु पासवान की जिंदगी के मामले में यह बात सच साबित भी हुई है। एम्स ऋषिकेश में ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद रघु के कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन से देश के तीन बड़े अस्पतालों में भर्ती पांच गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने जा रहा है, जबकि दो दृष्टिहीनों को उनकी आंखों से रोशनी मिलेगी।

मूल रूप से बिहार के रहने वाले और पेशे से राजमिस्त्री रघु पासवान हाल ही में एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हालत नाजुक होने पर उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान वह नॉन-रिवर्सिबल कोमा में चले गए। सभी चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद जब कोई न्यूरोलॉजिकल रिकवरी नहीं हुई, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के निर्देशन में चिकित्सकों की टीम ने परिजनों से संपर्क कर अंगदान के प्रति काउंसलिंग की। इस काम में ऋषिकेश के मेयर शंभू पासवान ने भी व्यक्तिगत रुचि लेते हुए परिवार को इस मानवीय निर्णय के लिए प्रेरित किया। परिजनों की सहमति के बाद कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई।

लिहाजा, कहना होगा, कि रघु पासवान भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके दान किए गए अंगों के जरिए वे कई परिवारों में उम्मीद, रोशनी और जीवन की धड़कन बनकर हमेशा जीवित रहेंगे।

ग्रीन कॉरिडोर बना लाइफलाइन

अंगों को तय समय पर गंतव्य अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के 9 जिलों की पुलिस के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। एम्स ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, फिर दिल्ली और चंडीगढ़ तक विशेष ट्रैफिक व्यवस्था कर अंगों को सुरक्षित पहुंचाया गया।

डॉक्टरों और समन्वय टीम की भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में न्यूरो सर्जन डॉ. रजनीश अरोड़ा, डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. अंकुर मित्तल, डॉ. करमवीर, डॉ. नीति गुप्ता, डॉ. मोहित धींगरा, डॉ. लोकेश अरोड़ा, डॉ. आशीष भूते और डॉ. आनंद नागर की अहम भूमिका रही। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर देशराज सोलंकी, डीएनएस जीनू जैकब, पीआरओ डॉ. श्रीलोय मोहंती और डीएमएस डॉ. रवि कुमार ने नोटो सहित विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर प्रक्रिया को सफल बनाया।

एम्स ऋषिकेश में दूसरा कैडेवरिक अंगदान

एम्स ऋषिकेश में यह कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन का दूसरा सफल मामला है। इससे पहले 2 अगस्त 2024 को हरियाणा के 25 वर्षीय कांवड़िये के अंगदान से भी कई लोगों को जीवनदान मिला था।

किन्हें मिला जीवनदान

पीजीआई चंडीगढ़ के 3 मरीजों को किडनी, लीवर और पैंक्रियाज

एम्स दिल्ली के 1 मरीज को किडनी

आर्मी हॉस्पिटल (आरआर) दिल्ली के 1 मरीज को हृदय

नेत्रदान के तहत दोनों कॉर्निया एम्स आई बैंक में सुरक्षित, 2 दृष्टिहीनों को मिलेगी रोशनी

दिनांक 02/01/2026 आयोजित नेत्रदान जागरूकता एवं नेत्र जाँच शिविर के अवसर पर श्री स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय, हरिद्वार मे...
04/01/2026

दिनांक 02/01/2026 आयोजित नेत्रदान जागरूकता एवं नेत्र जाँच शिविर के अवसर पर श्री स्वामी अजरानंद अंध विद्यालय, हरिद्वार में नेत्रहीन बच्चों के साथ हुआ संवाद अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
उनकी सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सजीव मुस्कान ने सभी को भावविभोर कर दिया।
इस संवाद ने हमें संवेदनशीलता, सेवा और सहयोग के वास्तविक महत्व का बोध कराया।
इस प्रकार के आयोजन समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ मानवता की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

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