13/08/2026
12 अगस्त 2026
एस.एफ.आई. एमडीयू यूनिट के द्वारा संगठित छात्र आंदोलन की 90वीं वर्षगांठ व जंतर-मंतर पेपर लीक आंदोलन जीत के मौके एमडीयू रोहतक में ‘बोल के लब आज़ाद हैं तेरे’ कार्यक्रम।
रोहतक, 12 अगस्त 2026। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की एमडीयू यूनिट कमेटी द्वारा देश के पहले संगठित छात्र आंदोलन की 90वीं वर्षगांठ तथा जंतर-मंतर पेपर लीक आंदोलन की जीत के अवसर पर ‘बोल के लब आज़ाद हैं तेरे’ कार्यक्रम के तहत ‘गीत-संगीत और संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पेपर लीक आंदोलन की संघर्षशील साथी सखी और शारण्या मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत साथी जतिन द्वारा ‘बोल के लब आज़ाद हैं तेरे’ गीत की प्रस्तुति के साथ हुई। इसके बाद SFI हरियाणा राज्य अध्यक्ष अक्षय ने भारत के पहले संगठित छात्र आंदोलन के इतिहास और उसकी विरासत पर बात रखते हुए उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित किया।
पेपर लीक आंदोलन की संघर्षशील साथी शारण्या ने जंतर-मंतर आंदोलन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश में लगातार छात्र-युवाओं पर दमन किया जा रहा था तथा पेपर लीक और शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर जवाबदेही का अभाव था। इसी के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और नौजवानों का आंदोलन व्यापक रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में छात्रों ने धर्म, जाति, भाषा और वर्ग से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के विभिन्न चरणों में छात्रों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। 20 जुलाई को छात्र संगठनों के आह्वान पर हुए संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के इस्तेमाल का भी उन्होंने उल्लेख किया। शारण्या ने कहा कि लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन के दबाव के बाद सरकार को झुकना पड़ा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने इसे आंदोलन की एक महत्वपूर्ण जीत बताते हुए कहा कि शिक्षा के निजीकरण और व्यावसायीकरण के खिलाफ छात्र आंदोलन को आगे भी मजबूत करने की आवश्यकता है।
साथी सखी ने भारत के पहले संगठित छात्र आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत पर बात रखते हुए कहा कि आज का छात्र आंदोलन स्वतंत्रता आंदोलन से निकली उस संघर्षशील परंपरा से प्रेरणा लेता है, जिसमें भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाकउल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए छात्रों को संगठित होकर संघर्ष करना चाहिए।
कार्यक्रम के अगले चरण में दरख्त टीम के साथियों ने संत रविदास और कबीर की वाणियों एवं दोहों को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रस्तुतियों के जरिए जातिवाद, अंधविश्वास और भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ मानवता, समानता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया।
एसएफआई जिला सचिव अमित पिलाना ने कहा कि छात्र आंदोलन की गौरवशाली विरासत और हाल के पेपर लीक आंदोलन की जीत से छात्रों को संघर्ष और एकजुटता की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि छात्र हितों और शिक्षा के सवालों को लेकर एसएफआई आगे भी मजबूती से अपनी आवाज उठाती रहेगी।
कार्यक्रम के समापन पर एसएफआई एमडीयू यूनिट अध्यक्ष शुभम रावत ने सभी वक्ताओं, कलाकारों और कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राओं का धन्यवाद किया। इस अवसर पर वक्ताओं को पुस्तक भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर एसएफआई एमडीयू यूनिट अध्यक्ष शुभम रावत ने सभी वक्ताओं, कलाकारों और कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राओं का धन्यवाद किया। इस अवसर पर वक्ताओं को पुस्तक भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
जारीकर्ता
एस एफ आई,
एमडीयू यूनिट