23/10/2026
➡️ कमिश्नर श्री दिलीप कुमार ने उल्दन बांध परियोजना का निरीक्षण कर भू-अर्जन, मुआवजा वितरण एवं विस्थापन कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश
➡️ डूब क्षेत्र के प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरण और पुनर्वास कार्य प्राथमिकता से पूर्ण करें
कमिश्नर सागर संभाग श्री दिलीप कुमार ने शुक्रवार को बंडा क्षेत्र अंतर्गत निर्माणाधीन बंडा वृहद सिंचाई परियोजना (उल्दन बांध) का निरीक्षण किया। उन्होंने बांध निर्माण, पंप हाउस, गेट, जलभराव, पाइपलाइन एवं जलापूर्ति व्यवस्था की जानकारी ली। साथ ही डूब क्षेत्र में प्रभावित भूमि, मुआवजा वितरण, पुनर्वास एवं विस्थापन कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को सभी लंबित कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
कमिश्नर श्री दिलीप कुमार ने एसडीएम बंडा एवं परियोजना के अधिकारियों से बांध निर्माण की प्रगति, जलभराव की स्थिति, पानी के प्रवाह तथा पंप हाउस के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने बंडा, शाहगढ़, बांदरी सहित संबंधित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की योजना के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने बताया कि बांध निर्माण का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि पाइपलाइन बिछाने का कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूरा हुआ है। परियोजना के समस्त कार्य जून 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है।
*भू-अर्जन एवं मुआवजा वितरण कार्य में तेजी लाएं
कमिश्नर ने निर्देश दिए कि डूब क्षेत्र में प्रभावित भूमि का भू-अर्जन एवं मुआवजा वितरण शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए। जिन प्रकरणों में भूमि के वास्तविक स्वामी के नाम, फौती अथवा अन्य अभिलेखीय त्रुटियों के कारण भुगतान लंबित है, उनका परीक्षण कर अगले सप्ताह तक कमियां दूर करने की कार्रवाई करें। इसके लिए विशेष शिविर आयोजित कर वास्तविक हितग्राहियों के नामों का सत्यापन एवं अभिलेखों में आवश्यक सुधार कराया जाए। उन्होंने लंबित प्रकरणों का निराकरण कर पात्र प्रभावितों को मुआवजा राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
*विस्थापन एवं भवनों के निष्कासन की कार्रवाई शीघ्र करें
कमिश्नर श्री कुमार ने कहा कि डूब क्षेत्र के जिन गांवों से परिवार विस्थापित हो चुके हैं, वहां खाली पड़े मकानों एवं अन्य संरचनाओं को नियमानुसार हटाने की कार्रवाई की जाए। निष्कासन से पहले संबंधित परिवारों को सूचना देकर अपना सामान सुरक्षित निकालने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। जिन परिवारों ने अभी तक मकान खाली नहीं किए हैं, उनसे संवाद कर उन्हें विस्थापन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने विस्थापित परिवारों को मुआवजा एवं पुनर्वास राशि प्राप्त होने की स्थिति की भी जांच करने के निर्देश दिए।
उन्होंने डूब क्षेत्र में आने वाले शासकीय भवनों, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, थाना एवं चिकित्सालय सहित अन्य संरचनाओं को आगामी वर्षाकाल से पहले हटाने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही कितने भवनों का निष्कासन शेष है, इसकी अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
*मंदिरों के लिए समिति गठित कराएं
कमिश्नर ने डूब क्षेत्र में आने वाले मंदिरों के संबंध में संबंधित पक्षों से चर्चा कर तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं मंदिर के पुजारी सहित पांच सदस्यों की समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने समिति के नाम से बैंक खाता खुलवाकर नियमानुसार स्वीकृत राशि जमा कराने तथा मंदिरों से संबंधित लंबित कार्यवाही को व्यवस्थित रूप से पूरा करने को कहा।
निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने डूब क्षेत्र में फसलों को हुए नुकसान की जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने प्रभावितों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार उनका निराकरण करने तथा भू-अर्जन, मुआवजा वितरण एवं पुनर्वास कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
*278 गांवों की 87,100 हेक्टेयर भूमि को मिलेगी सिंचाई सुविधा
अधिकारियों ने बताया कि बंडा वृहद सिंचाई परियोजना के पूर्ण होने पर 278 गांवों की कुल 87,100 हेक्टेयर भूमि को सूक्ष्म सिंचाई पद्धति से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे सागर जिले के बंडा, शाहगढ़, मालथौन तथा छतरपुर जिले की बक्सवाहा तहसील के किसानों को लाभ मिलेगा।
परियोजना के बांध की कुल लंबाई 926 मीटर है, जिसमें 756 मीटर मिट्टी तथा 170 मीटर कंक्रीट का हिस्सा है। बांध की कुल जलभराव क्षमता 313.07 मिलियन घन मीटर है। इसमें से 16.11 मिलियन घन मीटर पानी 412 गांवों की पेयजल व्यवस्था के लिए आरक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त सौरई औद्योगिक क्षेत्र के लिए 1.018 मिलियन घन मीटर पानी सुरक्षित रखा गया है। परियोजना से क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ पेयजल उपलब्धता और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
परियोजना के डूब क्षेत्र से 28 गांवों की लगभग 3,409.96 हेक्टेयर निजी भूमि प्रभावित हो रही है। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्विस्थापन के लिए बंडा के समीप ग्राम पनारी एवं पिथौली में आदर्श पुनर्वास कॉलोनियों का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरण एवं पुनर्वास संबंधी शेष कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान जल संसाधन विभाग के परियोजना संचालक, परियोजना प्रबंधक, एसडीएम बंडा, सहायक परियोजना प्रबंधक, उपयंत्री, राजस्व विभाग के अधिकारी तथा निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।