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बिहार में व्यवस्था परिवर्तन का संकल्प लेकर प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर से जन सुराज पदयात्रा की शुरुआत की है। हजारों-हजार लोग हर रोज पदयात्रा से जुड़ रहे हैं और प्रशांत किशोर के साथ चल रहे हैं। पूरे बिहार में पहुंचने के लिए 5000 किमी से अधिक की पदयात्रा होनी है। ताकि पूरे राज्य की समस्या को समझा जा सके। इस फेसबुक पेज का उद्देश्य आपके प्रखंड की समस्याओं को जन सुराज के माध्यम से उजागर करना है।
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05/10/2026

05/10/2026

MLC चुनाव में हार के डर से गुंडागर्दी पर उतर चुके है NDA नेता!!

राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष श्री उदय सिंह जी की अपील—एक वोट, तीन समर्थन।जन सुराज के तीनों उम्मीदवार...
04/10/2026

राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष श्री उदय सिंह जी की अपील—

एक वोट, तीन समर्थन।
जन सुराज के तीनों उम्मीदवारों को अपना बहुमूल्य वोट देकर लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करें।

आपका एक वोट केवल समर्थन नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के भविष्य के लिए आपकी आवाज़ है।

जय बिहार!!
Long live Bihari Brotherhood 👏🏻
x.com/UdaySinghJS/st…

04/10/2026

बिहार को लेकर पिछले दो दशकों की राजनीति पर सवाल उठाना जरूरी है। NDA के लंबे शासन में भी विकास, रोजगार और सामाजिक सौहार्द से जुड़े कई सवाल आज तक बने हुए हैं। वहीं, दूसरी ओर समाजवाद से परिवारवाद की ओर बढ़ी राजनीति ने जातीय समीकरणों को इतना महत्व दिया कि सामाजिक विभाजन और तनाव के सवाल भी उठते रहे।

सोचा, बांकीपुर का उदाहरण याद दिला दूँ। पटना का बांकीपुर ऐसा विधानसभा क्षेत्र रहा है, जहाँ मतदाताओं ने कई बार जाति और धर्म के पार जाकर उम्मीदवार और मुद्दों को महत्व देने का संदेश दिया। यानी लोकतंत्र में मतदाता को किसी तय राजनीतिक खांचे में रखकर नहीं देखा जा सकता—वह अपने विवेक से सत्ता और विपक्ष, दोनों को जवाब दे सकता है।

इसीलिए किसी पूरे समाज या मतदाता वर्ग को “अंधभक्त” कहकर खारिज करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि बांकीपुर जैसे उदाहरण बताते हैं कि जागरूक मतदाता राजनीतिक प्रचार से प्रभावित होने के बावजूद अंतिम निर्णय अपने विवेक से ले सकता है।

आज जब कोई “जंगलराज 2.0” की चर्चा करता है, तो थोड़ा आत्ममंथन भी जरूरी है।
आखिर चलनी जब सूप को दोष देने लगे, तो कहावत अपने आप याद आ जाती है। 🙂

लोकतंत्र का असली सवाल यही है—क्या बिहार की जनता जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और विकास के आधार पर अपने जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगेगी? और क्या हर राजनीतिक दल जनता के सामने अपने शासन का ईमानदार हिसाब रखने को तैयार है?

03/10/2026

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