Baat Bihar Ki - Bibhutipur
'Baat Bihar Ki’ is an initiative to make sure Bihar is counted as one of the 10 leading states of the country in the next 10 years.
The goal is to connect people, who believe in this effort, from village to village and build a strong leadership.
इतिहास के पन्नों में बहुत कुछ लिखा जाएगा माननीय मंत्री मांझी जी यह भी लिखा जाएगा
एक पार्टी बनाकर
अपने बेटे को
अपने दामाद को
अपने पत्नी को
अपने समधन को
अपने पूरे खानदान को
अपने पूरे सगे संबंधियों को
राजा बनाकर राज करने की सोच रखने वाला
एक व्यक्ति था जो बाकी मुसहर जातियों को अपना गुलाम समझता था
और राजनीतिक का लाभ लेकर फायदा उठाकर सिर्फ
अपने खानदान
अपने परिवार
अपने नाते रिश्तेदारों को
फायदा पहुंचाया
उसका नाम था जीतन राम मांझी
Er. I P Gupta Pan Mukesh Kr Mandal Vijay Kumar Das Master Media Bihar Yt Dhiru Official Rajesh Prasad Niraj Kumar Narendra Kumar Dhirendra Yadav
13/01/2026
विनम्र श्रद्धांजलि।
पूर्व केंद्रीय मंत्री आदरणीय स्व0 शरद यादव जी के तृतीय पुण्यतिथि में श्रद्धांजलि अर्पित करने दरोगा प्रसाद राय स्मारक न्यास हॉल, पटना पहुंचा। आदरणीय स्व0 शरद जी के साथ मेरे बेहद व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। 03 अप्रैल 2018 की वो रात मुझे याद जब उन्होंने तांती, ततवा और पान के बारे में उन्होंने मुझे विस्तृत रूप से बताए थे।
25/12/2025
इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष,सहरसा सदर विधायक बड़े भाई इंजिनियर इन्द्रजीत प्रसाद गुप्ता जी के जन्मदिन की हार्दिक बधाई ।🎉🎂
Er. I P Gupta Pan.
16/12/2025
16/12/2025
जीने का जैसे मकसद मिल गया हो......)"
ईश्वर को इंसानों में ढूंढता मै सहरसा पहुंच गया। सहरसा का रास्ता इतना आसान नहीं था । सहरसा पहुंचने का रास्ता हाँको रथ हम पान हैं : एक पान आंदोलन से होकर गुजरा था। और ये रास्ता पूरे बिहार के पान समुदाय के 80 लाख लोगों ने एक साल तक बिना थके, बिना सोए अपने आंसुओं से सिंचा था। पान समाज के अनवरत बहते आंसुओं को आरक्षण वापसी से ही रोक पाऊंगा मैं। और ये मै करके ही दम लूंगा।
पान समाज के इस आरक्षण वापसी के लडाई को सहरसा वालों ने एक संवैधानिक प्लेटफॉर्म दिया। बिहार के 80 लाख पान समाज की आबादी सहरसा के लोगों का जीवन भर कर्जदार बना रहेगा। सहरसा मुझे इतना प्यार देगा, सपने में भी कभी नहीं सोचा था। सहरसा से बिहार विधानसभा के याचिका समिति के बैठक में भाग लेने पटना पहुंच रहा हूं। पता ही नहीं चला कि मेरे ये 10 दिन सहरसा में कैसे बीत गए। पटना पहुंच गया हूं मगर ऐसा लगता है कि सहरसा में बहुत कुछ छूट गया है। हर रोज रात के 12 बजे तक आपके समस्याओं से दो चार होना , आपके आंसुओं को अपने बाहों में समेटना जैसे मुझे जीने का एक मकसद दे गया हो। बंद कमरे के एकाकी में अनवरत आंखों की नमी ने मेरे खुद के आंसू सोख दिए थे । मेरे आंखों के नमी को फिर से लौटाने के लिए शुक्रिया सहरसा। जल्द लौटूंगा और मुरेठा बांध आपके साथ खड़ा हो जाऊंगा।
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Samastipur
