20/09/2026
क्वाणु डूब रहा हैं 😔😔😔
जौनसार बावर के सामुदायिक और सामूहिक अस्तित्व का सवाल है।
जौनसार बावर के 17 गांव के अस्तित्व को डूबने से बचाना है।
आज जरूरत है कि हर कोई उन लोगों के साथ खड़ा हो, जिनके घर, खेत, गांव और पुश्तैनी जमीनें इस डूब क्षेत्र की चपेट में आने वाली हैं।
यह केवल कुछ लोगों के विस्थापन का सवाल नहीं है, बल्कि हमारी मिट्टी, हमारी यादें, हमारी संस्कृति और हमारे सामूहिक अस्तित्व का सवाल है। कुछ लोगों के निजी स्वार्थ के लिए यदि गांव और समाज का अस्तित्व डूबता है, तो न इतिहास इसे माफ करेगा, न भविष्य।
आज चुप रहने का अर्थ केवल मौन रहना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना है।जौनसार के लोहारी गांव के डूबने के बाद अब किशाऊ बाँध बनने से क्वाणू के साथ-साथ जौनसार-बावर और हिमाचल के अन्य गांव भी डूब क्षेत्र में आ गए हैं। 🥲
जौनसार-बावर की सबसे समतल और उपजाऊ जमीनों में से एक यही क्षेत्र है, और आज वही डूब क्षेत्र में आ गया है। जिन लोगों के खेत-खलिहान, घर और पूरे गांव इस आशंका की दहलीज पर खड़े हैं कि एक दिन वे पानी में समा जाएंगे, उनके मन की स्थिति क्या होती होगी, यह सोचकर ही बेचैनी होती है।
हम जौनसारियों का अपने गांव, खेत-खलिहान और अपनी मिट्टी से जो गहरा जुड़ाव है, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
अपने ही गांव के बारे में यह विचार आना कि “एक दिन मेरा गांव नहीं रहेगा”किसी व्यक्ति के लिए कितना पीड़ादायक होगा, इसकी कल्पना करना भी मन को विचलित कर देता है।
मैं विकास के नाम पर किसी भी गांव के डूबने का पक्षधर नहीं हूं। विकास आवश्यक है, लेकिन यदि उसकी कीमत किसी समुदाय को अपनी जमीन, अपनी विरासत, अपनी स्मृतियां और अपनी पहचान खोकर चुकानी पड़े, तो उस विकास पर संवेदनशीलता के साथ गंभीरता से विचार होना चाहिए।
डैम के संभावित लाभों के साथ-साथ उसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर भी गंभीर, निष्पक्ष और मानवीय संवाद होना जरूरी है।
जब टिहरी डूब रहा था तो नरेंद्र नेगी जी ने बहुत मार्मिक गीत गाया था मुझे वह याद आ गया।😔
#सेवक्वाणू