22/07/2022
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नपिनो ऑटो, मानेसर के मज़दूरों की हड़ताल नौंवे दिन भी जारी है!
संघर्ष में महिला और पुरूष साथियों का जोश बरकरार हैं!
ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री काण्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (AICWU) मज़दूरो की माँगों और हड़ताल का समर्थन करती है!
22 जुलाई 2022 : मानेसर (हरियाणा) के सेक्टर 3 के प्लाट नंबर 7 में स्थित 'नपिनो ऑटो एंड इलैक्ट्रॉनिक लिमिटेड' यूनियन के स्थायी मज़दूर पिछले 4 सालों से लम्बित सामुहिक माँगपत्र को लागू करवाने और निलम्बित 6 साथियों की कार्यबहाली की माँग को लेकर पिछले 9 दिनों (14 जुलाई) से हड़ताल पर हैं। नपिनो के संघर्षरत साथियों का जोश बरकरार है। पुरूषों के साथ महिला साथी भी हड़ताल में शामिल हैं। मज़दूर यूनियन, प्रबंधन और श्रम विभाग की त्रिक्षीय वार्ताएं भी जारी हैं।
19 जुलाई के बाद कल 21 जुलाई 2022 को भी श्रम विभाग के डीएलसी के समक्ष नपिनो प्रबंधन द्वारा अभी भी किसी माँग को न मानने के अड़ियल रवैये के कारण हर बार की तरह एक बार फ़िर से कोई हल नहीं निकला। यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार अगली सुनाई यानी आज 22 जुलाई को दोबारा होने की संभावना है।
ज्ञात रहे कि इसी प्रबंधन के अपने अड़ियल और बदले की दुर्भावना के कारण समझौता वार्ता नहीं कर रहा है। इस पर श्रम विभाग और शासन-प्रशासन द्वारा भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। जिसके कारण चार साल इंतज़ार करने के बाद मज़बूरन मज़दूरों नेे उत्पादन ठप्प करके हड़ताल का रास्ता अख़्तियार किया है। प्रबंधन उल्टा सुविधाओं में कटौती और उनको महँगा कर रहा है।
चूंकि श्रम विभाग, शासन-प्रशासन मज़दूरों की ज़ायज़ माँगों के लिए प्रबंधन पर कोई असरदार कार्यवाही नहीं कर रहा है। इसलिए AICWU का मानना है कि गड़गाँव, रेवाड़ी, फरीदाबाद और अलवर सभी यूनियनों, संघों, फेडरेशनों और कौंसिलों को मिलकर इस पर जल्द से जल्द सख़्त स्टैण्ड लेते हुए संघर्ष का विस्तार करना होगा। ताकि प्रबंधन नपिनो के साथियों के संघर्ष को किसी तरह से कमज़ोर करने या दमन करने जैसी किसी भी चाल में कामयाब न हो सके।
AICWU का मानना है कि अब नपिनो के साथियों को अपने संघर्ष को जीत तक पहुँचाने के लिए तुरंत चारों प्लाण्टों के स्थायी व अस्थायी मज़दूरों और इस इलाके की सभी यूनियनों और मज़दूरों को भी साथ लेकर आगे बढ़ने की योजना पर काम करना होगा। साथ ही व्यापक प्रचार-प्रसार के जरिये समाज के जागरूक और इंसाफ़ पसंद लोगों का समर्थन जुटाने का काम तेज़ करना होगा।
पूरे औद्योगिक इलाके में मज़दूरों का शोषण, दमन और औद्योगिक दुरघटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है। मानेसर में ही निपिनो के इलावा जेएनएस, बेलसोनिका, मुंजाल शोफा की घटनाओं को देखा जा सकता है। मारूति के इलावा जेएनएस के मज़दूर अभी भी जेल में हैं। हरियाणा में डबल इंजन की सरकार नये श्रम क़ानूनों के जरिये मालिकों को क़ानून खुली छूट देने को तैयार बैठी है।
सत्ता में बैठी ताकतें तथाकथित राष्ट्रहित और देश हित के नाम पर पूँजीपतियों के आपसी छीना-झपटी के कारण के कारण गिरते मुनाफ़े की दर को बचाने में अपना ऐड़ी-चोटी का ज़ोर बढ़ा रही है। देश की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने वाली 80-85 प्रतिशत बहुसंख्यक मेहनतकश आबादी के हितों की बजाये 15-20 प्रतिशत लुटेरी, परजीवी वर्ग के हितों को प्राथमिकता दे रही है। पूर पँजीपति वर्ग की लूट-शोषण व दमन के चलते बढ़ती बेरोज़गारी, असुरक्षित रोज़गार, महँगाई, वेतन कटौती के कारण इस वक़्त देश के इस औद्योगिक क्षेत्र में भी उनके ख़िलाफ़ मज़दूरों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। सत्ता से बाहर उनकी पैदल सैनाएँ यानी साम्प्रदायिक फ़ासीवादी ताकतें और विभिन्न संगठनों के माध्यम से मालिकों और इनके मुनाफ़े को बचाने के लिए मज़दूरों-मेहनतकशों के बीच जाति-धर्म, भाषा-क्षेत्र आदि के जरिये ‘फूट डालो - राज करो’ की नीति अपना रही है। उनको भटकाने के लिए विभिन्न प्रयोगों का विस्तार देश के कोने-कोने में तेज़ करती जा रहीं हैं। मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में असुरक्षा के नाम पर अलपसंख्यक व प्रवासी मजदूरों के बीच डर का माहौल पैदा किया जा रहा है, ताकि कोई सिर उठाने की हिम्मत न कर सके।
AICWU का यह मनना है कि इलाके में स्थिति की गंभीरता और पलायन को देखते हुए सभी प्रगतिशील, जनवादी और मेहनतकश-मज़दूरों के लिए काम करने वाली ताकतों को वर्गीय एकता के आधार पर पहलकदमी लेते हुए इलाके में अवामी एकजुटता व भाईचारे को बनाये रखने और मज़बूत करने के रैलियों, सभाओं, आदि जैसे कार्यक्रमों का विस्तार करना होगा।
ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री काण्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (AICWU) नपिनो के साथियों की इस हड़ताल का समर्थन करते हुए माँग करती है कि :
1. प्रबन्धन मज़दूरों की सारी माँगों पर ज़ल्द से ज़ल्द समझौता वार्ता शुरू करे।
2. श्रम-विभाग और स्थानीय प्रशासन और हरियाणा सरकार इसमें हस्तक्षेप करके यह ज़िम्मेदारी ले कि मज़दूरों की सभी जायज़ माँगें मानी जायें।
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