Narendra Kumar

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Narendra Kumar “धर्म, गौ, राष्ट्र – तीनों पर समझौता नहीं”
राष्ट्रीय समन्वयक – राष्ट्रीय गौ - सेवा संघ
संस्थापक – हिंदराइज़
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आत्मनिर्भर सेना

Founder of Hindrise Foundation – committed to protecting and serving indigenous cows. National Coordinator at Rashtriya Gausevak Sangh, working for Bharat’s Gau-Mata and rural upliftment. Founder of Aatmnirbhar Sena, empowering youth, farmers, and the underprivileged to build a self-reliant India. Driven by Dharma, Seva, and Nation-first vision

09/10/2026

रोते रहो, कलपते रहो... चवन्नियों की तरह उछलते रहो : अगला अपना काम कर रहा है और तुम्हारा काम लगा रहा है। सुनो 12 मिनट 45 सेकेंड कान गर्म कर लो अपनी गिरोहबाजों 😎

09/10/2026

पीएम मोदी जी की दिमागी नक्सल वाली होम्योपैथी गोली का असर शुरू हो चुका है! लाल किले से दिए गए एक बयान ने कांग्रेस और INDI गठबंधन का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है। जैसे होम्योपैथी बीमारी को उभारती है, वैसे ही दिमागी नक्सल और उनके समर्थक बिल से बाहर आ रहे हैं। अब जनता देख रही है कि इस वैचारिक बीमारी को कौन बढ़ावा दे रहा है…

09/10/2026

International Airport's name International Airport'...

09/10/2026

जय #गौमाता ,,,🙏🚩
#गौमाता_राष्ट्रमाता_महाअभियान 💜 #गौमाता_को_राष्ट्रमाता_घोषित_करे_सरकार 🙏


भारतीय फिल्मों के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का आज सुबह गोवा में निधन हो गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इसकी पुष्टि की।...
08/10/2026

भारतीय फिल्मों के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का आज सुबह गोवा में निधन हो गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इसकी पुष्टि की।

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का आज सुबह 5:20 बजे उनके घर पर ज़बरदस्त कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। 45 मिनट तक लगातार CPR देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। एक मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम किया जाएगा: डॉ. शेखर सालकर, प्रमुख, ऑन्कोलॉजी विभाग, मणिपाल अस्पताल।

क्या आप जानते हैं कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर ने भी आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना ज्वाइन की थी. उस वक्त उन्हें सेना में मानद कैप्टन के रूप में ज्वॉइन किया गया था. कारगिल वार के दौरान वह मुगलपुरा, सोपोर, बारामुला, कुपवाड़ा और द्रास जैसे तनावपूर्ण क्षेत्र में तैनात थे।

इतना ही नहीं नाना पाटेकर एलओसी पर मिलिट्री हॉस्पिटल में सैनिकों की देख-रेख भी करते थे. वह सैनिकों के साथ एक जगह से दूसरी जगह भी जाया करते थे. जब नाना पाटेकर कारगिल वार में शामिल हुए तो लोगों के जहन में एक ही सवाल आया था कि वह एक एक्टर हैं और उन्हें सेना में एंट्री कैसे मिल गई. आइए जानते हैं इसके बारे में।

आपको बता दे प्रहार की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने मराठा लाइट इन्फेंट्री के साथ तीन साल तक कड़ी ट्रेनिंग ली. 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान नाना ने देश की सेवा के लिए सेना में शामिल होने की इच्छा जताई. शुरुआत में सैन्य अधिकारी नाना की इच्छा के खिलाफ थे, लेकिन वे झुकने को तैयार नहीं थे. नाना ने अपने राष्ट्रीय स्तर के शूटिंग अनुभव का उदाहरण भी दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ.

तमाम विरोध के बावजूद नाना पीछे हटने को तैयार नहीं थे, उन्हें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने बताया कि केवल रक्षा मंत्रालय ही इसे मंजूरी दे सकता है.नाना ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस को मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया।

कौन बनेगा करोड़पति में अपनी उपस्थिति के दौरान नाना ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा ‘मैं अपने रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस जी को जानता था, इसलिए मैंने उन्हें फोन किया. उन्होंने भी कहा कि यह असंभव है. मैंने उनसे कहा कि भले ही कमीशन के लिए छह महीने का प्रशिक्षण होता है, लेकिन मैंने तीन साल तक प्रशिक्षण लिया,उन्हें आश्चर्य हुआ और उन्होंने मुझसे इसके बारे में पूछा. मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ मेरे अनुभव के बारे में जानने के बाद, उन्होंने मुझसे पूछा, ‘आप कब जाना चाहते हैं?’

तब जाकर उन्हें ये सुनहरा मौका मिला। अगस्त 1999 में नाना भारतीय सेना में कैप्टन के तौर पर शामिल हुए और उन्होंने अपनी वर्दी को गर्व के साथ पहना और द्रास, कुपवाड़ा, बारामुल्ला, सोपोर और मुगलपुरा जैसे संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में तैनात रहे इतना ही नहीं उन्होंने न सिर्फ बॉर्डर पर पेट्रोलिंग की, बल्कि अस्पतालों में घायल जवानों की सेवा भी की।

कारगिल युद्ध में जाने के किए छोड़ दी थी फ़िल्म की शूटिंग:
आपको बता दे नाना पाटेकर ने कारगिल के युद्ध के दौरान कुछ समय के लिए एक्टिंग से ब्रेक ले लिया था। इसके बाद वो लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट में बतौर कैप्टेन भर्ती हो गए थे।

आज नाना पाटेकर के निधन की खबर ने सिनेमा जगत को स्तब्ध कर दिया है. 75 साल की उम्र में दिग्गज एक्टर ने आखिरी सांस ली।

08/10/2026

'भारतीय वायुसेना दिवस' पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳 🫡 भारतीय वायु सेना—जिसकी उड़ान पर हर हिंदुस्तानी को गर्व है। 🇮🇳✈️
Jai Hind

जयप्रकाश नारायण जी की पुण्यतिथि पर उन्हे भावभीनी श्रद्धांजलि 🌹🙏• जन्म: 11 अक्टूबर 1902, सिताबदियारा, बलिया, बिहार (अब यू...
08/10/2026

जयप्रकाश नारायण जी की पुण्यतिथि पर उन्हे भावभीनी श्रद्धांजलि 🌹🙏
• जन्म: 11 अक्टूबर 1902, सिताबदियारा, बलिया, बिहार (अब यूपी) • शिक्षा: अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन से समाजशास्त्र में MA। वहीं मार्क्सवाद से प्रभावित हुए।
• 1929 में भारत लौटकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े • 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की • भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में अग्रणी भूमिका। हजारीबाग जेल से भागकर भूमिगत आंदोलन चलाया • "लोकनायक" की उपाधि उन्हें नेहरू जी ने दी थी।
• आज़ादी के बाद पार्टी राजनीति से दूर रहे और भूदान आंदोलन में विनोबा भावे के साथ काम किया • 1970 के दशक में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ संपूर्ण क्रांति का नारा दिया • 1975 में आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट किया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था • 1977 में उनके नेतृत्व में जनता पार्टी ने चुनाव जीता और देश में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
• निधन: 8 अक्टूबर 1979, पटना • भारत रत्न: 1999 में मरणोपरांत सम्मानित • त्याग, सादगी और जनसेवा के प्रतीक माने जाते हैं। बिहार में कई योजनाएं और संस्थानों का नाम उनके नाम पर है
जेपी का मानना था कि सत्ता जनता की सेवा के लिए है, शासन के लिए नहीं। इसलिए उन्हें "लोकनायक" कहा जाता है।

सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता, महान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकनायक एवं भारत रत्न श्रद्धेय जय प्रकाश नारायण जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण नमन।

राष्ट्र के प्रति आपकी अप्रतिम निष्ठा व समर्पण भाव सदैव स्मरणीय रहेगा।

साड़ी में दौड़ी, जूते भी नहीं थे... नौकरी के लिए विधवा मां ने 1600 मीटर की दौड़ 6 मिनट में की पूरी। झारखंड के रामगढ़ में...
07/10/2026

साड़ी में दौड़ी, जूते भी नहीं थे... नौकरी के लिए विधवा मां ने 1600 मीटर की दौड़ 6 मिनट में की पूरी।

झारखंड के रामगढ़ में चल रही होमगार्ड भर्ती की तैयारी में एक महिला ने पारंपरिक साड़ी और नंगे पांव दौड़कर फिजिकल टेस्ट दिया. इस जांबाज महिला का नाम कविता कुमारी है, जिन्होंने अपनी गरीबी और हालातों को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया. कविता के घर की माली हालत बेहद खराब है. उनके पास दौड़ने के लिए नंगे पैर के अलावा कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि ट्रैक सूट और जूते खरीदने के लिए पैसे नहीं थे. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. तपती धूप और जलती हुई जमीन पर वह बिना जूतों के, साड़ी पहने हुए ही मैदान में उतर गईं.

झारखंड की कविता महतो अपनी मेहनत और संघर्ष से लोगों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद कविता हर दिन सुबह करीब 4 बजे उठकर होमगार्ड बहाली की तैयारी के लिए दौड़ लगाती हैं। कई बार उन्हें नंगे पांव ही दौड़ते हुए देखा गया है।

कविता के पति दीपक महतो गुजरात में काम करते थे, लेकिन बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। इलाज के दौरान परिवार पर कर्ज भी हो गया। कविता के दो छोटे बच्चे और सास-ससुर की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। घर चलाने के लिए वह ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं।

सुबह दौड़ की तैयारी, फिर घर का काम और उसके बाद मजदूरी—इन तमाम मुश्किलों के बावजूद कविता ने अपने सपने को नहीं छोड़ा है।

कविता की कहानी सिर्फ संघर्ष की नहीं, बल्कि हिम्मत, मेहनत और उम्मीद की कहानी है। दुआ है कि उनकी मेहनत रंग लाए और वह होमगार्ड बहाली में सफल होकर अपने परिवार का सहारा बनें।

07/10/2026

विश्व का एकमात्र ऐसा क्रिकेट स्टेडियम
जो भगवान शिव का समर्पित है 🔱

07/10/2026

पता है सबसे बड़ी ताक़त क्या होती है
क्रोध के समय मौन, और समस्या के समय मुस्कान
ादेव 👏🚩

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