CPIML SIWAN

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Photos from CPIML SIWAN's post 15/04/2026

मध्य रात्रि में शहीद चंद्रशेखर की मूर्ति के गिरने की घटना की पुलिस-प्रशासन से जांच की मांग :-- माले
अज्ञात एफआईआर दर्ज
सीवान 15अप्रैल 2026:-- जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शहीद कॉमरेड चंद्र शेखर की मूर्ति गोपालगंज मोड़ पर स्थापित था, 14 अप्रैल को10.30 बजे की करीब सूचना मिली कि चंद्र शेखर की मूर्ति टूट कर गिरा हुआ है। मैंने साथियों के साथ जाकर देखा तों पाया कि मूर्ति टूट कर गिरा हुआ है। साथ ही एक केबल का तार भी टूट कर गिरा हुआ है, पुलिस-प्रशासन ने सी सी टी वी फुटेज देख कर कोई कार्यवाही करने की बात कही, सी सी टी वी फुटेज देखा गया तो सब कुछ दिख रहा है और उस समय तक का कोई तस्वीर दिख नहीं रहा है। इस घटना का मूल्यांकन करने से पता चलता है कि ओभर लोड ट्रक में केबल का तार फंस जाने के कारण भी मूर्ति टूट सकता है लेकिन सी सी टी वी फुटेज में घटना की तस्वीर नहीं दिखा रहा है। इससे दूसरी आशंका को भी बल मिलता है। यह पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल भी खड़ा कर रहा है।क्योंकि संधियों के राज में महापुरुषों की मूर्तियों पर लगातार हमले हो रहे हैं! हम पुलिस-प्रशासन से मांग करते हैं कि इस घटना का जल्द से जल्द जाँच कर वास्तविक स्थिति को जनता के बीच सामने लाये जाये। उक्त बातें भाकपा माले के जिला सचिव इंद्रजीत चौरसिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी। उन्होंने कहा कि मूर्ति को फ़िलहाल उसी जगह पर खड़ा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही आदमकद मूर्ति स्थापित की जायेगी।

06/04/2026

भाकपा माले के 5 वें जिला सम्मेलन ने हँसनाथ राम को जिला सचिव चुना। इससे पहले वे सिवान के जिला सचिव थे। छपरा में माले की मजबूती का लिया गया संकल्प। जिला के भीतर लाखों दलित गरीब परिवार ऐसे हैं जिनके पास जमीन का कोई मालिकाना कागज नहीं है जिस पर वे दशकों से बसे हैं। जिला के भीतर सामंती और नव धनाढ्यों की दबंगता है जिससे दलित वंचित कराह रहे हैं। वंचितों के विकास और दावेदारी के मुद्दे को मजबूती से आगे बढ़ाने का लिया गया संकल्प

04/04/2026

सिवान के भाकपा माले जिला सचिव इंद्रजीत चौरसिया बने और 49 जिला कमिटी सदस्य चुने गए।

03/04/2026

हमेशा मजदूरों पर ही मार, जरा शर्म करो सरकार

03/04/2026

बिहार में क्या हो रहा है

Photos from CPIML SIWAN's post 01/04/2026

सिवान जिला भाकपा माले ने अपने 13 वें जिला से सर्वसम्मति से कामरेड इंद्रजीत चौरसिया को अपना नया जिला सचिव चुना है। कामरेड हंसनाथ राम का स्थानांतरण छपरा जिला में पार्टी विस्तार के लिए राज्य कमिटी ने किया है!

Photos from CPIML SIWAN's post 01/04/2026

भाकपा माले सिवान का 13वां जिला सम्मेलन के अवसर पर प्रतिनिधि सत्र को संबोधित करते भाकपा-माले पोलित ब्यूरो सदस्य व अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव कॉ. धीरेंद्र झा..

31/03/2026

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) का 13वां जिला सम्मेलन सिवान में आयोजित किया

Photos from CPIML SIWAN's post 31/03/2026

का. चंद्रशेखर का बिंदुसार में स्मृति स्थल का अनावरण, युद्ध-विरोधी शांति मार्च

माले का13वां सिवान जिला सम्मेलन शुरू—बिहार को भाजपा द्वारा हड़पने की साजिश के खिलाफ संघर्ष का आह्वान

सिवान, 31 मार्च 2026

आज सिवान जिले के बिंदुसार में का. चंद्रशेखर और का. श्याम नारायण यादव के शहादत दिवस के अवसर पर एक व्यापक, प्रेरणादायी और संघर्षशील कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत दोनों शहीद नेताओं की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा से हुई, जिसमें उनके संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और जनपक्षधर राजनीति को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.

इस अवसर पर बिंदुसार में का. चंद्रशेखर के स्मृति स्थल का विधिवत अनावरण किया गया. यह स्मृति स्थल न केवल शहादत की याद को संजोने का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, साहस और जननिष्ठ राजनीति की प्रेरणा का केंद्र भी बनेगा. अनावरण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, छात्रों, युवाओं और विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिसने इसे एक जनउत्सव का रूप दे दिया.

स्मृति स्थल का अनावरण पोलित ब्यूरो सदस्य का. धीरेंद्र झा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा और पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेता सबा आफरीन ने संयुक्त रूप से किया. इसके साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेता अमरनाथ यादव ने झंडोतोलन किया. इस अवसर पर पूर्व विधायक सत्यदेव राम, नईमुद्दीन अंसारी, सम्मेलन के पर्यवेक्षक अभ्युदय, कुमार परवेज, अमरजीत कुशवाहा, सोहिला गुप्ता, इंद्रजीत चौरसिया, हंसनाथ राम, विकास यादव, जयशंकर पंडित सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

कार्यक्रम के अगले चरण में बिंदुसार से चंद्रशेखर गोलंबर तक एक विशाल युद्ध-विरोधी शांति मार्च निकाला गया. इस मार्च में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और विश्व स्तर पर बढ़ते युद्ध, साम्राज्यवादी हस्तक्षेप और मानवता पर मंडराते खतरों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की. “युद्ध नहीं, शांति चाहिए”, “साम्राज्यवाद मुर्दाबाद” और “लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. यह मार्च न केवल अंतरराष्ट्रीय शांति का संदेश था, बल्कि देश और बिहार में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का भी आह्वान था.

इसके बाद सिवान में डॉ. भीमराव आंबेडकर और का. चंद्रशेखर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण के साथ सम्मेलन के खुले सत्र की शुरुआत हुई. खुले सत्र में वक्ताओं ने वर्तमान राष्ट्रीय और बिहार की राजनीतिक-आर्थिक परिस्थितियों पर विस्तार से अपने विचार रखे.

अदिति मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि आज पूरी दुनिया युद्ध, अस्थिरता और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है. ऐसे समय में शांति, भाईचारे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नीतियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और इजरायल के सामने झुकने की प्रवृत्ति को दर्शाती हैं, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन पर पड़ रहा है. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और ऊर्जा संकट इसी का परिणाम हैं. उन्होंने कहा कि एपस्टिन फाइल से ध्यान हटाने के लिए यह युद्ध छेड़ा गया है. उन्होंने मोदी सरकार के जरिए हासिल सभी अधिकारों के कुचलने की बात की. उन्होंने कहा कि जेएनयू में कदम रखते ही हमें का. चंद्रशेखर की शहादत की जा मिलती है. आज उनके शहादत स्थल पर आकर हमें पूरी ऊर्जा मिल रही है.

उन्होंने शिक्षा के सवाल पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार की नीतियां छात्रों और शिक्षकों के हितों के खिलाफ हैं. लगातार बजट में कटौती और शिक्षा के निजीकरण से गरीब वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना कठिन होता जा रहा है. उन्होंने जेएनयू जैसे संस्थान को लगातार बर्बाद करने की चर्चा की. उन्होंने विगत दिनों जेएनयू में क्रैक डाउन की चर्चा की जब 14 लोगों को जेल भेज दिया गया था. उन्होंने छात्र-युवाओं से अपील की कि वे इन नीतियों के खिलाफ संगठित संघर्ष को तेज करें.

छात्र नेता सबा आफरीन ने कहा कि का. चंद्रशेखर और श्याम नारायण यादव जैसे शहीदों की विरासत हमें अन्याय, शोषण और दमन के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती है. उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि छात्र-युवा वर्ग इन मूल्यों को आत्मसात करते हुए एक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन खड़ा करे, जो देश को समानता, न्याय और भाईचारे के रास्ते पर आगे ले जाए.

मुख्य वक्ता धीरेंद्र झा ने कहा कि आज देश में जो राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है, वह लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों के लिए गंभीर खतरा है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की सरकार कॉरपोरेट हितों और विदेशी शक्तियों के दबाव में काम कर रही है. अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ती नजदीकियों ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को कमजोर किया है, जिसका खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण इस इलाके के लाखों लोग खाड़ी में फंसे हुए हैं, पूरे देश में गैस की किल्लत है और अफरा तफरी मची हुई है. लाखों लोग की नौकरियां चली गईं.

उन्होंने बिहार की राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में सत्ता संतुलन को तोड़कर भाजपा पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश में है, जो जनादेश की भावना के खिलाफ है. उन्होंने चेतावनी दी कि बिहार की जागरूक जनता इस तरह के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगी और लोकतांत्रिक तरीके से उसका मजबूती से प्रतिरोध करेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि का. चंदू नई पीढ़ी के नायक थे. उन्होंने सिवान में गरीबों दलितों के लड़ाई में शहादत दी. यह विरासत हम आज़ादी के आंदोलन में देख रहे थे और वह विरासत हम चंदू में देखते हैं.

पूर्व विधायक सत्यदेव राम ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में आज गरीबों, दलितों और वंचित तबकों पर हमले तेज हो गए हैं. उन्होंने कहा कि सत्ता के संरक्षण में दमन और अन्याय की घटनाएं बढ़ रही हैं, और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल आम जनता की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समय डरने का नहीं, बल्कि संगठित होकर संघर्ष करने का है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे गांव-गांव में जाकर लोगों को जागरूक करें और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत जनआंदोलन खड़ा करें.

अमरजीत कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों, मजदूरों और मेहनतकश तबकों की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है. उन्होंने कहा कि एक तरफ महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ गरीबों को उनकी जमीन और आजीविका से बेदखल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ आर्थिक सवालों की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है. उन्होंने सम्मेलन के माध्यम से एक व्यापक एकजुटता कायम करने और संघर्ष को नई धार देने का आह्वान किया.

वरिष्ठ नेता अमरनाथ यादव ने अपने संबोधन में बिहार के जमीनी हालात पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आज पूरे राज्य में बुलडोजर राजनीति के जरिए गरीबों और वंचितों को उनकी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है. खासकर भूदान की जमीनों पर बसे लोगों को उजाड़ने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. यह न केवल सामाजिक अन्याय है, बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ है.

उन्होंने कहा कि सिवान जिले में पहले भी संघर्ष के जरिए गरीबों को बसाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने का काम किया गया है, और आज एक बार फिर उसी तरह के व्यापक और संगठित संघर्ष की आवश्यकता है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित करें और उनके हक की लड़ाई को तेज करें.

वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि बिहार आज कई स्तरों पर गहरे संकट का सामना कर रहा है—बढ़ती बेरोजगारी, मजबूरन पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाल स्थिति, किसानों की बदहाली और गरीबों के विस्थापन के सवाल लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. इन परिस्थितियों में एक व्यापक, संगठित और निरंतर जनसंघर्ष ही विकल्प है.

वक्ताओं ने एकजुट होकर शहीदों के सपनों को साकार करने और सामाजिक न्याय पर आधारित एक लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि का. चंद्रशेखर और का. श्याम नारायण यादव के दिखाए रास्ते पर चलते हुए बिहार और देश में एक न्यायपूर्ण, समतामूलक और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण के लिए संघर्ष को और तेज किया जाएगा.

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