16/02/2026
और कितने अच्छे दिन चाहिए मित्रो ।
हमारा प्यारा गांव कौड़ीया फेसबुक पेज ?
16/02/2026
और कितने अच्छे दिन चाहिए मित्रो ।
01/01/2026
13/02/2025
अगर आप #मलमलिया के रहने वाले हैं या कभी आप मलमलिया गए हैं खाने-पीने के शौकीन है तो इस मटन हाउस के बारे में आपने जरूर सुना होगा इस दुकान का मटन सिर्फ मलमलिया ही नहीं अगल-बगल के कई इलाकों में खूब फेमस है₹170 में भरपेट चावल और तीन पीस मटन इस दुकान में मिलता है प्रतिदिन 50 किलो से ज्यादा मटन की खपत है कई राउंड यहां मटन तैयार होता है पहले आओ पहले पाओ के आधार पर ग्राहकों को खिलाया जाता है हालांकि दुकान फुटपाथी है पर टेस्ट ने ऐसा जादू फैलाया है कि छपरा सिवान गोपालगंज और पटना तक से लोग आ जाते चावल की क्वालिटी भी काफी बढ़िया रहती है।
16/06/2024
मुखिया और मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए एक छोटा सा कोशिश करता एक अबोध बालक😁
नल में जल की योजना😂😂😁
16/06/2024
कितना सुंदर दृश्य है पीपल के पेड़ के नीचे बिज़नेस भी हो रहा है और पेड़ की छाव भी मिल रही है 😊
15/03/2024
#गांव_कनेक्शन
#किसान की #संपत्ति इन्हीं दो चीजों में कैद होती है हमारे छपरा सीवान गोपालगंज में पहली तस्वीर को #बेढी बोलते हैं और दूसरे को #कोठी।बेढी बांस का बना एक गोल नमा सर्किल होता है जिसे ऊपर फूस के ढक्कन जिसे आम बोलचाल की भाषा में खोप बोलते हैं से ढका जाता है। गेहूं की फसल की कटाई होने के बाद उसका भूसा इसमें संग्रहित करके रखा जाता है जो सालों भर सुरक्षित रहता है इसी के अंदर अनाज भी रखे जाते हैं जिसमे घुन नहीं लगता है। किसान के लिए बेढी काफी महत्व रखता है जिसमें कई क्विंटल अनाज सुरक्षित रहते हैं पशुओं का चारा भी सुरक्षित रहता है। दूसरी जो आकृति है उसे वही लोग पहचानते होंगे जिनका कनेक्शन गांव से होगा और जो पिछले दो-तीन दशक पहले ऐसी चीजों को देख चुके होंगे मिट्टी के इस आकृति को कोठी बोलते हैं इसमें चावल गेहूं दाल सुरक्षित रखा जाता है शायद ही पहले कोई ऐसा घर था जिसमें मिट्टी का कोठी नहीं होता था।बेढी को बिहार में कई क्षेत्रों में कई नाम से जाना जाता है मध्य बिहार में सीमेंटेड बेढी आज भी आपको देखने को मिल जाएंगे पर उत्तर बिहार में बांस के बने बेढी आपको हर किसान के घर के देखने को मिल जाएंगे कोठी का प्रचलन अब सीमेंट कंक्रीट के मकान का चलन बढ़ने के साथ समाप्त होने लगा पक्के मकान में मिट्टी के कोठी को रखना लोग अपने शान के खिलाफ समझते हैं अब शायद ही कहीं आपको कोठी देखने को मिले। आपको लग रहा होगा कि आज इन दोनों की चर्चा क्यों क्योंकि यह दोनों किसान के खून पसीने की कमाई को सुरक्षित रहने रखने वाले थे। समय के साथ बहुत चीज बदलने लगी खान-पान पकवान रहन-सहन रिश्ते नाते संवेदनाएं भी पर नहीं बदला है तो मानव मन आज भी सुकून की तलाश में अपनी जड़ों की तरफ लौटना चाहता है और ऐसे में ऐसी चीज है जरूर याद आती है।
03/01/2024
कौआ हकनी ।
वह कौआ हकनी थी । कौओं को भगाया (हांका) करती थी । उसे यह काम खुद राजा ने सौंपा था । कभी वह राजा की अंक शायिनी हुआ करती थी । जी हाँ , राजा की पटरानी । इस पटरानी के दुर्दिन तब शुरु हो गये थे जब राजा मगह देश से एक और रानी लाए थे । रानी रुपमती के रुप लावण्य के आगे पटरानी फीकी पड़ गयी थीं । रुपमती को भी उनका पटरानी होना फुटली आँखों भी नहीं सुहाया था । उसकी ईर्ष्या तब और बढ़ गयी जब उसे पता चला कि पटरानी हमल से है । इसका मतलब कि पटरानी का हीं बालक राजा बनेगा । क्योंकि बड़ा बेटा हीं राज्य का उत्तराधिकारी हुआ करता था ।
रानी रुपमती प्रत्यक्षतः तो पटरानी की खूब देख भाल किया करती थी , पर उसके दिमाग में एक भयानक षड़यंत्र चल रहा था । वह किसी भी तरह से पटरानी के गर्भ को नष्ट करना चाहती थी । वह पूरे रनिवास पर अपना कब्जा जमाए हुई थी । राज पुरोहित को भी उसने अपने पक्ष में कर रखा था । राज वैद्य भी उसकी हीं भाषा हीं बोलते थे । राज वैद्य से पटरानी को धीमा जहर दिलवाना शुरु किया था ताकि जच्चा व बच्चा दोनों नष्ट हो जाएँ । लेकिन जच्चा व बच्चा आखिर तक सही सलामत हीं रहे थे ।
रुपमती ने गर्भ नष्ट करने के लिए पटरानी के आने जाने के रास्ते में तेल भी गिरवा दिया था । पटरानी फिसल कर गिरीं तो जरुर । उन्हें चोट भी आई , लेकिन उनका गर्भ सुरक्षित रहा । रुपमती गर्भ गिराने में सफल नहीं हुई । नियत समय पर पटरानी को एक बेटा व एक बेटी पैदा हुए थे । पटरानी का दर्द से हाल बेहाल था । वे बेहोश थीं । उन्हें पता हीं नहीं चला कि उन्होंने जुड़वा बच्चों को जना है । रानी रुपमती ने उन बच्चों को गायब करवा दिया । अफवाह फैला दी गयी कि पटरानी ने एक ईंट और एक पत्थर को जन्म दिया है ।
राज पुरोहित ने इस घटना को बड़ा हीं अशुभ माना था । उसका मानना था कि राज्य पर कभी भी बड़ी बिपत्ती आ सकती है । उसने राजा से कहकर पटरानी को रनिवास से निकलवा दिया । उन्हें कौआ हाकने का काम मिला था । वह दिन भर भाग भागकर शाही बाग से कौए उड़ाया करतीं थीं । उन्हें तीन बक्त का भोजन शाही रसोई से मिल जाया करती थी । सब उन्हें कौआ हकनी के नाम से बुलाने लगे थे । शाही बाग में हीं उन्हें एक कमरा रहने के लिए दे दिया गया था ।
रानी रुपमती ने उन बच्चों को जान से मरवा दिया था । मारकर उनकी लाश शाही बाग में गड़वा दिया था । जहाँ लाश गाड़ी गयी थी , वहाँ एक मोला और एक केतकी के पौधे उग आए थे । मोला भाई था । केतकी बहन थी । भाई बहन आपस में खूब बातें किया करते थे । जब हवा चलती तो दोनों एक दूसरे को छूकर अठखेलियाँ किया करते थे । दोनों भाई बहन अपनी माँ की इस हालत से बहुत दुःखी हुआ करते थे । जब पूर्व पटरानी उनके पास से गुजरतीं तो भाई बहन अपनी माँ को देखकर बहुत हीं पुलकित हो उठते थे ।
केतकी में एक दिन फूल आए तो सारा बाग मह मह कर उठा । एक दिन राजा बाग में सुबह सुबह टहल रहे थे । उन्हें केतकी के फूल बड़े सुहाने लगे । उनकी खूश्बू से उनका मन प्रफुल्लित हो उठा था । वे फूल को तोड़ने के लिए केतकी की ओर जब बढ़ने लगे तो केतकी ने अपने भाई मोला से कहा था -
सुनबे तऽ सुनु भइया मोलवा रे ना !
ऐ भइया राजा पापी अइले फूल लोर्हनवा रे ना !
भाइ ने कहा था -
सुनबे तऽ सुनु बहिना केतकी रे ना !
ऐ बहिनी डाढ़े पाते खिली जो आकाशवा रे ना !
भाई की बात मानकर बहन अपनी डालियों को आकाश की ऊँचाइयों की तरफ ले गयी । राजा फूल नहीं तोड़ पाए थे । उन्होंने माली से कहा । माली के हाथ भी फूलों तक नहीं पहुँच पाये थे । सीढ़ी मंगवाई गयी । सीढ़ी छोटी पड़ गयी । कई बड़ी सीढ़ियाँ मंगवायी गयी । सीढ़ियां छोटी पड़ती रहीं और बहन केतकी ऊपर उठती गयी । कौआ हकनी भी वहीं थी । उसने भी कोशिश करने की ठानी । कौआ हकनी भी फूल तोड़ने के लिए आगे बढ़ी थी। केतकी ने फिर भाई से कहा था -
सुनबे तऽ सुनु भइया मोलवा रे ना !
ऐ भइया अम्मा सोहागिन अइली फूल लोर्हनवा रे ना !
भाइ ने कहा था -
सुनबे तऽ सुनु बहिना केतकी रे ना !
ऐ बहिनी डाढ़े पाते सोहरि जो जमीनिया रे ना !
भाइ के कहने पर केतकी अपनी डाली को नीचे झुकाकर जमीन पर ले आई । कौआ हकनी ने फूल तोड़ लिया और राजा को दे दिया । राजा इस चमत्कार से आश्चर्यचकित रह गये । तभी राजा के सामने एक बालक और बालिका प्रकट हुए । उन्होंने राजा को अपना परिचय उनके पुत्र और पुत्री के रुप में दिया था । राजा अपनी संतान से मिलकर बहुत खुश हुए थे । उनके सामने रनिवास में हुए षड़यंत्र का पर्दाफाश हो चुका था । राजा ने रुपमती को मृत्यु दण्ड दिया था । राज वैद्य और राज पुरोहित को देश निकाला मिला था ।कौआ हकनी को फिर से पटरानी का दर्जा मिला । राजा पटरानी और अपनी संतानों के साथ सुख पुर्वक रहने लगे ।
कथा गईल बन में ।
सोचऽ अपना मन में ।
02/01/2024
खैरवा बाजार कौन कौन दिन लगेला केहू के मालूम बा 🥺🤫🤔
02/01/2024
हमारे बुजर्ग हम से वैज्ञानिक रूप से बहुत आगे थे। थक हार कर वापिश उनकी ही राह पर वापिश आना पड़ रहा है।
1. मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना।
2. अंगूठाछाप से दस्तखतों (Signatures) पर और फिर अंगूठाछाप (Thumb Scanning) पर आ जाना।
3. फटे हुए सादा कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना।
4. सूती से टैरीलीन, टैरीकॉट और फिर वापस सूती पर आ जाना ।
5. जयादा मशक़्क़त वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर IIM MBA करके आर्गेनिक खेती पर पसीने बहाना।
6. क़ुदरती से प्रोसेसफ़ूड (Canned Food & packed juices) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों पर आ जाना।
7. पुरानी और सादा चीज़ें इस्तेमाल ना करके ब्रांडेड (Branded) पर और फिर आखिरकार जी भर जाने पर पुरानी (Antiques) पर उतरना।
8. बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के नाम पर मिट्टी से खिलाना....
9. गाँव, जंगल, से डिस्को पब और चकाचौंध की और भागती हुई दुनियाँ की और से फिर मन की शाँति एवं स्वास्थ के लिये शहर से जँगल गाँव की ओर आना।
इससे ये निष्कर्ष निकलता है कि टेक्नॉलॉजी ने जो दिया उससे बेहतर तो प्रकृति ने पहले से दे रखा था।
🚩जय हिंद जय भारत🚩
18/10/2023
गांव की सादगी 💕