09/07/2025
🌿 कृतज्ञता का भाव 🌿
एक जीवनरक्षक के चरणों में समर्पित शब्द
✍🏻 लेखक: कमांडो आशीष दहिया
जीवन में कई मोड़ ऐसे आते हैं जहाँ इंसान की शक्ति, समझ और साहस भी जवाब देने लगते हैं। जब हर ओर से उम्मीदें टूटने लगती हैं, तब ईश्वर स्वयं किसी न किसी रूप में हमारे सामने प्रकट होता है — किसी इंसान के माध्यम से। मेरे जीवन में, मेरे पूरे परिवार के जीवन में, ईश्वर ने अपना रूप धारण किया – डॉ. जयवीर कौशिक जी के रूप में।
एक कठिन यात्रा की शुरुआत
कई वर्ष पूर्व मेरी पत्नि Parul Dahiya एक गंभीर दुर्घटना की शिकार हुईं। चोट ऐसी थी कि रीढ़ की हड्डी से लेकर कमर तक गंभीर क्षति हुई। हमने देश के कई प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों में दिखाया। सबका उत्तर एक ही था –
"सर्जरी आवश्यक है। लेकिन हम कोई गारंटी नहीं दे सकते। यदि सबकुछ सही भी रहा तो भी ठीक होने में वर्षों लग सकते हैं, और यदि नहीं तो पूरी उम्र बिस्तर पर बीत सकती है।"
उस समय हमारी उम्र कम थी, बच्चे छोटे थे, जिम्मेदारियाँ भारी थीं — और पत्नी की आँखों में बस एक ही सवाल था:
“क्या मैं दोबारा चल पाऊँगी?”
अंधेरे में आशा की किरण
ऐसे समय में, सोशल मीडिया के माध्यम से मैंने डॉ. जयवीर कौशिक DrJaibir Singh Kaushik का नाम सुना। उन्हें फोन लगाया — और पहली बार जब उनकी आवाज़ सुनी, तो वह एक डॉक्टर की नहीं, एक सेवाभावी संत की सी प्रतीत हुई।
उनकी बातें आत्मविश्वास से भरी थीं, लेकिन उनमें कोई दिखावा नहीं था। उन्होंने एक बार भी डराने या जल्दबाज़ी की बात नहीं की — बल्कि उन्होंने जीवन के प्रति श्रद्धा और सेवा के प्रति समर्पण की मिसाल रखी।
सबसे अद्भुत बात यह रही कि वह लगभग 80 किलोमीटर दूर से खुद हमारे घर आए।
उन्होंने न केवल मेडिकल दृष्टिकोण से इलाज शुरू किया, बल्कि हमें मानसिक रूप से भी संबल दिया। उनकी थेरेपी, आयुर्वेदिक उपाय, आहार में बदलाव और सतत संपर्क से मेरी पत्नी में धीरे-धीरे सुधार होने लगा।
डॉ. साहब कई बार आते, निःस्वार्थ सेवा करते, नई ऊर्जा देते — और कुछ महीनों के भीतर ही मेरी पत्नी पूर्णतः स्वस्थ हो गईं।
जब परीक्षा और कठिन हुई
हमारी खुशी ज़्यादा समय तक स्थिर नहीं रह पाई। कुछ ही महीनों बाद, एक और दुर्घटना हुई — और इस बार पहले से भी अधिक घातक।
मेरी पत्नी फिर बुरी तरह घायल हो गईं।
मन तो डगमगाने ही लगा था, लेकिन डॉ. साहब फिर आए — न कोई शिकायत, न कोई देरी।
उनका चेहरा जैसे कह रहा था, “हम फिर से लड़ेंगे और जीतेंगे।”
फिर से थेरेपी, उपचार, मानसिक प्रोत्साहन — और फिर वही चमत्कार।
एक बार फिर मेरी पत्नी स्वस्थ हो गईं।
सेवा की श्रंखला
समस्या केवल मेरे घर तक सीमित नहीं रही। धीरे-धीरे, जब मुझे डॉ. साहब की शक्ति पर विश्वास हो गया, तो मैंने अपने मित्रों और परिचितों को भी उनके पास भेजना शुरू किया।
मेरी पुरानी मित्र Sweat n Shine Fitness Studio Seetu Rathi स्वीटी राठी, जो एक गंभीर हॉर्मोनल समस्या और मोटापे से जूझ रही थीं — वजन 118 किलो, हाइट मात्र 5 फीट 2-3 इंच — एकदम निराश थीं।
जब उन्हें डॉ. साहब से मिलवाया, तो उन्होंने मुस्कराकर कहा,
"टाइगर हो तुम, हार मानना तुम्हारी फितरत नहीं।"
और आज वही स्वीटी राठी गुरुग्राम में एक फिटनेस ट्रेनर हैं, दूसरों को भी स्वस्थ जीवन की प्रेरणा दे रही हैं।
मेरे बेटे को डॉक्टरों ने एक गंभीर समस्या में ऑपरेशन की सलाह दी। लेकिन डॉ. साहब ने उसे बचा लिया — केवल प्राकृतिक चिकित्सा और जीवनशैली परिवर्तन से।
मेरी बेटी को अपेंडिक्स हुआ — डॉ. साहब की सलाह से वह पहले संकट से बची। हालांकि कुछ समय बाद सर्जरी आवश्यक हो गई, लेकिन उस समय का राहतपूर्ण उपचार हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा।
मेरे पिताजी गंभीर रूप से बीमार हो गए — ICU तक मामला पहुँच गया। यह देखकर मेरी पत्नी फिर से अवसाद में चली गईं।
डॉ. साहब आए — पत्नी का इलाज किया, पिताजी के लिए विशेष औषधियाँ बनाईं।
आज, दोनों स्वस्थ हैं — यह ईश्वर और डॉ. जयवीर जी की कृपा से ही संभव हुआ।
कोरोना काल में एक प्रकाशपुंज
जब पूरा देश कोरोना महामारी के भय में जी रहा था, हर ओर भय और भ्रम का माहौल था —
मैं रोज़ाना 6–7 लोगों को डॉ. जयवीर जी का नंबर देता रहा।
लोग उनसे संपर्क करते, इलाज पाते, और ठीक होते गए।
धीरे-धीरे मेरे आसपास के सैकड़ों लोग उनके संपर्क में आए — और हर एक व्यक्ति ने एक ही बात कही:
“हमने अपने जीवन में ऐसा व्यक्ति पहली बार देखा है। यह कोई साधारण इंसान नहीं — साक्षात भगवान का अवतार हैं।”
मन, वचन और कर्म से सेवा
डॉ. जयवीर कौशिक जी का ज्ञान केवल आयुर्वेद, फिजियोथेरेपी और नैदानिक विधियों में नहीं है —
उनका सबसे बड़ा प्रभाव मन पर होता है।
वह रोगी के शरीर के साथ-साथ उसकी आत्मा को भी उपचार देते हैं।
उनका चेहरा, उनका बोलना, उनकी ऊर्जा — सब कुछ प्रेरणा का स्रोत है।
वह उपचार नहीं करते — वह जीवन देते हैं।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं...
मैं सोचता हूं कि यदि उस समय मैंने डॉ. साहब से संपर्क न किया होता, तो शायद मेरा परिवार इस रूप में आज साथ न होता।
हमने जितने भी कष्ट झेले, उनमें उनका साथ ईश्वर के वरदान जैसा रहा।
डॉ. साहब आज केवल मेरे चिकित्सक नहीं हैं — वह मेरे जीवन-मार्गदर्शक, मेरे परिवार के अभिभावक, और एक परम सखा हैं।
🙏 अंत में…
मैं शब्दों में नहीं बाँध सकता उस सेवा को, जो उन्होंने हमें दी।
मेरा सिर उनके चरणों में झुकता है।
मैं हृदय से कृतज्ञ हूं।
मेरे जीवन में जो उजाला है, जो मुस्कराहट है, जो आशा है —
उसमें डॉ. जयवीर जी की सेवा की लौ जल रही है।
उनके लिए केवल एक ही शब्द बार-बार मन में आता है:
"धन्य हैं वे, जो दूसरों के लिए जीते हैं। और सौभाग्यशाली हूं मैं, कि मैं ऐसे व्यक्ति को जानता हूं।"
किसी को स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो डॉक्टर जयवीर जी से या स्वीटी राठी से कोई परामर्श लेना हो फोन नंबर दे रहा हूं इन पर भी संपर्क कर सकते हैं।
डॉक्टर जयवीर कौशिक 7393050000
स्वीटी राठी 9205504114
✍🏻 लेखक: कमांडो आशीष दहिया
सेवा के प्रतीक को समर्पित एक सच्चा संस्मरण