Commando Ashish Dahiya

Commando Ashish Dahiya

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169 times blood donation, Awarded by Governer of Haryana, LG Delhi, CP Delhi police and Lok sabha speaker.

14/09/2025

"पितृ पक्ष की पुण्य घड़ियों में, जब हम अपने पूर्वजों को श्रद्धा अर्पित करते हैं, मैंने एक अंजान पिता—जो कैंसर से संघर्ष कर रहे हैं—के लिए अपना 166वां रक्तदान किया। यह छोटा सा प्रयास इस प्रार्थना के साथ किया है कि वह पिता अपने बच्चों के साथ अधिक समय बिता सकें और उनके जीवन में आशा की किरण बनी रहे।

इस पावन क्षण में मेरे साथ खड़ी हैं मेरी जीवनसंगिनी, श्रीमती पारुल दहिया।
पारुल दहिया समाजसेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने अब तक 18 बार रक्तदान किया है, कैंसर पीड़ितों के लिए दो बार अपने सिर के बाल दान किए हैं, पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षारोपण और जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है तथा योग और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए वर्षों से निःशुल्क सेवा दे रही हैं। समाज के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उन्हें हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री, माननीय राज्यपाल, माननीय दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष और अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

उनकी यह निःस्वार्थ सेवा हमें यह सिखाती है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य दूसरों के लिए जीना ही है।"

Photos from Commando Ashish Dahiya's post 30/08/2025

यज्ञ, भंडारा और रक्तदान शिविर गांव खांडा जिला सोनीपत
57 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया।

13/08/2025

हम सफ़र

12/07/2025

मुझे यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि इंटरनेशनल हरियाणा एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा द्वितीय अंतरराष्ट्रीय चूरमा दिवस का आयोजन 13 जुलाई 2025 को यूनाइटेड किंगडम में किया जा रहा है। यह गर्व का विषय है कि इस आयोजन का संयोजन मेरे प्रिय मित्र काउंसिलर Cllr Rohit Ahlawat द्वारा किया जा रहा है।

हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक स्वादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अत्यंत सराहनीय प्रयास है।

मैं इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के लिए अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित करता हूँ।

सादर,
कमांडो आशीष दहिया

09/07/2025

🌿 कृतज्ञता का भाव 🌿

एक जीवनरक्षक के चरणों में समर्पित शब्द
✍🏻 लेखक: कमांडो आशीष दहिया

जीवन में कई मोड़ ऐसे आते हैं जहाँ इंसान की शक्ति, समझ और साहस भी जवाब देने लगते हैं। जब हर ओर से उम्मीदें टूटने लगती हैं, तब ईश्वर स्वयं किसी न किसी रूप में हमारे सामने प्रकट होता है — किसी इंसान के माध्यम से। मेरे जीवन में, मेरे पूरे परिवार के जीवन में, ईश्वर ने अपना रूप धारण किया – डॉ. जयवीर कौशिक जी के रूप में।

एक कठिन यात्रा की शुरुआत
कई वर्ष पूर्व मेरी पत्नि Parul Dahiya एक गंभीर दुर्घटना की शिकार हुईं। चोट ऐसी थी कि रीढ़ की हड्डी से लेकर कमर तक गंभीर क्षति हुई। हमने देश के कई प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों में दिखाया। सबका उत्तर एक ही था –
"सर्जरी आवश्यक है। लेकिन हम कोई गारंटी नहीं दे सकते। यदि सबकुछ सही भी रहा तो भी ठीक होने में वर्षों लग सकते हैं, और यदि नहीं तो पूरी उम्र बिस्तर पर बीत सकती है।"

उस समय हमारी उम्र कम थी, बच्चे छोटे थे, जिम्मेदारियाँ भारी थीं — और पत्नी की आँखों में बस एक ही सवाल था:
“क्या मैं दोबारा चल पाऊँगी?”

अंधेरे में आशा की किरण
ऐसे समय में, सोशल मीडिया के माध्यम से मैंने डॉ. जयवीर कौशिक DrJaibir Singh Kaushik का नाम सुना। उन्हें फोन लगाया — और पहली बार जब उनकी आवाज़ सुनी, तो वह एक डॉक्टर की नहीं, एक सेवाभावी संत की सी प्रतीत हुई।

उनकी बातें आत्मविश्वास से भरी थीं, लेकिन उनमें कोई दिखावा नहीं था। उन्होंने एक बार भी डराने या जल्दबाज़ी की बात नहीं की — बल्कि उन्होंने जीवन के प्रति श्रद्धा और सेवा के प्रति समर्पण की मिसाल रखी।

सबसे अद्भुत बात यह रही कि वह लगभग 80 किलोमीटर दूर से खुद हमारे घर आए।
उन्होंने न केवल मेडिकल दृष्टिकोण से इलाज शुरू किया, बल्कि हमें मानसिक रूप से भी संबल दिया। उनकी थेरेपी, आयुर्वेदिक उपाय, आहार में बदलाव और सतत संपर्क से मेरी पत्नी में धीरे-धीरे सुधार होने लगा।

डॉ. साहब कई बार आते, निःस्वार्थ सेवा करते, नई ऊर्जा देते — और कुछ महीनों के भीतर ही मेरी पत्नी पूर्णतः स्वस्थ हो गईं।

जब परीक्षा और कठिन हुई
हमारी खुशी ज़्यादा समय तक स्थिर नहीं रह पाई। कुछ ही महीनों बाद, एक और दुर्घटना हुई — और इस बार पहले से भी अधिक घातक।
मेरी पत्नी फिर बुरी तरह घायल हो गईं।

मन तो डगमगाने ही लगा था, लेकिन डॉ. साहब फिर आए — न कोई शिकायत, न कोई देरी।
उनका चेहरा जैसे कह रहा था, “हम फिर से लड़ेंगे और जीतेंगे।”
फिर से थेरेपी, उपचार, मानसिक प्रोत्साहन — और फिर वही चमत्कार।
एक बार फिर मेरी पत्नी स्वस्थ हो गईं।

सेवा की श्रंखला
समस्या केवल मेरे घर तक सीमित नहीं रही। धीरे-धीरे, जब मुझे डॉ. साहब की शक्ति पर विश्वास हो गया, तो मैंने अपने मित्रों और परिचितों को भी उनके पास भेजना शुरू किया।

मेरी पुरानी मित्र Sweat n Shine Fitness Studio Seetu Rathi स्वीटी राठी, जो एक गंभीर हॉर्मोनल समस्या और मोटापे से जूझ रही थीं — वजन 118 किलो, हाइट मात्र 5 फीट 2-3 इंच — एकदम निराश थीं।
जब उन्हें डॉ. साहब से मिलवाया, तो उन्होंने मुस्कराकर कहा,
"टाइगर हो तुम, हार मानना तुम्हारी फितरत नहीं।"
और आज वही स्वीटी राठी गुरुग्राम में एक फिटनेस ट्रेनर हैं, दूसरों को भी स्वस्थ जीवन की प्रेरणा दे रही हैं।

मेरे बेटे को डॉक्टरों ने एक गंभीर समस्या में ऑपरेशन की सलाह दी। लेकिन डॉ. साहब ने उसे बचा लिया — केवल प्राकृतिक चिकित्सा और जीवनशैली परिवर्तन से।

मेरी बेटी को अपेंडिक्स हुआ — डॉ. साहब की सलाह से वह पहले संकट से बची। हालांकि कुछ समय बाद सर्जरी आवश्यक हो गई, लेकिन उस समय का राहतपूर्ण उपचार हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा।

मेरे पिताजी गंभीर रूप से बीमार हो गए — ICU तक मामला पहुँच गया। यह देखकर मेरी पत्नी फिर से अवसाद में चली गईं।
डॉ. साहब आए — पत्नी का इलाज किया, पिताजी के लिए विशेष औषधियाँ बनाईं।
आज, दोनों स्वस्थ हैं — यह ईश्वर और डॉ. जयवीर जी की कृपा से ही संभव हुआ।

कोरोना काल में एक प्रकाशपुंज

जब पूरा देश कोरोना महामारी के भय में जी रहा था, हर ओर भय और भ्रम का माहौल था —
मैं रोज़ाना 6–7 लोगों को डॉ. जयवीर जी का नंबर देता रहा।
लोग उनसे संपर्क करते, इलाज पाते, और ठीक होते गए।

धीरे-धीरे मेरे आसपास के सैकड़ों लोग उनके संपर्क में आए — और हर एक व्यक्ति ने एक ही बात कही:

“हमने अपने जीवन में ऐसा व्यक्ति पहली बार देखा है। यह कोई साधारण इंसान नहीं — साक्षात भगवान का अवतार हैं।”

मन, वचन और कर्म से सेवा
डॉ. जयवीर कौशिक जी का ज्ञान केवल आयुर्वेद, फिजियोथेरेपी और नैदानिक विधियों में नहीं है —
उनका सबसे बड़ा प्रभाव मन पर होता है।

वह रोगी के शरीर के साथ-साथ उसकी आत्मा को भी उपचार देते हैं।
उनका चेहरा, उनका बोलना, उनकी ऊर्जा — सब कुछ प्रेरणा का स्रोत है।

वह उपचार नहीं करते — वह जीवन देते हैं।

आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं...
मैं सोचता हूं कि यदि उस समय मैंने डॉ. साहब से संपर्क न किया होता, तो शायद मेरा परिवार इस रूप में आज साथ न होता।
हमने जितने भी कष्ट झेले, उनमें उनका साथ ईश्वर के वरदान जैसा रहा।

डॉ. साहब आज केवल मेरे चिकित्सक नहीं हैं — वह मेरे जीवन-मार्गदर्शक, मेरे परिवार के अभिभावक, और एक परम सखा हैं।

🙏 अंत में…
मैं शब्दों में नहीं बाँध सकता उस सेवा को, जो उन्होंने हमें दी।
मेरा सिर उनके चरणों में झुकता है।
मैं हृदय से कृतज्ञ हूं।

मेरे जीवन में जो उजाला है, जो मुस्कराहट है, जो आशा है —
उसमें डॉ. जयवीर जी की सेवा की लौ जल रही है।
उनके लिए केवल एक ही शब्द बार-बार मन में आता है:
"धन्य हैं वे, जो दूसरों के लिए जीते हैं। और सौभाग्यशाली हूं मैं, कि मैं ऐसे व्यक्ति को जानता हूं।"

किसी को स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या हो डॉक्टर जयवीर जी से या स्वीटी राठी से कोई परामर्श लेना हो फोन नंबर दे रहा हूं इन पर भी संपर्क कर सकते हैं।
डॉक्टर जयवीर कौशिक 7393050000
स्वीटी राठी 9205504114

✍🏻 लेखक: कमांडो आशीष दहिया
सेवा के प्रतीक को समर्पित एक सच्चा संस्मरण

06/07/2025

📢 महत्वपूर्ण सूचना – पर्स चोरी हो गया है
आज दिनांक 6 जुलाई 2025 को शाम 5:10 बजे सोनीपत से चंडीगढ़ के लिए चली बस में हमारे मित्र की पत्नि का पर्स चोरी हो गया है।

उस पर्स में कुछ अत्यंत जरूरी दस्तावेज थे, जिनमें शामिल हैं:
🔹 मंजू पत्नी कृष्ण शर्मा (पिता का नाम: दलबीर शर्मा) के पहचान पत्र
🔹बेटे रूद्राक्ष के नाम की पहचान से संबंधित दस्तावेज
🔹 अन्य आवश्यक कागजात

👉 यदि किसी सज्जन को यह पर्स या दस्तावेज मिलते हैं, तो कृपया तुरंत नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क करें।
💰 संपर्क करने वाले को 10,000 रुपये का नगद इनाम दिया जाएगा।

📞 कृष्ण कौशिक
📱 9034558728

आप सभी से निवेदन है कि यह संदेश अपने सभी सोशल मीडिया ग्रुप्स, व्हाट्सएप, फेसबुक आदि पर अधिक से अधिक शेयर करें।
आपकी एक छोटी सी मदद हमारे लिए बहुत बड़ा सहारा बन सकती है। 🙏🙏

धन्यवाद।
— कृष्ण कौशिक, गन्नौर

09/06/2025

आरती अहलावत
बहुत साल पहले जब मैं इंडिया गेट पर कमांडो ड्यूटी करता था तब यह बच्ची अपनी माता श्री के साथ वहां पर सैर करने आई थी तब हमारी वार्तालाप शुरू हुई। तब कहती थी भाई जब मैं 18 साल की हो जाऊंगी तब मैं भी आपकी तरह रक्तदान किया करूंगी। इसने अपने 18 जन्मदिवस पर पहली बार रक्तदान किया था तब से अब तक कुल छह बार रक्तदान कर चुकी है और अपने साथ पढ़ने वाली लड़कियों से भी रक्तदान करवाती है।

05/06/2025

इस क्षेत्र की पहचान ही हवेलियों से थी। ऊँचे दरवाज़े, झरोखों से झांकती पारंपरिक रौनक, आंगनों में गूंजती हँसी—ये सब इस मिट्टी की शान हुआ करती थीं। हवेलियां न केवल भवन थीं, बल्कि एक समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर थीं, जो परिवारों के इतिहास, रीति-रिवाज और परंपराओं की साक्षी थीं।

लेकिन समय बदला। पीढ़ियां बदलीं। शहरों की ओर पलायन हुआ, और जिन हवेलियों में कभी चहल-पहल थी, वो एक-एक कर खाली होती गईं।

जब हवेलियां खाली हुईं, तो जीवन की गर्माहट भी उनसे रूठ गई। समय की मार और देखरेख के अभाव में वे दीवारें जो कभी शान से खड़ी थीं, अब खंडहर में बदलती जा रही हैं।

आज जब हम उन जर्जर हवेलियों को देखते हैं, तो केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि एक बीते हुए युग की साँसें बुझती हुई नज़र आती हैं।

हवेलियां हमें पुकारती हैं—संभालो मुझे, संजो लो मुझे—क्योंकि यह सिर्फ इमारतें नहीं, हमारी पहचान हैं।


लोकेशन बताओ

04/06/2025

Big shout out to my newest top fans! 💎 Ajay Dahiya, Shivshaktiyan Rudra A, Dinesh Dahiya, Naresh Vashist, Nikshep Dahiya, Mvs Rao, Rinku Singh, Prem Lata Tiwari Rai, Sandy Dahiya, Anil Aggarwal

Drop a comment to welcome them to our community,

04/06/2025

दिल्ली से जय हिंद साथियों, कहां तक पहुंच गई अपनी पोस्ट?

08/05/2025

जय हिंद,
आशा करता हूं आप सभी स्वस्थ और सुरक्षित होंगे आप सुरक्षित रहें यही हमारा उद्देश्य है, हमारा तो बुलावा आ गया है।वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपना और अपने परिवार का ध्यान रखें।

07/04/2025

Jai Hind

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