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GKS Gramin Kisan-Majdoor Samiti GKS

06/10/2026

हमारे कुछ सवाल प्रशासन व सरकार से,,, क्या यही है लोकतंत्र ???

गंगानगर जिले में आज जो देखने को मिला, ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ।तेजेंद्र पाल सिंह टिम्मा, जो गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह क...
05/10/2026

गंगानगर जिले में आज जो देखने को मिला, ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ।
तेजेंद्र पाल सिंह टिम्मा, जो गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह के मुख्य सेवादार हैं और कई सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए हैं। चाहे कोरोना काल हो, किसान आंदोलन हो, गरीब लड़कियों की शादी करवाने का कार्य हो या शहर में किसी भी तरह की आपदा आई हो—तेजेंद्र पाल सिंह टिम्मा अपनी टीम के साथ तुरंत वहां पहुंचकर लोगों की मदद करते रहे हैं।
उनके ऊपर जो आरोप लगे हैं, हम उन आरोपों से कतई सहमत नहीं हैं। हो सकता है उन्होंने अपराध किया हो या हो सकता है कि उन्होंने कोई अपराध न किया हो—यह जांच का विषय है।
अगर पुलिस को उनके खिलाफ किसी ने शिकायत दी थी, तो पुलिस उनसे जांच में सहयोग मांग सकती थी। यदि वह जांच में सहयोग नहीं करते, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती थी। अगर जांच में दोषी पाए जाते और उसके बाद फरार होते, तब हम मानते कि इस तरह की गिरफ्तारी जायज है।
लेकिन गुरु घर से इस तरह उठाकर लेकर आना पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई की हम घोर निंदा करते हैं।
इस तरह की कार्रवाई से आम इंसान के मन में डर और भय पैदा होता है और सामाजिक कार्यों से जुड़े लोग भी पीछे हटने लगते हैं।
अगर आने वाले दिनों में प्रशासन ने इसी तरह का कोई और कार्य किया, तो गंगानगर जिले का हर सामाजिक व्यक्ति तेजेंद्र पाल सिंह टिम्मा के साथ खड़ा होगा।
धन्यवाद।

30/09/2026

सालाना महत्वपूर्ण रेगुलेशन मीटिंग में गंग नहर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी ने किसानों को संदेश साफ दे दिया—न वोट की जरूरत, न गंग नहर की चिंता!
अब पंचायती चुनाव में फैसला किसान खुद करे—जिसे हमारी रोज़ी-रोटी की चिंता नहीं, उसे हम क्यों याद रखें?

30/09/2026

15 दिसंबर तक भाखड़ा में 1200 क्यूसेक चलेगा सिंचाई पानी।
आगे के लिए 10 दिसंबर से पहले होगी रिव्यू बैठक।
ज्यादा से ज्यादा सरसों की करे बिजाई।
GKS संगठन की तरफ से रोशन सिंह जी ने रेगुलेशनिंग बैठक में भाग लिया। बैठक में यह निर्णय लिया गया।

29/09/2026

गंगनहर के किसान साथियों के नाम
गंगनहर के किसान साथियों, जरा सोचिए… आपकी कीमत आखिर कितनी है?
बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि श्रीगंगानगर कृषि प्रधान जिला है और गंगनहर इस पूरे इलाके की जीवनरेखा है। गंगनहर के पूरे साल के पानी के निर्धारित शेयर और उसके रेगुलेशन को लेकर होने वाली महत्वपूर्ण बैठक कोई सामान्य बैठक नहीं होती। इसमें किसानों के पानी से जुड़े बेहद अहम विषयों पर चर्चा होती है।
लेकिन अफसोस देखिए—गंगनहर क्षेत्र के 6 विधायकों और 1 सांसद में से महज एक विधायक ही इस महत्वपूर्ण बैठक में पहुंचे।
सूरतगढ़ विधायक जी का धन्यवाद, जिन्होंने इस बैठक में पहुंचना जरूरी समझा। बाकी जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी निश्चित रूप से गंगनहर के किसानों के लिए सोचने का विषय है।
और इससे भी बड़ी विडंबना देखिए—आईजीएनपी की बैठक में बीजेपी के नेता नदारद रहे और गंगनहर की इस महत्वपूर्ण बैठक में सत्ता और विपक्ष, दोनों तरफ के अधिकांश जनप्रतिनिधि नदारद रहे। महज एक कांग्रेसी विधायक बैठक में पहुंचे।
अब सवाल किसी एक पार्टी का नहीं है।
सवाल किसान और उसके पानी का है।
जिस गंगनहर के पानी पर आपकी खेती, आपकी रोजी-रोटी और आपके परिवार का भविष्य टिका है, अगर उसके पूरे साल के पानी के शेयर और रेगुलेशन की महत्वपूर्ण बैठक में आपके क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ही मौजूद नहीं होंगे, तो किसान भाइयों—आप खुद सोचिए कि आपकी समस्याओं को प्राथमिकता कौन देगा?
हम किसी के खिलाफ फैसला नहीं सुना रहे।
बस आईना दिखा रहे हैं।
किसान साथियों, अब आपको खुद सोचना है, खुद सवाल करना है और खुद फैसला करना है कि आपके पानी और आपकी खेती के मुद्दे पर आपके जनप्रतिनिधियों की कितनी जिम्मेदारी और जवाबदेही होनी चाहिए।
🌾 गंगनहर किसान की जीवनरेखा है।
पानी का सवाल दलों से बड़ा है।
किसान का सवाल राजनीति से बड़ा है।
GKS

26/09/2026

एच नहर क़ी सफाई व गंग नहर के संबध मे महत्वपूर्ण लाइव,,, विशेष धन्यवाद हमारे गांव के दो NRI साथियो का गुरचरण सिंह खैरा USA व लवदीप सिंह बाठ ऑस्ट्रेलिया l

20/09/2026

गंगानगर जिला कमजोर राजनीतिक नेतृत्व के कारण
पिछड़ चुका है
आज गंगानगर जिले की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ पानी, फसल और किसान की नहीं है—सबसे बड़ी समस्या है नेतृत्व की खामोशी।
आज ऐसा महसूस हो रहा है कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, दोनों ही किसान के मुद्दों पर चुप्पी साधे बैठे हैं।
गंगानगर जैसे कृषि प्रधान जिले में किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आवाज़ को मजबूती से उठाने वाला राजनीतिक नेतृत्व दिखाई नहीं दे रहा।
किसान पानी के लिए परेशान है, पूरा नहरी तंत्र भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है सिंचाई विभाग जमकर भ्रष्टाचार कर रहा है फसलें संकट में हैं, सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है। लेकिन सवाल यह है कि इन सवालों को विधानसभा से लेकर सड़क तक मजबूती से कौन उठाएगा?
सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी सिर्फ सत्ता चलाना नहीं, बल्कि जनता की शिकायतों पर जवाबदेही तय करना भी है।
और विपक्ष की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव के समय दिखाई देना नहीं, बल्कि जनता के बीच खड़े होकर सरकार से सवाल पूछना भी है।
जब दोनों तरफ से आवाज़ धीमी पड़ जाए, तो सबसे ज्यादा नुकसान उस किसान का होता है जिसके पास अपनी बात कहने के लिए लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के अलावा कोई मजबूत सहारा नहीं होता।
और याद रखिए—किसान कमजोर होगा तो सिर्फ खेत नहीं कमजोर होंगे।
गंगानगर की मंडियां, आढ़ती, व्यापारी, मजदूर, ट्रांसपोर्टर और पूरा ग्रामीण बाजार इसकी मार महसूस करेगा।
इसलिए अभी भी समय है।
नेताओं को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर गंगानगर के किसानों के सवालों पर एकजुट होकर जवाब मांगना होगा।
अधिकारियों से सवाल होंगे, व्यवस्था से सवाल होंगे और जनप्रतिनिधियों से भी सवाल होंगे।
क्योंकि लोकतंत्र में जनता सिर्फ वोट देने के लिए नहीं होती—जनता को जवाब मांगने का भी पूरा अधिकार है।
गंगानगर को खामोश नेतृत्व नहीं,
जवाबदेह नेतृत्व चाहिए।
और किसान को आश्वासन नहीं—
उसके हक की आवाज चाहिए।

देखो चुनाव का कमाल! 😎🌾नगर पालिका चुनाव के समय हमने लिखा था—जिला कृषि प्रधान है, किसान की फसल बर्बाद हो जाए, नहरों की सफा...
19/09/2026

देखो चुनाव का कमाल! 😎🌾
नगर पालिका चुनाव के समय हमने लिखा था—
जिला कृषि प्रधान है, किसान की फसल बर्बाद हो जाए, नहरों की सफाई न हो, पानी न मिले और बारिश भी साथ न दे… तो किसान की जेब खाली होगी और उसका सीधा असर शहर के बाजार पर पड़ेगा।
तब शहर में चुनाव था, इसलिए शहरवासियों को समझाया जा रहा था—
“आप चिंता मत करो, किसान चाहे परेशान हो जाए… हम शहर और बाजार को बचा लेंगे!” 😂
लेकिन अब पंचायती राज चुनाव सामने हैं।
अब जिला परिषद और पंचायत समितियों के प्रतिनिधि गाँवों से चुने जाएंगे, और वोट भी उसी किसान और ग्रामीण की ताकत से आएगा।
अब जरा किसान भी सोच ले—
जिसकी फसल के लिए पानी चाहिए,
जिसकी फसल के नुकसान का आकलन चाहिए,
जिसे सड़क, बिजली, सिंचाई और मंडी की जरूरत है…
क्या उसकी आवाज सिर्फ चुनाव के समय याद आनी चाहिए?
शहर का बाजार किसान की जेब से चलता है,
और गाँव की राजनीति किसान के वोट से।
इसलिए इस बार सवाल सिर्फ “कौन चुनाव लड़ रहा है?” का नहीं होना चाहिए।
सवाल यह भी होना चाहिए—
“पाँच साल में किसान के लिए किसने क्या किया और आगे क्या करने की बात कर रहा है?”
क्योंकि किसान की फसल बचेगी,
तो किसान की जेब बचेगी।
किसान की जेब बचेगी,
तो गाँव का बाजार चलेगा।
गाँव का बाजार चलेगा,
तो शहर का बाजार भी चलेगा।
किसान को कमजोर करके न गाँव मजबूत होगा, न बाजार।
चुनाव कोई भी हो—
किसान सिर्फ वोटर नहीं, पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। 🌾
अबकी बार भाषण नहीं,

11/09/2026

नहरी पानी के संबध मे पंजाब बठिंडा क़ी धरती से लाइव

10/09/2026

गंगनहर पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
गंगानगर जिले की जीवनदायिनी गंगनहर के मुद्दे पर आज जिले के लगभग सभी जनप्रतिनिधि मौन धारण किए बैठे हैं।
सबसे ज्यादा सोचने वाली बात यही है कि जिस जिले का जीवन, खेती और पूरा आर्थिक तंत्र नहर के पानी पर निर्भर है, उसी नहर की बदहाली और पानी की समस्या पर इतनी उदासीनता क्यों?
ऐसा भी नहीं है कि जनप्रतिनिधियों को जमीनी हकीकत का पता नहीं। सब कुछ पता है, फिर भी न जाने क्यों इस मुद्दे को मजबूती से ऊपर तक उठाने की इच्छा दिखाई नहीं देती। जबकि नहर की सफाई, रखरखाव और व्यवस्था सुधारना कोई ऐसा काम नहीं है जिसके लिए सरकार को कोई असंभव बजट चाहिए।
हर बार जनता को ही दोषी ठहरा देना सबसे आसान रास्ता है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या जनप्रतिनिधियों की अपने जिले के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है?
राजस्थान के दूसरे इलाकों में देखिए—कई जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के मुद्दों पर लगातार डटे रहते हैं, बार-बार सरकार के सामने आवाज उठाते हैं और इसी वजह से जनता भी उनके साथ खड़ी रहती है।
हर पाँच साल बाद जनता को बदलने के लिए दोषी ठहराना ठीक नहीं। कभी-कभी जनप्रतिनिधियों को भी आईना देखना चाहिए। जनता हमेशा मूर्ख नहीं होती—वह काम, आवाज और अपने क्षेत्र के प्रति निष्ठा भी देखती है।

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