सत्य वक्ता चारण

सत्य वक्ता चारण

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चारण शक्ति संगठन

03/08/2021
03/08/2021

लाख पड़े दुख तेदि एक तुजने समरण आई ,
तेदि उभा पगे दौड़ती एक तुज अमारी आई । जीवन सफल तुजती ये भुलया नर ने नार ,
ठानु टेकानू भुलीय पछि मलक में भटकता फरे आई ।।
🖋️शेर कलम

31/07/2021

एक सत्य वक्ता चारण
मुन्ना भा राजकोट

31/07/2021

नेजाली अमाणि आबरू नी रखवाल.…..
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31/07/2021

आई माँ

29/07/2021

🚩🙏🙏🙏दोहे🙏🙏🙏🚩
सुपथ चले हम चारण, कु पथ पर पाव धरे ना।
सद्बुद्धि आपो सोनल,कपट हम कभी करे ना।।

सेवा हम तेरी करे,आप सिवा कोई मन मे रहे ना।
प्रे वर्णो से पृथक रहे, हम उनकी धारा में बहे ना।।

मन वचन से अडिग बने,हम सत्य धर्म से हटे ना।
तन सुकरत काज करे, मन के तन वस में रहे ना।।

भले आ जाये संकट भारी,तेरी याद मन से हटे ना।
पूंजी होये खाली घर से,तेरा दिया आदेश घटे ना।।

मढ़डा तीर्थ जो तू नित करे,विपदा कभी आये ना।
बिरजु कहे भा भाणेज ने,झूठ झाड़ छाव मीले ना।
रचना✍️
बिरजदान मावल

29/07/2021

દુનિયા કહે છે કે ચારણ જન્મ થી પાંચ ચોપડી પાસ હોય. આજ આ હકીકત આંખે જોય છે કાને સામળી છે અસપ પણ સાંભળો
મારા ભાત્રીજા ની વાણી

29/07/2021

🚩🙏🙏🙏दोहे🙏🙏🙏🚩
सुपथ चले हम चारण, कु पथ पर पाव धरे ना।
सद्बुद्धि आपो सोनल,कपट हम कभी करे ना।।

सेवा हम तेरी करे,आप सिवा कोई मन मे रहे ना।
प्रे वर्णो से पृथक रहे, हम उनकी धारा में बहे ना।।

मन वचन से अडिग बने,हम सत्य धर्म से हटे ना।
तन सुकरत काज करे, मन के तन वस में रहे ना।।

भले आ जाये संकट भारी,तेरी याद मन से हटे ना।
पूंजी होये खाली घर से,तेरा दिया आदेश घटे ना।।

मढ़डा तीर्थ जो तू नित करे,विपदा कभी आये ना।
बिरजु कहे भा भाणेज ने,झूठ झाड़ छाव मीले ना।
रचना✍️
बिरजदान मावल
8084425176

25/07/2021

🙏🙏🙏🙏🙏
सिंहासन हिल जाये,
शब्दो की तलवार से।
सैकड़ो मे अलग दिखे,
चाल ओर पहनाव से।।1

ड्योढ़ी बांधे पाग माथे
यह अभय रहे काल से।
वार्ता में चतुरता दिखे,
भले पूंछो छोटे बाल से।।2

विश्व मे रहे व्यापक,
कलम ओर कृपाण से।
भू धरा अंबर के वासी,
ऐसे है चारण सिद्ध से।।3

सत्य का उच्चारण करते,
हम हटते नही मैदान से।
कृति हमारी युगों युगों में,
है हम ग्रथो में देखो शान से।।4

पृथ्वी पर पृथु लाये हमे,
हम महेश उमा कुल से।
ऐसी है पहचान हमारी,
शेष नाना लगे मूल से।।5

साढ़े तीन पहाड़ो में है,
विश्रोतर लिखी आण से।
कोई पूछे तुम किसमें हो,
जवाब दो सीधा बाण से।।6

बैठक उठक रित्ति नीति से
अलग वर्णो के व्यवहार से।
बिरजु कहे सुनो कान से,
हम चारण है देवलोक से।।7
रचना✍️
बिरजदान मावल
8094425176

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