25/08/2023
*जोधपुर की एक खूबसूरत तस्वीर,,, और हम कांग्रेस - B.J.P कमल कांग्रेस करते रहो,,, ये सब एक है खुले मंच पर सिर्फ जनता को बेवक़ूफ़ बनाते हैं!*
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25/08/2023
*जोधपुर की एक खूबसूरत तस्वीर,,, और हम कांग्रेस - B.J.P कमल कांग्रेस करते रहो,,, ये सब एक है खुले मंच पर सिर्फ जनता को बेवक़ूफ़ बनाते हैं!*
25/08/2023
👉👉👉 बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व 54%ओबीसी के लिए मसीहा बने मंडल कमिशन के अध्यक्ष बी पी मंडल साहब की 105 वी जयंती के उपलक्ष मे हमारे सभी साथियों को मंगल कामनाएँ एवं बधाई !* 💐💐💐 *सादर अभिवादन !* 🙏🏽🙏🏽🙏🏽
*( 25 अगस्त 1918--13अप्रैल 1982 )*
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व मंडल कमिशन के अध्यक्ष बी. पी. मंडल के जन्मदिन 25 अगस्त को सामाजिक न्याय दिवस घोषित करने की माँग सोशल मीडिया पर जोर पकड़ने लगी है। वे राष्ट्र निर्माण के सबसे बड़े कार्यकर्त्ता के रूप में देख जाते हैं।*
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*मंडल कमीशन की सिर्फ 2 सिफारिशें लागु, जानिए बाकी के बारे में मंडल कमीशन के चेयरमैन बी.पी. मंडल की जयंती पर आइए जानते हैं कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए कौन सी सिफारिशें की थीं और उनमें से कितने पर अमल हुआ।*
*बी.पी. मंडल ने मंडल कमीशन रिपोर्ट लिख कर बदल दी 60 करोड़ ओबीसी की तकदीर।*
बी.पी. मंडल की अध्यक्षता में लिखी गई रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की नौकरियों में पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण मिला. जिसे मंडल कमीशन के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है.
*प्रीति सिंह Updated: 25 August, 2019 9:22 am IST (बीपी मंडल तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को रिपोर्ट सौंपते हुए | फोटो : वीकीपीडिया कॉमन्स) मंडल कमीशन यानी द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ज्यादातर सिफारिशें अभी भी धूल फांक रही हैं। इस पर चर्चा करने को कोई तैयार नहीं है कि समाज के वंचित तबके के उत्थान के लिए की गई संस्तुतियां अब तक लागू क्यों नहीं कराई जा सकीं। कमीशन ने ‘पूरी योजना’ लागू करने के 20 साल बाद इसकी समीक्षा करने की भी सिफारिश की थी। आरक्षण की समीक्षा करने की बात तो अक्सर कोई न कोई छेड़ देता है। आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत 2015 में आरक्षण की समीक्षा करने की बात कर चुके हैं. लेकिन मंडल कमीशन की रिपोर्ट किस हद तक लागू हो पाई, इस पर बातचीत नहीं होती।*
*मंडल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट के अध्याय 13 में कुल 40 प्वाइंट में सिफारिशें की हैं। पहले प्वाइंट में ही कहा गया है कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ापन और गरीबी, जाति आधारित बाधाओं की वजह से है। यह बाधाएं हमारे सामाजिक ढांचे से जुड़ी हुई हैं। इन्हें खत्म करने के लिए ढांचागत बदलाव की जरूरत होगी। देश के शासक वर्ग के लिए ओबीसी की समस्याओं की अनुभूति में बदलाव कम महत्वपूर्ण नहीं होगा।*
*इस ढांचागत बदलाव के लिए कमीशन ने नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने की सिफारिश की। सिफारिश में आयोग ने आरक्षण लागू करने पर गुणवत्ता, ओबीसी की स्थिति में कुछ नौकरियों के चलते बदलाव न होने, मेधावी अभ्यर्थियों के मनोबल पर बुरा असर पड़ने जैसे तमाम तर्कों का जवाब दिया।*
आइए कमीशन की सिफारिशों को बिंदुवार देखते हैं, जिन्हें लागू करने को लेकर चर्चा नहीं होती.
*1. खुली प्रतिस्पर्धा में मेरिट के आधार पर चुने गए ओबीसी अभ्यर्थियों को उनके लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण कोटे में समायोजित नहीं किया जाए।*
*2. ओबीसी आरक्षण सभी स्तरों पर प्रमोशन कोटा में भी लागू किया जाए।*
*3. संबंधित प्राधिकारियों द्वारा हर श्रेणी के पदों के लिए रोस्टर व्यवस्था उसी तरह से लागू किया जाना चाहिए, जैसा कि एससी और एसटी के अभ्यर्थियों के मामले में है।*
*4. सरकार से किसी भी तरीके से वित्तीय सहायता पाने वाले निजी क्षेत्र के सभी प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की भर्ती उपरोक्त तरीके से करने और उनमें आरक्षण लागू करने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए।*
*5. इन सिफारिशों को प्रभावी बनाने के लिए यह जरूरी है कि पर्याप्त वैधानिक प्रावधान सरकार की ओर से किए जाएं, जिसमें मौजूदा अधिनियमों, कानूनों, प्रक्रिया आदि में संशोधन शामिल है, जिससे वे इन सिफारिशों के अनुरूप बन जाएं।*
*6. शैक्षणिक व्यवस्था का स्वरूप चरित्र के हिसाब से अभिजात्य है. इसे बदलने की जरूरत है, जिससे यह पिछड़े वर्ग की जरूरतों के मुताबिक बन सके।*
*7. अन्य पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा देने के लिए अलग से धन का प्रावधान किया जाना चाहिए, जिससे अलग से योजना चलाकर गंभीर और जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जा सके और उनके लिए उचित माहौल बनाया जा सके।*
*8. ज्यादातर पिछड़े वर्ग के बच्चों की स्कूल छोड़ने की दर बहुत ज्यादा है। इसे देखते हुए प्रौढ़ शिक्षा के लिए एक गहन एवं समयबद्ध कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए, जहां ओबीसी की घनी आबादी है। पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों के लिए इन इलाकों में आवासीय विद्यालय खोले जाने चाहिए, जिससे उन्हें गंभीरता से पढ़ने का माहौल मिल सके। इन स्कूलों में रहने खाने जैसी सभी सुविधाएं मुफ्त मुहैया कराई जानी चाहिए, जिससे गरीब और पिछड़े घरों के बच्चे इनकी ओर आकर्षित हो सकें.।*
*9. ओबीसी विद्यार्थियों के लिए अलग से सरकारी हॉस्टलों की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिनमें खाने, रहने की मुफ्त सुविधाएं हों।*
*10. ओबीसी हमारी शैक्षणिक व्यवस्था की बहुत ज्यादा बर्बादी की दर को वहन नहीं कर सकते, ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि उनकी शिक्षा बहुत ज्यादा व्यावसायिक प्रशिक्षण की ओर झुकी हुई हो. कुल मिलाकर सेवाओं में आरक्षण से शिक्षित ओबीसी का एक बहुत छोटा हिस्सा ही नौकरियों में जा सकता है. शेष को व्यावसायिक कौशल की जरूरत है, जिसका वह फायदा उठा सकें।*
*11. ओबीसी विद्यार्थियों के लिए सभी वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस में 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की जाए, जो केंद्र व राज्य सरकारें चलाती हैं।*
*12. आरक्षण से प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को तकनीकी और प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस में विशेष कोचिंग की सुविधा प्रदान की जाए।*
*13. गांवों में बर्तन बनाने वालों, तेल निकालने वालों, लोहार, बढ़ई वर्गों के लोगों की उचित संस्थागत वित्तीय व तकनीकी सहायता और व्यावसायिक प्रशिक्षण मुहैया कराई जानी चाहिए, जिससे वे अपने दम पर छोटे उद्योगों की स्थापना कर सकें। इसी तरह की सहायता उन ओबीसी अभ्यर्थियों को भी मुहैया कराई जानी चाहिए, जिन्होंने विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है।*
*14. छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बनी विभिन्न वित्तीय व तकनीकी एजेंसियों का लाभ सिर्फ प्रभावशाली तबके के सदस्य ही उठा पाने में सक्षम हैं। इसे देखते हुए यह बहुत जरूरी है कि पिछड़े वर्ग की वित्तीय व तकनीकी सहायता के लिए अलग वित्तीय संस्थान की व्यवस्था की जाए।*
*15. पेशेगत समूहों की सहकारी समितियां बनें। इनकी देखभाल करने वाले सभी पदाधिकारी और सदस्य वंशानुगत पेशे से जुड़े लोगों में से हों और बाहरी लोगों को इसमें घुसने और शोषण करने की अनुमति नहीं हो।*
*16. देश के औद्योगिक और कारोबारी जिंदगी में ओबीसी की हिस्सेदारी नगण्य है। वित्तीय और तकनीकी इंस्टीट्यूशंस का अलग नेटवर्क तैयार किया जाए, जो ओबीसी वर्ग में कारोबारी और औद्योगिक इंटरप्राइजेज को गति देने में सहायक हों।*
*17. सभी राज्य सरकारों को प्रगतिशील भूमि सुधार कानून लागू करना चाहिए, जिससे देश भर के मौजूदा उत्पादन संबंधों में ढांचागत एवं प्रभावी बदलाव लाया जा सके।*
*18. इस समय अतिरिक्त भूमि का आवंटन एससी और एसटी को किया जाता है. भूमि सीलिंग कानून आदि लागू किए जाने के बाद से मिली अतिरिक्त जमीनों को ओबीसी भूमिहीन श्रमिकों को भी आवंटित की जानी चाहिए।*
*19. कुछ पेशेगत समुदाय जैसे मछुआरों, बंजारा, बांसफोड़, खाटवार आदि के कुछ वर्ग अभी भी देश के कुछ हिस्सों में अछूत होने के दंश से पीड़ित हैं. उन्हें आयोग ने ओबीसी के रूप में सूचीबद्ध किया है, लेकिन सरकार द्वारा उन्हें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने पर विचार करना चाहिए।*
*20. पिछड़ा वर्ग विकास निगमों की स्थापना की जानी चाहिए. यह केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर किया जाना चाहिए, जो पिछड़े वर्ग की उन्नति के लिए विभिन्न सामाजिक-शैक्षणिक और आर्थिक कदम उठा सकें।*
*21. केंद्र व राज्य स्तर पर पिछड़े वर्ग के लिए एक अलग मंत्रालय/विभाग बनाया जाना चाहिए, जो उनके हितों की रक्षा का काम करे।*
*22. पूरी योजना को 20 साल के लिए लागू किया जाना चाहिए और उसके बाद इसकी समीक्षा की जानी चाहिए। इन सिफारिशों के अलावा मंडल कमीशन ने रिपोर्ट के प्रारंभ में ही कहा था कि जातियों के आंकड़े न होने के कारण उसे काम करने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. इसलिए अगली जनगणना में जातियों के आंकड़े भी जुटाए जाएं।*
*आरक्षण का विरोध और मंडल आयोग के तर्क
आरक्षण लागू किए जाने के विरोध को लेकर भी आयोग सतर्क था। अभी जिन तर्कों के साथ आरक्षण का विरोध किया जाता है, वही सब तर्क शुरुआत से रहे हैं। इन तर्कों पर अपनी सिफारिशों में आयोग ने कहा, ‘निश्चित रूप से यह सही है कि ओबीसी के लिए आरक्षण से तमाम अन्य लोगों का कलेजा दुखेगा. लेकिन क्या इस तकलीफ के कारण हम सामाजिक सुधार के नैतिक दायित्व को छोड़ सकते हैं? जब अंग्रेजों ने भारत छोड़ा था, तब भी तमाम लोग ऐसे थे, जिनका दिल दुखा था. दक्षिण अफ्रीका में जब काले लोग दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो सभी श्वेतों का कलेजा सुलगता है। अगर भारत में उच्च जातियों की 20 प्रतिशत से भी कम आबादी शेष आबादी पर सामाजिक अन्याय करती है तो निश्चित रूप से निचली जातियों का कलेजा सुलगता है. लेकिन अगर निम्न जातियां ताकत और सम्मान के राष्ट्रीय केक में से एक छोटा सा टुकड़ा मांग रही हैं तो यह सत्तासीन वर्ग के लोग यह दलील दे रहे हैं कि इससे असंतोष होगा। पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण के खिलाफ ‘असंतोष’ को लेकर जो तमाम भारी भरकम तर्क आ रहे हैं, वह सरासर कुतर्क हैं।*
*आरक्षण का लाभ कुछ जातियों तक सिमट जाने का तर्क मौजूदा समय में एक बड़ा तर्क यह भी दिया जाता है कि कुछ जातियां आरक्षण का पूरा लाभ ले रही हैं। शेष पिछड़ा वर्ग वंचित रह जा रहा है। इस तर्क का जवाब भी मंडल कमीशन ने देते हुए अपनी सिफारिशों में लिखा है, ‘इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता है कि आरक्षण व कल्याणकारी कदमों का ज्यादा लाभ उन लोगों को होगा, जो पिछड़े समाज में ज्यादा आगे हैं। लेकिन क्या यह सार्वभौमिक लक्षण नहीं है? सभी सुधारवादी उपचार पदानुक्रम में धीरे धीरे होते हैं, सामाजिक सुधार में कोई अचानक उभार (क्वांटम जंप) नहीं होता। कमोबेश मानव स्वभाव रहा है कि वर्ग विहीन समाज में भी आखिरकार एक ‘नया वर्ग’ उभरकर सामने आता है। आरक्षण का मूल लाभ यह नहीं है कि ओबीसी में समतावादी समाज उभरकर सामने आएगा, जबकि पूरा भारतीय समाज असमानताओं से भरा पड़ा है. लेकिन आरक्षण से निश्चित रूप से ऊंची जातियों का सेवाओं में कब्जा खत्म होगा. मोटे तौर पर ओबीसी देश के शासन प्रशासन में थोड़ी हिस्सेदारी प्राप्त कर सकेंगे।*
आरक्षण से किसे लाभ हुआ?
*इस समय यह बात अक्सर उठती है कि आरक्षण लागू होने पर भी पिछड़े वर्ग को क्या लाभ हुआ। अब तो पिछड़े वर्ग से जुड़े लोग भी कहने लगे हैं कि आरक्षण का कोई लाभ नहीं है। इससे कोई अगड़ापन नहीं आ गया है।यह तर्क भी पुराना है, जिसका जवाब मंडल कमीशन ने अपनी सिफारिश में की है। आयोग ने कहा, ‘हमारा यह दावा कभी नहीं रहा है कि ओबीसी अभ्यर्थियों को कुछ हजार नौकरियां देकर हम देश की कुल आबादी के 52 प्रतिशत पिछड़े वर्ग को अगड़ा बनाने में सक्षम होंगे।* *लेकिन हम यह निश्चित रूप से मानते हैं कि यह सामाजिक पिछड़ेपन के खिलाफ लड़ाई का जरूरी हिस्सा है, जो पिछड़े लोगों के दिमाग में लड़ी जानी है।* *भारत में सरकारी नौकरी को हमेशा से प्रतिष्ठा और ताकत का पैमाना माना जाता रहा है। सरकारी सेवाओं में ओबीसी का प्रतिनिधित्व बढ़ाकर हम उन्हें देश के प्रशासन में हिस्सेदारी की तत्काल अनुभूति देंगे। जब एक पिछड़े वर्ग का अभ्यर्थी कलेक्टर या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक होता है तो उसके पद से भौतिक लाभ उसकेू परिवार के सदस्यों तक सीमित होता है लेकिन इसका मनोवैज्ञानिक असर बहुत व्यापक होता है।*
*मंडल आयोग पर ईमानदारी से नहीं हुआ अमल
मंडल आयोग की सिफारिशों को देखें तो इसके सिर्फ दो बिंदुओं पर कुछ हद तक काम हुआ है। वह है केंद्र सरकार की नौकरियों में ओबीसी को 27 परसेंट आरक्षण और दूसरा, केंद्र सरकार के उच्च शिक्षा संस्थानों के एडमिशन में ओबीसी का 27 परसेंट आरक्षण। बाकी सिफारिशों पर तो काम भी शुरू नहीं हुआ है। मंडल कमीशन की सिफारिशों पर बेमन से काम करने का परिणाम यह हुआ कि अब तक भारत के शोषणकारी सामाजिक ढांचे में बदलाव नहीं हुआ।*
*अप्रैल महीने का सामाजिक न्याय के संदर्भ में ऐतिहासिक महत्व है. 11 अप्रैल का दिन सामाजिक क्रांति के जनक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती होने का कारण महत्वपूर्ण है, 14 अप्रैल को बाबासाहेब डा. भीमराव आंबेडकर का जन्मदिवस है और इस बीच 13 अप्रैल को सामाजिक न्याय के प्रणेता बी.पी. मंडल की पुण्यतिथि है।*
*उनकी अध्यक्षता में लिखी गई दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग, जिसे मंडल कमीशन के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है, की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की नौकरियों में पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण मिला. इसी आयोग की एक और सिफारिश के आधार पर केंद्रीय शिक्षा संस्थानों में दाखिलों में भी पिछड़े वर्गों को 27 परसेंट आरक्षण दिया गया. इस आयोग की 40 में से ज्यादातर सिफारिशों पर अब तक अमल नहीं हुआ है. अगर भविष्य में कोई सरकार इस दिशा में काम करती है, तो इससे पिछड़ों का भला होगा।*
*मंडल कमीशन की रिपोर्ट भारत में सामाजिक लोकतंत्र लाने और 54 फीसदी ओबीसी आबादी को राष्ट्र निर्माण में हिस्सेदार बनाने की आजादी के बाद की सबसे बड़ी पहल साबित हुई, जिससे इन वर्गों के लाखों लोगों को नौकरियां मिलीं और शिक्षा संस्थानों में दाखिला मिला. इससे पिछड़े वर्गों की भारतीय लोकतंत्र में आस्था मजबूत हुई और उनके अंदर ये भरोसा पैदा हुआ कि देश के संसाधनों और अवसरों में उनका भी हिस्सा है।*
*मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आने के साथ ही खासकर उत्तर भारत में पिछड़े वर्गों की महत्वाकांक्षा का भी विस्फोट हुआ। राजनीति में उनकी दावेदारी मजबूत हुई और अपनी तकदीर खुद लिखने का जज्बा उनमें पैदा हुआ। 1980 के बाद उत्तर भारत में लालू-मुलायम- नीतीश और पिछड़ी जातियों के तमाम नेताओं की आगे आना इसी पृष्ठभूमि में हुआ है। इसे भारतीय राजनीति की मूक क्रांति या साइलेंट रिवोल्यूशन भी कहा गया क्योंकि इसके जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विशाल आबादी की हिस्सेदारी बढ़ी। इस मायने में मंडल कमीशन की रिपोर्ट का युगांतकारी महत्व है।*
*इस रिपोर्ट के प्रधान रचनाकार बी.पी. मंडल ने इस मामले में भारत की तकदीर लिखने वालों में अपना नाम दर्ज करा लिया।*
*बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत सरकार द्वारा गठित दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बी.पी. मंडल का जन्म 25 अगस्त, 1918 को बनारस में हुआ था। मुरहो एस्टेट के ज़मींदार होते हुए भी उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन में जमकर हिस्सा लिया। वे बिहार प्रांतीय कांग्रेस कमिटी और एआईसीसी के बिहार से निर्वाचित सदस्य रासबिहारी लाल मंडल के सबसे छोटे पुत्र थे।*
*रासबिहारी बाबू ने यादवों के लिए जनेऊ धारण आन्दोलन चलाया था। यह आंदोलन प्रतिक्रियावादी लग सकता है, लेकिन दरअसल ये स्वाभिमान का आंदोलन था। 1917 में मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड समिति के समक्ष यादवों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए उन्होंने वायसरॉय को परंपरागत ‘सलामी’ देने की जगह उनसे हाथ मिलाया था। उन्होंने सेना में यादवों के लिए रेजिमेंट की मांग भी की थी। उस समय ज्यादातर नेता अपने समुदाय के हितों के साथ जुड़े थे। रासबिहारी बाबू के कामों को भी उसी नजरिए से देखने की जरूरत है।*
*इस पृष्ठभूमि में बी.पी. मंडल की परवरिश हुई। वे मधेपुरा विधान सभा से 1952 के प्रथम चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी बने और 1952 में बहुत कम उम्र में मधेपुरा से विधानसभा के लिए सदस्य चुने गए। सन 1962 में वे दूसरी बार विधायक बने। इस बीच, 1965 में मधेपुरा क्षेत्र के पामा गांव में दलितों पर सवर्णों एवं पुलिस द्वारा अत्याचार के खिलाफ उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और सोशलिस्ट पार्टी में शामिल हो गए। वे 1967 में मधेपुरा से लोकसभा सदस्य चुने गए।*
*बड़े नाटकीय राजनैतिक उतार-चढ़ाव के बाद 1 फ़रवरी, 1968 में वे बिहार के मुख्यमंत्री बने। इसके लिए उन्होंने सतीश प्रसाद को एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनवाया। उस समय बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे. वे राम मनोहर लोहिया एवं श्रीमती इंदिरा गाँधी की इच्छा के विरुद्ध बिहार में पहले पिछड़े समाज के मुख्यमंत्री बनने जा रहे थे। परन्तु विधानसभा में बहुमत के बावजूद तत्कालीन राज्यपाल एम.ए.एस अयंगार रांची जाकर बैठ गए और मंडल जी को शपथ दिलाने से इस आधार पर इंकार कर दिया कि बीपी मंडल बिहार में बिना किसी सदन के सदस्य बने 6 महीने तक मंत्री रह चुके है।
*परन्तु बी.पी. मंडल ने राज्यपाल को चुनौती दी और इस परिस्थिति से निकलने के लिए तय किया गया कि सतीश बाबू एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बन कर इस्तीफा देंगे, जिससे बी.पी. मंडल के मुख्यमंत्री बनने में आ रही अड़चन दूर हो।*
*उन्ही दिनों बरौनी रिफायनरी में तेल का रिसाव गंगा में हो गया और उसमें आग लग गयी। बिहार विधान सभा में पंडित बिनोदानंद झा ने कहा कि शुद्र मुख्यमंत्री बना है तो गंगा में आग ही लगेगी! इस प्रकरण का साक्ष्य बिहार विधानसभा के रिकार्ड में है। उस समय के राजनीतिक- सामाजिक वातावरण का अंदाजा लगाया जा सकता है। इससे पहले बी.पी. मंडल ने यादवों के लिए विधान सभा में ‘ग्वाला’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति की थी। सभापति सहित कई सदस्यों ने कहा कि यह असंसदीय कैसे हो सकता है क्योंकि यह शब्दकोष में लिखा हुआ है। मंडल ने कुछ गालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भी तो शब्दकोष (डिक्शनरी) में है, फिर इन्हें असंसदीय क्यों माना जाता है. सभापति ने मंडल की बात मानते हुए, यादवों के लिए ‘ग्वाला’ शब्द के प्रयोग को असंसदीय मान लिया।*
*1968 में उपचुनाव जीत कर बी.पी. मंडल पुनः लोकसभा सदस्य बने। 1972 में वे मधेपुरा विधान सभा से सदस्य चुने गए. 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर मधेपुरा लोक सभा से सदस्य बने. 1977 में जनता पार्टी के बिहार संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के नाते लालू प्रसाद को कर्पूरी ठाकुर और सत्येन्द्र नारायण सिंह के विरोध के बावजूद छपरा से लोकसभा टिकट मंडल जी ने ही दिया। 1 जनवरी, 1979 को प्रधान मंत्री मोरारजी देसाई ने बी.पी. मंडल को पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया, जिस जबाबदेही को उन्होंने बखूबी निभाया. इस रिपोर्ट को लाख कोशिश के बावजूद सर्वोच्च न्यायलय में ख़ारिज नहीं किया जा सका।*
*उनके योगदान का सही मूल्यांकन होना अभी बाकी है.
(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रद्धानंद कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर हैं. वे बीपी मंडल के परिवार के सदस्य हैं.)*
*भारतीय संविधान के अनुसार, कानून के समक्ष सभी नागरिक समान हैं।*
*समानता संविधान का मूल सिद्धांत है* जिसे *ब्राह्मण स्वीकार नहीं करना चाहते...लेकिन इसके विपरीत यूरेशियन ब्राह्मण इस देश में जाति व्यवस्था के आधार पर कानून व्यवस्था स्थापित करना चाहते हैं।*
*आरक्षण के कारण मूलनिवासी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। आरक्षण के कारण वे सत्ता और प्रशासन में भाग ले रहे हैं* और *मूलनिवासी बहुजन समाज एकजुट हो रहा है। इससे ब्राह्मण को खतरा उत्पन्न हो रहा है।*
*जैसे ही मंडल आयोग के अनुसार ओबीसी को आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया शुरू हुई, ओबीसी का ध्यान आरक्षण से हटाने के लिए और ओबीसी को मुसलमानों के खिलाफ खड़ा करने के लिए राम-जन्मस्थान-बाबरी मस्जिद आंदोलन शुरू किया गया।*
*मूलनिवासियों को बांटना, महत्वपूर्ण बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाना और भाईचारे को तोड़ने वाले मुद्दों को उजागर करना यूरेशियाई ब्राह्मणों की नीति है, ताकि मूलनिवासी अपने अधिकारों से दूर रहें...*
*माननीय. वामन मेश्राम (राष्ट्रीय अध्यक्ष बामसेफ)*
*According to the Indian Constitution, all citizens are equal before the law.*
*Equality is the basic principle of the Constitution* which *Brahmins do not want to accept...but on the Contrary, Eurasian Brahmins want to establish law & order based on the caste system in this country.*
*Because of the Reservation, the indigenous people are getting aware of their Rights. Due to the Reservation, they are participating in the power and administration* and the *Mulnivasi Bahujan Samaj is getting united. This is resulting in the danger to the Brahman.*
*As soon as the process of implementing Reservation to the OBCs according to the Mandal Commission was started, to divert the attention of OBCs from the Reservation & to make OBCs stand against the Muslims, the Ram-Birthplace-Babri Mosque Agitation was started.*
*It is the policy of Eurasian Brahmins to divide the indigenous people, by diverting their attention from the Important basic issues, and by highlighting the issues which destroy the fraternity, so that the indigenous people are kept away from their Rights...*
*Hon. Waman Meshram (National President BAMCEF )*
01/08/2023
मस्जिद में मंदिर ढूंढने वालो का, Swami Prasad Maurya ने सिस्टम हिला दिया।। Bahujan 85 चैनल को देखने वाले दर्शकों का हृदय की गहराइयों से आभार।। ||धन्यवाद|| ...
01/08/2023
* #ब्राह्मणों_के_एकाधिकार_को_तोड़े_बिना_मनुस्मृति_के_प्रभाव_को_नष्ट_करना_संभव_नहीं_है*
* #माननीय_डी_के_खापर्डे*
यदि हम *मनुस्मृति के प्रभाव* को समझना चाहते हैं, तो *मनुस्मृति क्यों लिखी गई?* इसके पीछे *उद्देश्य* क्या था? इन सभी बातों को समझना जरूरी है. * #मनुस्मृति_ब्राह्मणों_का_एकाधिकार_और_वर्चस्व_ स्थापित_करने_के_लिए_लिखा_गया_है।* इस *एकाधिकार* और *वर्चस्व* को बनाए रखने के लिए, शूद्रों, अति शूद्रों (शूद्रों और अछूतों) के #बहुजन_समाज* के खिलाफ एक * #घृणा_अभियान* शुरू किया गया और उन्हें * #अधिकारों_और_प्राइवेसी_से_वंचित_किया गया लेग्स.* * आज भी ये ियान_जारी_है।*
आज * #धर्मांतरित_अल्पसंख्यक_मुसलमानों_सिखों_और_ईसाइयों* को *नफरत_अभियान में शामिल* कर दिया गया है और इस अभियान के तहत उन्हें भारतीय संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों और विशेषाधिकारों का आनंद लेने से दूर रखा जा रहा है। इसलिए यदि हम मनुस्मृति के प्रभाव को नष्ट करना चाहते हैं, तो हमें यह समझना होगा,
*हमें अपनी #नीति_और_रणनीति_बनानी होगी और #अधिकार_और_विशेषाधिकार_प्राप्त_करना_होगा_और_ब्राह्मणों_के_एकाधिकार_को_तोड़ना_होगा। तभी हम #मनुस्मृति_के_प्रभाव_को_नष्ट_कर पाएंगे।*
* , *
* *
If we want to understand the *influence of Manusmriti,* why *Manusmriti was written?* What was the *objective* behind this? It is necessary to understand all these things. * .* To *retain & maintain* this *monopoly* and *domination,* a * * was *started * of Shudra, Ati Shudras (Shudras & Untouchables) and they were * .* *Even today this .*
Today the * * have been * * and under this campaign, they are being kept away from * .* Therefore if we want to destroy the influence of Manusmriti, we must have to understand this,
*We must formulate our and . Then only we will be able to .*
05/01/2023
भीमा कोरेगांव मे #OBC नेता ने #EVM का कर डाला पोस्टमार्टम, पेशवाई और EVM का संबंधित लीक।। Bahujan 85 चैनल को देखने वाले दर्शकों का हृदय की गहराइयों से आभार।। ||धन्यवाद|| #ओबीसी #बहुजनन्यूज़ ...
Jay mulnivasi
20/04/2022
*गणेश लाल रायकवाल ने बताया कि मान्यवर दिनेश माली जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा उदयपुर, ने निम्नलिखित के साथ गणेश लाल रायकवाल प्रदेश महासचिव बामसेफ राजस्थान, मान्यवर बाबूलाल घावरी प्रदेश कार्याध्यक्ष राष्ट्रीय अत्याचार निवारण फोर्स राजस्थान, मान्यवर एडवोकेट पी. आर. सालवी महासचिव डॉक्टर अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी जिला उदयपुर, मान्यवर मोहम्मद अनिस अब्बासी प्रदेश संयोजक राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा राजस्थान,मान्यवर भुपेंद्र चौहान, मान्यवर नानालाल चंगेरीवाल उपाध्यक्ष नफ राज.,मान्यवर अर्जुन सोनवाल जिलाध्यक्ष नफ, मान्यवर इन्द्रजीत पंवार, मान्यवर मनित @ मोनू पंवार, आयुष्मती वर्षा वर्मा राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ उदयपुर ने मिलकर ओबीसी व सभी जातियों की जाती आधारित कराई जाये के साथ 13 मुद्दो लेकर पुरे देश में द्वितीय चरण के आन्दोलन के तहत तारा चन्द जी मीणा जिलाधिश उदयपुर के मार्फत माननीय राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार को भेजने हेतु ज्ञापन दिया गया इस मौके पर मान्यवर ताराचन्द जी जिला कलक्टर महोदय उदयपुर 14 अप्रैल 2022 को सम्पन्न हुए प्रबोधन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होने से ज्ञापन देने के अवसर पर भारतरत्न बाबासाहब डाक्टर भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भेंट की गई तत्पश्चात आयुस्मती मधुबाला चौहान विभागाध्यक्ष पन्नाधाय राजकीय महिला चिकित्सालय उदयपुर 14 अप्रैल 2022 को सम्पन्न हुए प्रबोधन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होने से भारतरत्न बाबासाहब डाक्टर भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भेंट की गई जो उनके कार्यकाल अधिकार व कर्मचारीयों ने प्राप्त की व उनके कार्यकाल में लगायेंगे ।*
12/04/2022