10/09/2026
•मणिमहेश कैलाश (लगभग 5,653 मीटर) पर चढ़ने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन आज तक आधिकारिक तौर पर कोई भी इंसान इसकी मुख्य चोटी तक नहीं पहुंच पाया है।
इस शिखर को अजेय (Unconquered) माना जाता है, जिसके पीछे पर्वतारोहण की तकनीकी चुनौतियां और स्थानीय मान्यताएं दोनों जुड़ी हैं:
•1968 का आधिकारिक भारतीय-ब्रिटिश अभियान: मणिमहेश पर चढ़ने का सबसे चर्चित और रिकॉर्डेड प्रयास 1968 में एक संयुक्त इंडो-ब्रिटिश अभियान दल (Nandini Patel के नेतृत्व में) द्वारा किया गया था। टीम काफी ऊंचाई तक पहुंची, लेकिन बेहद खड़ी चट्टानों, अचानक बिगड़े मौसम और भारी हिमस्खलन के जोखिम के चलते उन्हें चोटी से पहले ही अभियान वापस लेना पड़ा।
•स्थानीय आस्था और प्रतिबंध: स्थानीय गद्दी समुदाय और चंबा क्षेत्र में यह अटूट मान्यता है कि मणिमहेश शिखर भगवान शिव का निजी आसन है। लोककथाओं में कहा जाता है कि अतीत में जिसने भी अहंकारवश इस पर चढ़ने की कोशिश की (जैसे गद्दी चरवाहे या लोहार की लोककथा), वे पत्थर में बदल गए। इस गहरी धार्मिक संवेदनशीलता के कारण स्थानीय लोग किसी को भी चोटी पर चढ़ाई करने की अनुमति नहीं देते और प्रशासन भी पर्वतारोहण अभियानों को मंजूरी नहीं देता।
•संक्षेप में कहें तो, पर्वतारोहियों ने तकनीकी रूप से इस पर कोशिश की, लेकिन प्राकृतिक बाधाओं और स्थानीय धार्मिक मर्यादाओं के चलते यह आज भी पूरी तरह अविजित (Unclimbed) है। लोग केवल नीचे स्थित पवित्र डल झील (लगभग 4,080 मीटर) तक ही जाते हैं और वहीं से शिखर के दर्शन करते हैं।