वाराणसी
Varanasi also commonly known as Banaras or Kashi is one of the holiest cities in India and is situated in the northern Indian state of Uttar Pradesh.
The city is situated on the west bank of the river Ganga.
सिर्फ 10 मिनट नहीं थे वो
आज मेरे घर में चायपत्ती खत्म हो गई थी
सोचा, बाहर जाने से अच्छा है
Blinkit से ऑर्डर कर दूँ।
मोबाइल उठाया,
दो क्लिक किए,
और स्क्रीन पर चमक उठा
10 मिनट में डिलीवरी।
मन में सुकून आ गया।
काम में लग गई।
लेकिन आज वो 10 मिनट
हम सब अब इसी के आदी हो गए हैं।
एक बटन दबाया,
और मान लिया
अब सामने वाला इंसान नहीं,
एक मशीन काम करेगी।
समय पर आए तो ठीक,
और अगर दो-चार मिनट भी देर हो जाए
तो गुस्सा,
शिकायत,
या ऑर्डर कैंसल।
आज भी दरवाज़े पर दस्तक हुई
लेकिन समय से थोड़ी देर बाद।
दरवाज़ा खोला तो सामने एक लड़का खड़ा था।
उम्र बहुत ज़्यादा नहीं,
लेकिन चेहरे पर ज़िम्मेदारियों की झुर्रियाँ थीं।
उसकी साँसें तेज़ थीं,
हाथ हल्के काँप रहे थे,
और आँखें
जैसे कुछ कहती-कहती रुक गई हों।
मैंने सामान लिया।
लेकिन जाने क्यों
मुँह से बस एक ही सवाल निकला
सब ठीक है?
आप बहुत परेशान लग रहे हो
बस
यहीं वो टूट गया।
उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
बिना आवाज़ के।
जैसे किसी ने सालों से
रोने की इजाज़त ही नहीं दी हो।
थोड़ी देर बाद बोला
मैम
आज तक किसी ने ये नहीं पूछा।
लेट होने पर लोग सिर्फ गुस्सा करते हैं।
कभी सामान लौटा देते हैं,
कभी ऑर्डर कैंसल।
वो रुक गया।
साँस संभाली।
फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोला
मेरी पत्नी हॉस्पिटल में है।
अभी उसकी डिलीवरी है।
फोन आ रहा है
जल्दी आ जाओ
उस पल जैसे समय थम गया।
मेरे सामने कोई डिलीवरी बॉय नहीं खड़ा था।
मेरे सामने एक पति था
जो पिता बनने वाला था।
उसने आगे कहा
रास्ते में ही हॉस्पिटल पड़ता है।
सोचा एक बार देख आऊँ।
बस एक पल
लेकिन उसी पल में देर हो गई।
वो शर्मिंदा था।
जैसे उसने कोई गुनाह कर दिया हो।
लेकिन सच्चाई ये थी
वो गुनहगार नहीं,
मजबूर था।
एक तरफ उसकी पत्नी
दर्द से जूझ रही थी।
दूसरी तरफ काम
जिससे घर चलता है।
अगर वो ड्यूटी छोड़ देता
तो शायद नौकरी चली जाती।
और अगर देर करता
तो लोगों का गुस्सा झेलना पड़ता।
आज वो बीच में फँसा था
परिवार और पेट के बीच।
मैं पूरी तरह निशब्द थी।
आँखें भर आईं।
दिल भारी हो गया।
हम जिन 10 मिनट के लिए
लड़ते हैं, चिल्लाते हैं,
कभी-कभी वही
किसी की ज़िंदगी के
सबसे अनमोल पलों को छीन लेते हैं।
आज मैंने एक बात समझी
हर देर लापरवाही नहीं होती।
हर इंसान लापरवाह नहीं होता।
कुछ लोग चुपचाप
अपनी खुशियाँ
अपने आँसू
और अपने सपने
दूसरों की सुविधाओं के लिए कुर्बान कर रहे होते हैं।
हम कमरे में बैठकर
समय गिनते हैं।
और कोई सड़क पर
अपनी ज़िंदगी समेटे
भाग रहा होता है।
एक छोटी-सी अपील
अगली बार अगर कोई
थोड़ा देर से आए
तो गुस्सा करने से पहले
बस एक बार पूछ लीजिए
सब ठीक है?
हो सकता है सामने खड़ा इंसान
किसी का पति हो,
किसी का पिता हो,
या किसी का बेटा
जो अपनी ज़िम्मेदारियों के नीचे दबा
बस थोड़ी सी इंसानियत चाहता हो।
क्योंकि हम ग्राहक हैं
लेकिन वो भी इंसान हैं।
इंसान पहले।
सुविधा बाद में।
सुकुन ❤️❣️
*7 मई को हवाई हमले से बचाव हेतु चेकलिस्ट* (मॉकड्रिल के अवसर पर) । मोबाइल में सेव करके रखें।
(घबराएं नहीं। बच्चों को अवश्य जागरूक करें।)
1. अलर्ट और सतर्कता
* एयर रैड सायरन की आवाज़ पहचानें
* मोबाइल या रेडियो पर सरकारी अलर्ट सुनें
* अफवाहों पर विश्वास न करें, केवल आधिकारिक सूचना पर ध्यान दें।
2. सुरक्षित स्थान (शरणस्थल)
* निकटतम बंकर या शरणस्थल की जानकारी रखें
* अपने घर में मजबूत, बिना खिड़की वाला कमरा तैयार रखें
* शरणस्थल तक जल्दी पहुँचने का रास्ता पहले से तय करें
3. जरूरी वस्तुएँ तैयार रखें
* पीने का पानी (कम से कम 3 दिन का)
* सूखा भोजन (बिस्किट, ड्राई फ्रूट्स आदि)
* प्राथमिक चिकित्सा किट
* टॉर्च और एक्स्ट्रा सेल
* पोर्टेबल रेडियो
* जरूरी दस्तावेज़ (ID, मेडिकल रिपोर्ट, बैंक डिटेल्स)
* मोबाइल चार्जर / पावर बैंक
4. अंधेरा और सुरक्षा
* रात में सभी लाइटें बंद रखें (ब्लैकआउट)
* खिड़कियों पर मोटे पर्दे, काले कागज़ या ब्लाइंड लगाएँ
* शीशे से दूर रहें, ज़मीन पर लेट जाएँ
5. अभ्यास और तैयारी
* परिवार के साथ हवाई हमले की ड्रिल करें
* बच्चों को सुरक्षित स्थान और प्रक्रिया सिखाएँ
* पड़ोसियों के साथ आपसी सहयोग सुनिश्चित करें
6. हमले के बाद क्या करें
* बाहर तभी निकलें जब सरकारी निर्देश मिले
* घायल हों तो प्राथमिक उपचार करें
* संदिग्ध वस्तु या बम दिखे तो छुए नहीं — पुलिस को सूचित करे।।
मॉकड्रिल के अवसर पर उत्तर प्रदेश के चिन्हित 19 जिलों की सूची जहां बजेगा जंग वाला सायरन👇
बुलन्दशहर (नरौरा)आगरा, इलाहाबाद, बरेली, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ ,
मुरादाबाद, सहारनपुर, वाराणसी, बख्शी-का-तालाब, मुगलसराय, सरसावा, बागपत, मुजफ्फर नगर
*उत्तर प्रदेश द्वारा जनहित में जारी*
07/01/2025
घाट
03/01/2025
।।हर हर महादेव 🙏🙏।।
Are You Missing that Love 💕 of माँ I
01/01/2025
21/05/2024
इसे कहते है कसक और चाहत
ट्रेन चलने को ही थी कि अचानक कोई जाना पहचाना सा चेहरा जर्नल बोगी में आ गया। मैं अकेली सफर पर थी। सब अजनबी चेहरे थे। स्लीपर का टिकिट नही मिला तो जर्नल डिब्बे में ही बैठना पड़ा। मगर यहां ऐसे हालात में उस शख्स से मिलना। जिंदगी के लिए एक संजीवनी के समान था।
जिंदगी भी कमबख्त कभी कभी अजीब से मोड़ पर ले आती है। ऐसे हालातों से सामना करवा देती है जिसकी कल्पना तो क्या कभी ख्याल भी नही कर सकते ।
वो आया और मेरे पास ही खाली जगह पर बैठ गया। ना मेरी तरफ देखा। ना पहचानने की कोशिश की। कुछ इंच की दूरी बना कर चुप चाप पास आकर बैठ गया। बाहर सावन की रिमझिम लगी थी। इस कारण वो कुछ भीग गया था। मैने कनखियों से नजर बचा कर उसे देखा। उम्र के इस मोड़ पर भी कमबख्त वैसा का वैसा ही था। हां कुछ भारी हो गया था। मगर इतना ज्यादा भी नही।
फिर उसने जेब से चश्मा निकाला और मोबाइल में लग गया।
चश्मा देख कर मुझे कुछ आश्चर्य हुआ। उम्र का यही एक निशान उस पर नजर आया था कि आंखों पर चश्मा चढ़ गया था। चेहरे पर और सर पे मैने सफेद बाल खोजने की कोशिश की मग़र मुझे नही दिखे।
मैंने जल्दी से सर पर साड़ी का पल्लू डाल लिया। बालो को डाई किए काफी दिन हो गए थे मुझे। ज्यादा तो नही थे सफेद बाल मेरे सर पे। मगर इतने जरूर थे कि गौर से देखो तो नजर आ जाए।
मैं उठकर बाथरूम गई। हैंड बैग से फेसवाश निकाला चेहरे को ढंग से धोया फिर शीशे में चेहरे को गौर से देखा। पसंद तो नही आया मगर अजीब सा मुँह बना कर मैने शीशा वापस बैग में डाला और वापस अपनी जगह पर आ गई।
मग़र वो साहब तो खिड़की की तरफ से मेरा बैग सरकाकर खुद खिड़की के पास बैठ गए थे।
मुझे पूरी तरह देखा भी नही बस बिना देखे ही कहा, " सॉरी, भाग कर चढ़ा तो पसीना आ गया था । थोड़ा सुख जाए फिर अपनी जगह बैठ जाऊंगा।" फिर वह अपने मोबाइल में लग गया। मेरी इच्छा जानने की कोशिश भी नही की। उसकी यही बात हमेशा मुझे बुरी लगती थी। फिर भी ना जाने उसमे ऐसा क्या था कि आज तक मैंने उसे नही भुलाया। एक वो था कि दस सालों में ही भूल गया। मैंने सोचा शायद अभी तक गौर नही किया। पहचान लेगा। थोड़ी मोटी हो गई हूँ। शायद इसलिए नही पहचाना। मैं उदास हो गई।
जिस शख्स को जीवन मे कभी भुला ही नही पाई उसको मेरा चेहरा ही याद नही😔
माना कि ये औरतों और लड़कियों को ताड़ने की इसकी आदत नही मग़र पहचाने भी नही😔
शादीशुदा है। मैं भी शादीशुदा हुँ जानती थी इसके साथ रहना मुश्किल है मग़र इसका मतलब यह तो नही कि अपने खयालो को अपने सपनो को जीना छोड़ दूं।
एक तमन्ना थी कि कुछ पल खुल के उसके साथ गुजारूं। माहौल दोस्ताना ही हो मग़र हो तो सही😔
आज वही शख्स पास बैठा था जिसे स्कूल टाइम से मैने दिल मे बसा रखा था। सोसल मीडिया पर उसके सारे एकाउंट चोरी छुपे देखा करती थी। उसकी हर कविता, हर शायरी में खुद को खोजा करती थी। वह तो आज पहचान ही नही रहा😔
माना कि हम लोगों में कभी प्यार की पींगे नही चली। ना कभी इजहार हुआ। हां वो हमेशा मेरी केयर करता था, और मैं उसकी केयर करती थी। कॉलेज छुटा तो मेरी शादी हो गई और वो फ़ौज में चला गया। फिर उसकी शादी हुई। जब भी गांव गई उसकी सारी खबर ले आती थी।
बस ऐसे ही जिंदगी गुजर गई।
आधे घण्टे से ऊपर हो गया। वो आराम से खिड़की के पास बैठा मोबाइल में लगा था। देखना तो दूर चेहरा भी ऊपर नही किया😔
मैं कभी मोबाइल में देखती कभी उसकी तरफ। सोसल मीडिया पर उसके एकाउंट खोल कर देखे। तस्वीर मिलाई। वही था। पक्का वही। कोई शक नही था। वैसे भी हम महिलाएं पहचानने में कभी भी धोखा नही खा सकती। 20 साल बाद भी सिर्फ आंखों से पहचान ले☺️
फिर और कुछ वक्त गुजरा। माहौल वैसा का वैसा था। मैं बस पहलू बदलती रही।
फिर अचानक टीटी आ गया। सबसे टिकिट पूछ रहा था।
मैंने अपना टिकिट दिखा दिया। उससे पूछा तो उसने कहा नही है।
टीटी बोला, "फाइन लगेगा"
वह बोला, "लगा दो"
टीटी, " कहाँ का टिकिट बनाऊं?"
उसने जल्दी से जवाब नही दिया। मेरी तरफ देखने लगा। मैं कुछ समझी नही।
उसने मेरे हाथ मे थमी टिकिट को गौर से देखा फिर टीटी से बोला, " कानपुर।"
टीटी ने कानपुर की टिकिट बना कर दी। और पैसे लेकर चला गया।
वह फिर से मोबाइल में तल्लीन हो गया।
आखिर मुझसे रहा नही गया। मैंने पूछ ही लिया,"कानपुर में कहाँ रहते हो?"
वह मोबाइल में नजरें गढ़ाए हुए ही बोला, " कहीँ नही"
वह चुप हो गया तो मैं फिर बोली, "किसी काम से जा रहे हो"
वह बोला, "हाँ"
अब मै चुप हो गई। वह अजनबी की तरह बात कर रहा था और अजनबी से कैसे पूछ लूँ किस काम से जा रहे हो।
कुछ देर चुप रहने के बाद फिर मैंने पूछ ही लिया, "वहां शायद आप नौकरी करते हो?"
उसने कहा,"नही"
मैंने फिर हिम्मत कर के पूछा "तो किसी से मिलने जा रहे हो?"
वही संक्षिप्त उत्तर ,"नही"
आखरी जवाब सुनकर मेरी हिम्मत नही हुई कि और भी कुछ पूछूँ। अजीब आदमी था । बिना काम सफर कर रहा था।
मैं मुँह फेर कर अपने मोबाइल में लग गई।
कुछ देर बाद खुद ही बोला, " ये भी पूछ लो क्यों जा रहा हूँ कानपुर?"
मेरे मुंह से जल्दी में निकला," बताओ, क्यों जा रहे हो?"
फिर अपने ही उतावलेपन पर मुझे शर्म सी आ गई।
उसने थोड़ा सा मुस्कराते हुवे कहा, " एक पुरानी दोस्त मिल गई। जो आज अकेले सफर पर जा रही थी। फौजी आदमी हूँ। सुरक्षा करना मेरा कर्तव्य है । अकेले कैसे जाने देता। इसलिए उसे कानपुर तक छोड़ने जा रहा हूँ। " इतना सुनकर मेरा दिल जोर से धड़का। नॉर्मल नही रह सकी मैं।
मग़र मन के भावों को दबाने का असफल प्रयत्न करते हुए मैने हिम्मत कर के फिर पूछा, " कहाँ है वो दोस्त?"
कमबख्त फिर मुस्कराता हुआ बोला," यहीं मेरे पास बैठी है ना"
इतना सुनकर मेरे सब कुछ समझ मे आ गया। कि क्यों उसने टिकिट नही लिया। क्योंकि उसे तो पता ही नही था मैं कहाँ जा रही हूं। सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए वह दिल्ली से कानपुर का सफर कर रहा था। जान कर इतनी खुशी मिली कि आंखों में आंसू आ गए।
दिल के भीतर एक गोला सा बना और फट गया। परिणाम में आंखे तो भिगनी ही थी।
बोला, "रो क्यों रही हो?"
मै बस इतना ही कह पाई," तुम मर्द हो नही समझ सकते"
वह बोला, " क्योंकि थोड़ा बहुत लिख लेता हूँ इसलिए एक कवि और लेखक भी हूँ। सब समझ सकता हूँ।"
मैंने खुद को संभालते हुए कहा "शुक्रिया, मुझे पहचानने के लिए और मेरे लिए इतना टाइम निकालने के लिए"
वह बोला, "प्लेटफार्म पर अकेली घूम रही थी। कोई साथ नही दिखा तो आना पड़ा। कल ही रक्षा बंधन था। इसलिए बहुत भीड़ है। तुमको यूँ अकेले सफर नही करना चाहिए।"
"क्या करती, उनको छुट्टी नही मिल रही थी। और भाई यहां दिल्ली में आकर बस गए। राखी बांधने तो आना ही था।" मैंने मजबूरी बताई।
"ऐसे भाइयों को राखी बांधने आई हो जिनको ये भी फिक्र नही कि बहिन इतना लंबा सफर अकेले कैसे करेगी?"
"भाई शादी के बाद भाई रहे ही नही। भाभियों के हो गए। मम्मी पापा रहे नही।"
कह कर मैं उदास हो गई।
वह फिर बोला, "तो पति को तो समझना चाहिए।"
"उनकी बहुत बिजी लाइफ है मैं ज्यादा डिस्टर्ब नही करती। और आजकल इतना खतरा नही रहा। कर लेती हुँ मैं अकेले सफर। तुम अपनी सुनाओ कैसे हो?"
"अच्छा हूँ, कट रही है जिंदगी"
"मेरी याद आती थी क्या?" मैंने हिम्मत कर के पूछा।
वो चुप हो गया।
कुछ नही बोला तो मैं फिर बोली, "सॉरी, यूँ ही पूछ लिया। अब तो परिपक्व हो गए हैं। कर सकते है ऐसी बात।"
उसने शर्ट की बाजू की बटन खोल कर हाथ मे पहना वो तांबे का कड़ा दिखाया जो मैंने ही फ्रेंडशिप डे पर उसे दिया था। बोला, " याद तो नही आती पर कमबख्त ये तेरी याद दिला देता था।"
कड़ा देख कर दिल को बहुत शुकुन मिला। मैं बोली "कभी सम्पर्क क्यों नही किया?"
वह बोला," डिस्टर्ब नही करना चाहता था। तुम्हारी अपनी जिंदगी है और मेरी अपनी जिंदगी है।"
मैंने डरते डरते पूछा," तुम्हे छू लुँ"
वह बोला, " पाप नही लगेगा?"
मै बोली," नही छू ने से नही लगता।"
और फिर मैं कानपुर तक उसका हाथ पकड़ कर बैठी रही।।
बहुत सी बातें हुईं।
जिंदगी का एक ऐसा यादगार दिन था जिसे आखरी सांस तक नही बुला पाऊंगी।
वह मुझे सुरक्षित घर छोड़ कर गया। रुका नही। बाहर से ही चला गया।
जम्मू थी उसकी ड्यूटी । चला गया।
उसके बाद उससे कभी बात नही हुई । क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे के फोन नम्बर नही लिए।
हांलांकि हमारे बीच कभी भी नापाक कुछ भी नही हुआ। एक पवित्र सा रिश्ता था। मगर रिश्तो की गरिमा बनाए रखना जरूरी था।
फिर ठीक एक महीने बाद मैंने अखबार में पढ़ा कि वो देश के लिए शहीद हो गया। क्या गुजरी होगी मुझ पर वर्णन नही कर सकती। उसके परिवार पर क्या गुजरी होगी। पता नही😔
लोक लाज के डर से मैं उसके अंतिम दर्शन भी नही कर सकी।
आज उससे मीले एक साल हो गया है आज भी रखबन्धन का दूसरा दिन है आज भी सफर कर रही हूँ। दिल्ली से कानपुर जा रही हूं। जानबूझकर जर्नल डिब्बे का टिकिट लिया है मैंने।
अकेली हूँ। न जाने दिल क्यों आस पाले बैठा है कि आज फिर आएगा और पसीना सुखाने के लिए उसी खिड़की के पास बैठेगा।
एक सफर वो था जिसमे कोई #हमसफ़र था।
एक सफर आज है जिसमे उसकी यादें हमसफ़र है। बाकी जिंदगी का सफर जारी है देखते है कौन मिलता है कौन साथ छोड़ता है...!!!
कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट जरूर करे
पोस्ट #शेयर करे
08/05/2024
Best View of “NAMO GHAT” Varanasi, Uttar Pradesh, India (Incredible Kashi) 🇮🇳😍
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Address
Varanasi
221002
