Dev Dipavali Kashi Varanasi
देव दीपावली काशी वाराणसी
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07/09/2025
श्री रामलीला रामनगर #दिवस_1
06/09/2025
"लीला" शब्द का व्यापक अर्थ है ईश्वर का इस ब्रह्मांड में प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होना। यह सृष्टि की उत्पत्ति का आधार है और सम्पूर्ण जगत की रचना करता है। इस दृष्टि से, यह संसार एक विशाल नाट्यशाला के समान है, जिसमें ईश्वर ही प्रधान सूत्रधार (निर्देशक) होता है। सभी मनुष्य इस नाट्यशाला के पात्र हैं, जो अपने-अपने कार्यों को निभाते हैं। इसे एक दिव्य खेल के रूप में देखा जा सकता है, जो श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न होता है। इसी कारण, श्रीरामलीला को चरित्राभिनय और क्रीड़ा दोनों दृष्टिकोणों से जोड़ा जा सकता है, जहां भक्ति के साथ-साथ मनोरंजन का भी समावेश होता है।
आज प्रथम दिवस की रामलीला में, रामबाग से पोखरा तक रावण का जन्म, दिग्विजय, क्षीरसागरकी झाँकी, देवस्तुति, आकाशवाणी, इत्यादि लीलाओं का मंचन हुआ।
07/09/2025
श्री रामलीला रामनगर #दिवस_1
06/09/2025
"लीला" शब्द का व्यापक अर्थ है ईश्वर का इस ब्रह्मांड में प्रत्यक्ष रूप से प्रकट होना। यह सृष्टि की उत्पत्ति का आधार है और सम्पूर्ण जगत की रचना करता है। इस दृष्टि से, यह संसार एक विशाल नाट्यशाला के समान है, जिसमें ईश्वर ही प्रधान सूत्रधार (निर्देशक) होता है। सभी मनुष्य इस नाट्यशाला के पात्र हैं, जो अपने-अपने कार्यों को निभाते हैं। इसे एक दिव्य खेल के रूप में देखा जा सकता है, जो श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न होता है। इसी कारण, श्रीरामलीला को चरित्राभिनय और क्रीड़ा दोनों दृष्टिकोणों से जोड़ा जा सकता है, जहां भक्ति के साथ-साथ मनोरंजन का भी समावेश होता है।
आज प्रथम दिवस की रामलीला में, रामबाग से पोखरा तक रावण का जन्म, दिग्विजय, क्षीरसागरकी झाँकी, देवस्तुति, आकाशवाणी, इत्यादि लीलाओं का मंचन हुआ।
22/07/2025
23/02/2025
🚩तुलसी मानस मन्दिर🚩
तुलसी मानस मंदिर काशी के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना की थी, अतः इसे तुलसी मानस मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के दीवारों पर रामचरितमानस के दोहे एवं चौपाइयां लिखी हुई है। मंदिर प्रांगण में श्री राम जानकी एवं लक्ष्मण जी की मूर्तियों के साथ-साथ हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थित है। वहीं दूसरी तरफ माता अन्नपूर्णा, शिवजी एवं सत्यनारायण भगवान के मंदिर भी स्थित है।
पूर्व में यह मंदिर छोटा सा हुआ करता था। कोलकाता के एक व्यापारी सेठ रतनलाल सुरेका ने सन 1964 में तुलसी मानस मंदिर का भव्य निर्माण करवाया। इस मंदिर का उद्घाटन उसे समय के वर्तमान राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने किया था।
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22/02/2025
दुर्गा मन्दिर दुर्गाकुण्ड 🙏
दुर्गा कुण्ड पर स्थित यह मंदिर माता कूष्माण्डा देवी को समर्पित है, परंतु आम बोलचाल की भाषा में इसे दुर्गा कुण्ड मंदिर अथवा (पूर्व में विदेशियों द्वारा मंकी टेंपल) कहा जाता है। इस मंदिर के पास ही एक आकर्षक कुण्ड भी स्थित है। लोग ऐसा मत था कि एक समय या कुंड सीधे गंगा नदी से जुड़ा हुआ था और इस कुंड में गंगा जी का पानी सीधे आता था। 🙏🚩
21/02/2025
श्री संकट मोचन हनुमान जी
संकट मोचन हनुमान जी का मंदिर काशी के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है, जिसकी स्थापना स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। काशी में इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि संकट मोचन बाबा अपने भक्तों के संकट को हर लेते हैं।
काशी में संकट मोचन मंदिर की स्थापना स्वयं तुलसीदास जी ने सन 1630 से लेकर 1680 के आसपास की थी। वर्तमान मंदिर की स्थापना काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक श्री महामना मदन मोहन मालवीय जी के द्वारा सन 1900 ईस्वी में हुई थी।
21/02/2025
वाराणसी : कालाष्टमी पर शिव स्वरूप में दर्शन देंगे भैरव बाबा, भक्तों को कठिनाइयों व ग्रह दोष से मिलेगी मुक्ति
कालाष्टमी पर भैरव बाबा शिव स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। भक्त व्रत रखकर उनकी पूजा-अर्चना करेंगे। इससे आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है। वहीं अकाल मृत्यु और कठिनाइयों से मुक्ति मिलेगी। ग्रह दोष भी दूर होते हैं।
फाल्गुन मास कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी मनाई जाती है। ज्योतिषविद विमल जैन के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि 20 फरवरी को सुबह 9.59 बजे से 21 को दिन में 11.58 बजे तक रहेगी। इस दिन विशाखा नक्षत्र रहेगा। कालाष्टमी 20 को ही मनाई जाएगी।
अष्टमी पर भक्त स्नान-ध्यान कर अपने आराध्य देवी-दवता की पूजा करेंगे। बाबा भैरव के व्रत का संकल्प लेंगे। बाबा का श्रृंगार कर धूप-दीप, नैवेद्य, फल आदि अर्पित किया जाएगा। वहीं बाबा का पंचोपचार, दशोपचार और षोडशोपचार पूजन किया जाएगा। बाबा कालभैरव, बटुक भैरव, कपालभैरव आदि अष्टभैरव मंदिरों में पूजन-अर्चन होगा।
20/02/2025
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
काशी में माँ गंगा के शांत तट पर स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भारत में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। द्वादश ज्योतिर्लिंग मे से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध बाबा विश्वनाथ यहीं विराजमान हैं।
वर्तमान में बाबा विश्वनाथ धाम विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम से भले ही प्रसिद्ध और वैभवशाली है लेकिन इतिहास इस महत्वपूर्ण धाम की विध्वंस और निर्माण का साक्षी रहा है। ऐसा माना जाता है कि काशी का यह मंदिर भगवान शिव के त्रिशूल पर स्थित है एवं प्रलय काल में भी इस नगरी का नाश नहीं होता है।
19/02/2025
कालभैरव मंदिर
काल भैरव जी ने काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। काशी में निवास करने वाले यह भी मानते हैं कि श्री काल भैरव स्वयं बाबा विश्वनाथ के कोतवाल हैं एवं पूरा नगर उन्हीं के देखरेख में है, जिसकी रक्षा स्वयं काल भैरव करते हैं।
यहां भूत प्रेत एवं जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति प्राप्त करने वाले श्रद्धालु आते हैं।
आदि काशी - Aadi Kashi
27/12/2024
चेत सिंह किला
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