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Mr. Vishal Chaturvedi Ji, Director and Producer of film HANUMAAN ANSH visited Vishwa Samvad Kendra Lucknow today.
08/09/2026

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हिरण पूरे दिन घास खाने मे लगा रहता है घास को प्रोटीन मे बदलने मे ही लगा रहता हैदूसरी तरफ माँसाहारी जानवरों को जब तक भूख ...
21/08/2026

हिरण पूरे दिन घास खाने मे लगा रहता है घास को प्रोटीन मे बदलने मे ही लगा रहता है
दूसरी तरफ माँसाहारी जानवरों को जब तक भूख नही लगती बस आराम से पड़े रहते हैं क्यों कि उन्हें पता है कि उनके लिए प्रोटीन का इंतजाम करने के लिए हिरण जो लगा हुआ है
जब तक हिरण जिंदा है जंगल में खूंखार जानवर मस्त सोते है पर हिरण जब कम होने लगते हैं तो ये भूखे खूंखार नए जंगल की तलाश करते हैं
हिन्दू हिरणों ने बड़ी मेहनत से सोना चांदी हीरे ज्ञान-विज्ञान इकट्ठा किया था क्या हुआ
एक खूंखार नस्ल साफ कर गई सब
ईरान लिया
अफगानिस्तान लिया
पाकिस्तान लील गए,
कश्मीर लिया,
बांग्लादेश लिया,
केरल,
बंगाल और
आसाम भी गया ही समझो.
उस नस्ल ने सिर्फ शिकारी predator के गुण विकसित किये है
अब पाकिस्तान और बांग्लादेश में खाने पीने की भयंकर कमी आ रही है क्यों कि हिन्दू पंजाबी सिंधी अहमदिया जैसे हिरण कम हो चुके है जिनकी वजह से इकॉनोमी चल रही थी
बाकी का काम सिर्फ शरीयत को 100 प्रतिशत लागू करना है, जिसकी वजह से धीरे धीरे पाकिस्तान बांग्लादेश में हिरण खत्म हो रहे है और खूंखार नरभक्षी बढ़ रहे है अब उन नरभक्षियों की नजर नए जंगलों पे है वो है भारत
इसे ही वो गज़वा ए हिन्द कहते है और उनके मजहबी किताबों में इसका जिक्र हो चुका है, हर शांतिप्रिय शेर के मन मे वो ऐसे बैठा हुआ है जैसे तुम्हारे लिए राष्ट्रगान
इस आखरी जंग मे सेना कुछ नही कर पाएगी क्यों कि ये जंग अंदर से शुरू होगीफिर बाहर से
जितनी तेजी से पाक~बांग्लादेश से हिरण कम हो रहे है उतनी ही जल्दी इसकी संभावना बढ़ रही है और ये जंग अचानक नही होगी. तुम पहले से ही इस जंग में है विश्वास न हो तो आसाम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश केरल आदि के उनकी बाहुल्य वाले इलाके मे घूम के आओ वहां से हिरणों ने घर और सम्पति बेच के कही और बसेरा बना लिया है…!
हमारे यहाँ के हिरण कहाँ जाने की सोच रहे हैं

20/08/2026
" जब मैं 1913 में कलकत्ता आया, अरबिन्दो तब तक किंवदंती पुरुष हो चुके थे। जिस आनन्द तथा उत्साह के साथ लोग उनकी चर्चा करते...
16/08/2026

" जब मैं 1913 में कलकत्ता आया, अरबिन्दो तब तक किंवदंती पुरुष हो चुके थे। जिस आनन्द तथा उत्साह के साथ लोग उनकी चर्चा करते शायद ही किसी की वैसे करते "

- नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

हिन्दी को स्वीकार करने में कौन-सी कठिनाई है। मैं तो मराठी भाषी हूँ, पर मुझे हिन्दी परायी भाषा नहीं लगती। हिन्दी मेरे अन्...
10/08/2026

हिन्दी को स्वीकार करने में कौन-सी कठिनाई है। मैं तो मराठी भाषी हूँ, पर मुझे हिन्दी परायी भाषा नहीं लगती। हिन्दी मेरे अन्तःकरण में उसी धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीयता का स्पन्दन उत्पन्न करती है जिसका प्रसार मेरी मातृभाषा मराठी द्वारा होता है।

• श्रीगुरुजी

यह धारणा सही नहीं है कि संघ में महिलाओं का स्थान नहीं है।• डॉ. मोहन भागवत जीसरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
08/08/2026

यह धारणा सही नहीं है कि संघ में महिलाओं का स्थान नहीं है।

• डॉ. मोहन भागवत जी
सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

प्रकृति ने धरती की सारी खूबसूरती,गाँवों की साँझ में समाहित कर दी है..🌻
18/07/2026

प्रकृति ने धरती की सारी खूबसूरती,
गाँवों की साँझ में समाहित कर दी है..🌻

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