SWAMI KRISHNAYAN PUBLIC SCHOOL

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A co-Eduction School From Nursery to Class-VIII.

Photos from SWAMI KRISHNAYAN PUBLIC SCHOOL's post 20/01/2023
21/08/2022

Celebration of Independent Day in our school

Photos from SWAMI KRISHNAYAN PUBLIC SCHOOL's post 11/08/2022

Drawing Competition Conducted By RBL Bank in SWAMI KRISHNAYAN PUBLIC SCHOOL

Photos from SWAMI KRISHNAYAN PUBLIC SCHOOL's post 29/01/2020

Republic Day of SKPS, RAMNAGAR, VARANASI.

03/08/2019

Student of class-V {2018-19}

03/08/2019
Photos from SWAMI KRISHNAYAN PUBLIC SCHOOL's post 20/03/2019

2018-19

Photos from SWAMI KRISHNAYAN PUBLIC SCHOOL's post 19/03/2019

Holi Celebration of our school

09/09/2017

9.🙏🌹ज्वाला देवी शक्तिपीठ🌹🙏

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच बसा है ज्वाला देवी का मंदिर। मां ज्वाला देवी तीर्थ स्थल को देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माना जाता है। शक्तिपीठ वह स्थान कहलाते हैं जहां-जहां भगवान विष्णु के चक्र से कटकर माता सती के अंग गिरे थे। शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी में सती की जिह्वा गिरी थी। मान्यता है कि सभी शक्तिपीठों में देवी हमेशा निवास करती हैं। शक्तिपीठ में माता की आराधना करने से माता जल्दी प्रसन्न होती है। ज्वाला रूप में माता ज्वालादेवी मंदिर में सदियों से बिना तेल बाती के प्राकृतिक रूप से नौ ज्वालाएं जल रही हैं। नौ ज्वालाओं में प्रमुख ज्वाला जो चांदी के जाला के बीच स्थित है उसे महाकाली कहते हैं। अन्य आठ ज्वालाओं के रूप में मां अन्नपूर्णा, चण्डी, हिंगलाज, विध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका एवं अंजी देवी ज्वाला देवी मंदिर में निवास करती हैं।

मां ज्वाला देवी शक्तिपीठ केज्वाला को बुझा न सका अकबर कथा है कि मुगल बादशाह अकबर ने ज्वाला देवी की शक्ति का अनादर किया और मां की तेजोमय ज्वाला को बुझाने का हर संभव प्रयास किया। लेकिन अकबर अपने प्रयास में असफल रहा। अकबर को जब ज्वाला देवी की शक्ति का आभास हुआ तो अपनी भूल की क्षमा मांगने के लिए अकबर ने ज्वाला देवी को सवामन सोने का छत्र चढ़ाया।

ज्वालादेवी की ज्योति ज्वाला माता से संबंधित गोरखनाथ की कथा इस क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है।

कथा है कि भक्त गोरखनाथ यहां माता की आरधाना किया करता था। एक बार गोरखनाथ को भूख लगी तब उसने माता से कहा कि आप आग जलाकर पानी गर्म करें, मैं भिक्षा मांगकर लाता हूं। माता आग जलाकर बैठ गयी और गोरखनाथ भिक्षा मांगने चले गये। इसी बीच समय परिवर्तन हुआ और कलियुग आ गया। भिक्षा मांगने गये गोरखनाथ लौटकर नहीं आये। तब ये माता अग्नि जलाकर गोरखनाथ का इंतजार कर रही हैं। मान्यता है कि सतयुग आने पर बाबा गोरखनाथ लौटकर आएंगे, तब-तक यह ज्वाला यूं ही जलती रहेगी। गोरख डिब्बीज्वाला दवी शक्तिपीठ में माता की ज्वाला के अलावा एक अन्य चमत्कार देखने को मिलता है। मंदिर के पास ही 'गोरख डिब्बी' है। यहां एक कुण्ड में पानी खौलता हुआ प्रतीत होता जबकि छूने पर कुंड का पानी ठंडा लगता है।

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