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this is a librery to share nd store ur adventurus moment nd thoughts

20/10/2022

19/10/2022
18/10/2022

#ये सच है की!

11/10/2022

जला दो इसे फूँक डालो ये दुनिया,
मेरे सामने से हटालो ये दुनिया
तुम्हारी है तुम्ही सम्भालो ये दुनिया,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है "

साहिर लुधियानवी साहब का ये गीत, गुरुदत्त द्वारा निर्देशित " प्यासा " का है। ये गीत फिल्माया भी गुरुदत्त साहब पर गया है, लेकिन गुरुदत्त साहब इस फिल्म में कभी अभिनय करना नहीं चाहते थे। जब पहले दिन दिलीप कुमार साहब सेट पर लेट हुए, तब गुरु दत्त ने अभिनय करने का फैसला किया और " प्यासा " के " विजय " ने अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

गुरु दत्त का जन्म बेंगलुरु में हुआ था। बचपन से ही उनको पढ़ने में इतनी ख़ास रूचि नहीं थी और मैट्रिक्स की परीक्षा पास करके उन्होंने बॉम्बे टॉकीज की फिल्म संग्राम में ,असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। यहां उनकी मुलाक़ात दो ऐसे ही बेहतरीन लोगों से हुई जो आगे चल कर भारतीय सिनेमा के दिग्गज बनें। देव आनंद और रेहमान, जिनकी भी ये ,अभिनेता के तौर पर पहली फिल्म थी। उन दिनों इन काफी अच्छी दोस्ती हो गयी और तीनों ने एक साथ फिल्म में काम करने का तय किया। आगे चल कर चेतन आनंद द्वारा बनाई गयी " बाज़ी " में गुरु दत्त ने निर्देशक की भूमिका निभायी। और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

लेकिन गुरु दत्त कभी खुद से खुश न हो पाए। कुछ ना करने की झुंझलाहट, लोगों द्वारा उनको ना समझा जाना और ऐसी तमाम चीज़ों से गुरु दत्त शराब के आदि हो गए। कोई न कोई कहानी उनके ज़हन में हमेशा रहती थी और उसी में वे इतना खोये रहते थे की उनको किसी और चीज़ की सुध ही नहीं हुआ करती थी। निर्देशन एक प्रकार की स्टोरीटेलिंग ही है, जिसमें शायद वह माहिर थे। उनकी काफी कहानियां आज , लगभग 80 वर्षों बाद भी सार्थक हैं। वहीदा रेहमान ने अपने एक इंटरव्यू में गुरु दत्त साहब को " बोर्न फिल्मकार " कहा था। वे ये भी मानती हैं कि गुरु दत्त साहब की कहानियां, अपने समय से 20 साल आगे है।शायद यही कारण था के उस वक़्त भी लोग गुरुदत्त की फिल्मों को नहीं समझ पाए और उनकी फिल्मों को नकार दिया। " कागज़ के फूल " इन्ही में से एक फिल्म है। भारत की पहली सिनेमास्कोप फिल्म, कागज़ के फूल, उस वक़्त की सबसे आधुनिक तरीके से बनी फिल्म थी लेकिन लोग उस समय तक इस तरह की फिल्मों को नहीं देखना चाहते थे, अतः उन्होंने इसको भी नकार दिया। इस फिल्म का फ्लॉप होना गुरु दत्त नहीं सेहेन कर पाए और मृत्यु की नींद में हमेशा के लिए सो गए।

अबरार अल्वी, जिन्होंने प्यासा और कागज़ के फूल लिखी है उन्होंने गुरु दत्त को किसी भी रिश्ते में न बंधने वाला व्यक्तित्व बताया। गुरु दत्त का अभिनय आज भी कई ड्रामा स्कूलों में पढ़ाया जाता है। गुरु दत्त का मानना था कि अभिनय 80 % आँखों से होता है और 20 % दूसरी चीज़ों से। शायद इसी कारण उनका अभिनय आज भी उनके किरदार को अमर बनाता है।

बहुत से निर्देशक आएंगे और चले जाएंगे लेकिन गुरु दत्त एक ही था, है, और रहेगा।

- उत्कर्ष चतुर्वेदी | Utkarsh Chaturvedi

07/10/2022
Photos from Autodesk's post 31/03/2020

Stay home,stay safe....

29/03/2020

Be patient.....

02/01/2018

Nice line

ताज़ा खबरों के लिए बने रहें http://www.patrika.com/ पर

16/12/2017

Jarur padhe

एक बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए एक अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया। रेस्टॉरेंट में बैठे दूसरे खाना खा रहे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से देख रहे थे लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था। खाने के बाद बिना किसी शर्म के बेटा, वृद्ध को वॉश रूम ले गया।
उनके कपड़े साफ़ किये, उनका चेहरा साफ़ किया, उनके बालों में कंघी की,चश्मा पहनाया और फिर बाहर लाया।
सभी लोग खामोशी से उन्हें ही देख रहे थे।बेटे ने बिल पे किया और वृद्ध के साथ बाहर जाने लगा।
तभी डिनर कर रहे एक अन्य वृद्ध ने बेटे को आवाज दी और उससे पूछा " क्या तुम्हे नहीं लगता कि यहाँ
अपने पीछे तुम कुछ छोड़ कर जा रहे हो ?? "
बेटे ने जवाब दिया" नहीं सर, मैं कुछ भी छोड़ कर
नहीं जा रहा। "
वृद्ध ने कहा " बेटे, तुम यहाँ छोड़ कर जा रहे हो,
प्रत्येक पुत्र के लिए एक शिक्षा (सबक) और प्रत्येक पिता के लिए उम्मीद
(आशा)। "
आमतौर पर हम लोग अपने बुजुर्ग माता पिता को अपने साथ बाहर ले जाना पसंद नहीँ करते
और कहते हैं क्या करोगे आप से चला तो जाता
नहीं ठीक से खाया भी नहीं जाता आप तो घर पर ही रहो वही अच्छा होगा.
क्या आप भूल गये जब आप छोटे थे और आप के माता पिता आप को अपनी गोद मे उठा कर ले जाया करते थे,
आप जब ठीक से खा नही पाते थे तो माँ आपको अपने हाथ से खाना खिलाती थी और खाना गिर जाने पर डाँट नही प्यार जताती थी
फिर वही माँ बाप बुढापे मे बोझ क्यो लगने लगते हैं???
माँ बाप भगवान का रूप होते है उनकी सेवा कीजिये और प्यार दीजिये...
क्योंकि एक दिन आप भी बूढ़े होगें।
Respect our Parents..

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