31/12/2025
मात नर्मदा के पावन सरिता के सानिध्य में एक बात ध्यान में आई बाडा से बड़ा व्यक्ति भी केवल दोष देखरहा है। आजकल किसी के भी गुणो को नहीं देख रहा है।
कोशिश करना है कि अब अधिकांश अवगुण में भी गुन कैसे देखा जा सके,उसकी चर्चा की जा सके, उसको सामाजिक पटल पर लाकर रखा जा सके और पता है यह भाव तब आया जब राह चलते हुए मैंने देखा कुछ भिक्षुक भजन गा रहे थे और मन ने कहा कि इनको दान देना चाहिए! इनको पोषित करना चाहिए! क्योंकि? यही है जो सामान्य जनमानस के बीच बैठ करके कीर्तन रूपी भक्ति की व्यवस्था जीवित रखे है।
दुनिया जिसको भिखारी समझती है वह समाज से अपने एकांत के समय को व्यतीत करने का एक बड़ा माध्यम दे रहा है!
भजन वह प्रक्रिया दे रहा है जिसको अगर एकांकी रहने वाला व्यक्ति भी करता है तो कम से कम अवसाद से बचता है!
तो दुनिया जिसमें सोचती है कि यह भिखारी है? वह सोचिए कितना बड़ा दानी है कि आपको अवसाद रूपी व्यवस्था से बचा रहा है!
इसी भाव ने मन में यह विचार दिया की लोगों में अवगुण के स्थान पर गुण खोजना है
नर्मदे हर
अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर -काशी

05/12/2025
21/10/2025