04/12/2019
आज नौसेना दिवस जानिए भारतीय नौसेना का इतिहास
भारतीय नौसेना दिवस का इतिहास 1971 के ऐतिहासिक भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ा है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान पर न केवल विजय हासिल की थी, बल्कि पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराकर स्वायत्त राष्ट्र 'बांग्लादेश' का दर्जा दिलाया था। भारतीय नौसेना अपने इस गौरवमयी इतिहास की याद में प्रत्येक साल चार दिसंबर को नौसेना दिवस मनाती है।
आईएनएस 'विक्रांत' भारतीय नौसेना पहला युद्धपोतक विमान था, जिसे 1961 में सेना में शामिल किया गया था। बाद में आईएनएस 'विराट' को 1986 में शामिल किया गया, जो भारत का दूसरा विमानवाही पोत बन गया। आज भारतीय नौसेना के पास एक बेड़े में पेट्रोल चालित पनडुब्बियां, विध्वंसक युद्धपोत, फ्रिगेट जहाज, कॉर्वेट जहाज, प्रशिक्षण पोत, महासागरीय एवं तटीय सुरंग मार्जक पोत (माइनस्वीपर) और अन्य कई प्रकार के पोत हैं।
भारतीय नौसेना ने जल सीमा में कई बड़ी कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें प्रमुख है जब 1961 में नौसेना ने गोवा को पुर्तगालियों से स्वतंत्र करने में थल सेना की मदद की। इसके अलावा 1971 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा तो नौसेना ने अपनी उपयोगिता साबित की। भारतीय नौसेना ने देश की सीमा रक्षा के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा शांति कायम करने की विभिन्न कार्यवाहियों में भारतीय थल सेना सहित भाग लिया। सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्रवाई इसी का एक हिस्सा थी।
29/11/2019
बधाई हो दिल्ली,
अब नल से पाइए नाले का पानी
28/11/2019
इस बार आप दिल्ली विधान सभा मे किस पार्टी की सरकार देखना चाहते है।
कृपया like ,comment और share कर के बताये
27/11/2019
आप को क्या लगता है ?शिव सेना ,कांग्रेस और एनसीपी मिलकर 5 साल
तक सरकार चला पायेगी।
A - हाँ B - नहीं
अपना जवाब A या B मे कमेंट बॉक्स मे दे।
26/11/2019
कांग्रेसियों के दिए जख्म देश कभी नहीं भूलेगा
20/11/2019
'वो जो कहते थे बदलेंगे ना हम कभी, क्या से क्या हो गए देखते-देखते
19/11/2019
रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1828 को बनारस के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ. उन्हें मणिकर्णिका नाम दिया गया और घर में मनु कहकर बुलाया गया. 4 बरस की थीं, जब मां गुज़र गईं. पिता मोरोपंत तांबे बिठूर ज़िले के पेशवा के यहां काम करते थे और पेशवा ने उन्हें अपनी बेटी की तरह पाला. प्यार से नाम दिया छबीली।
मणिकर्णिका का ब्याह झांसी के महाराजा राजा गंगाधर राव नेवलकर से हुआ और देवी लक्ष्मी पर उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा. बेटे को जन्म दिया, लेकिन 4 माह का होते ही उसका निधन हो गया. राजा गंगाधर ने अपने चचेरे भाई का बच्चा गोद लिया और उसे दामोदार राव नाम दिया गया।
राजा का देहांत होते ही अंग्रेज़ों ने चाल चली और लॉर्ड डलहौज़ी ने ब्रिटिश साम्राज्य के पैर पसारने के लिए झांसी की बदकिस्मती का फायदा उठाने की कोशिश की. अंग्रेज़ों ने दामोदर को झांसी के राजा का उत्तराधिकारी स्वीकार करने से इनकार कर दिया. झांसी की रानी को सालाना 60000 रुपए पेंशन लेने और झांसी का किला खाली कर चले जाने के लिए कहा गया।
झांसी को बचाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई ने बागियों की फौज तैयार करने का फैसला किया. उन्हें गुलाम गौस ख़ान, दोस्त ख़ान, खुदा बख़्श, सुंदर-मुंदर, काशी बाई, लाला भऊ बख़्शी, मोती भाई, दीवान रघुनाथ सिंह और दीवान जवाहर सिंह से मदद मिली. 1857 की बगावत ने अंग्रेज़ों का फोकस बदला और झांसी में रानी ने 14000 बागियों की सेना तैयार की।
रानी लक्ष्मीबाई, अंग्रेज़ों से भिड़ना नहीं चाहती थीं लेकिन सर ह्यूज रोज़ की अगुवाई में जब अंग्रेज़ सैनिकों ने हमला बोला, तो कोई और विकल्प नहीं बचा. रानी को अपने बेटे के साथ रात के अंधेरे में भागना पड़ा।
ग्वालियर के फूल बाग इलाके में मौजूद उनकी समाधि आज भी मर्दानी की कहानी बयां कर रही है. हम सभी ने लक्ष्मीबाई की कहानी सुनी है, लेकिन सुभद्राकुमारी चौहान ने अपनी कलम के ज़रिए उनकी जो बहादुरी हमारे सामने रखी, उसकी मिसाल दूसरी कोई नहीं!
15/11/2019
इतिहास की किताबों के पन्नो से देखे तो बिरसा मुंडा, झारखंड के मुंडा विद्रोह के नायक थे जिन्होंने आदिवासी समाज को संगठित करते हुए बाहरी ठेकेदारों और अंग्रेज़ अधिकारियों के खिलाफ उलगुलान यानि जंग छेड़ी थी. उन्हें गिरफ्तार किया गया तथा , जेल में ही उनकी मृत्यु हो गयी.
इस से अधिक, न तो इतिहास के पाठ्यपुस्तकों में लिखा जाता है, और न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है. हर विद्यार्थी के लिए बिरसा का इतना लघु परिचय, काफी मान लिया जाता है.
मगर क्या इतनी सी जानकारी दे कर हम बिरसा के महान व्यक्तित्व के साथ अन्याय नहीं कर रहे.
बिरसा मुंडा एक ऐसा नाम जिन्होंने अपना सारा जीवन आदिवासियों के हित लिए समर्पित किया। एक ऐसे महान क्रांतिकारी जिन्होंने अपने हक और देश की स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश सरकार का जमकर विरोध किया था। आज भी ये दुनिया बिरसा मुंडा को बड़े भाव से और प्रेम से याद करती है।
बिरसा मुंडा एक ऐसा नौजवान जिन्होंने अपने 25 साल के उम्र मे ही अपनी जान को अपने और अपने भाइयों के हक्क के लिए न्योछावर कर दिया और हमेशा के लिए एक अमर आत्मा बन गए।
"जब जब इस देश की धरती पर जुल्म बढ़ता जाएगा तब तब एक ऐसा भूमि पुत्र सामने आएगा जो इस मिट्ठी के लिए अपनी जान देगा।"
13/11/2019
13 वर्ष की उम्र में हसमत खा को मारा,
लाहौर,पेशावर जीतने वाले,
पंजाब को अंग्रेजो से मुक्त रखा,
कोहिनूर जिनके खजाने की शोभा था,
स्वर्णमंदिर व काशी विश्वनाथ को सोने से मंडवाने वाले,
जजिया टैक्स व गौहत्या का विरोध किया,
महापराक्रमी,
शेर ऐ पंजाब महाराजा रणजीतसिंह जी की जयंती पर नमन।
12/11/2019
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक, महान समाज सुधारक और शिक्षाविद् 'भारत रत्न' महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन