05/25/2020
*🌹 शान्ति देने वाले परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह के मधुर नाम में आप सभी को 🌹*
🌻 *जय मसीह की* 🌻
_*🗓 दिनांक :-> सोमवार 25 मई 2020 🗓*_
📓 मुख्य विषय :-> *💞 परमेश्वर से प्रेम रखना क्या है ?* 💞
*_【2】 यह उनकी आज्ञा मानना है। 😇_*
_*🔷 16 वी आज्ञा 🔷*_
*【16】 दोष ना लगाने के विषय में।*
🌷 मत्ती 7:1-2🌷
[1] *दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए।* 😨
[2] *क्योंकि जिस प्रकार* तुम दोष लगाते हो, *उसी प्रकार तुम पर भी* दोष लगाया जाएगा; *और जिस नाप से तुम* नापते हो, *उसी से तुम्हारे लिये भी* नापा जाएगा। 😰
*🔍… Meditation = मनन …🔎*
✍ दोष लगाने के विषय में *रोमि. 14:1-4, 10-13 भी देखें।*
⚠ कृपया ध्यान दें यहां जिस शब्द का उपयोग *"दोष लगाना"* हुआ है उसका इंग्लिश में अनुवाद *JUDGE करना* लिखा है अर्थात *न्याय करना*
📋 लेकिन यह जान लें *कि दोनों अलग नहीं है वह एक ही है क्योंकि यदि कोई इंसान चोरी करता है और दूसरों को चोरी करते हुए देखकर अगर सिखाए कि उसे चोरी नहीं करनी चाहिए तो वह दोष लगा रहा है और वह उसका न्याय भी कर रहा है* 😔
💗 *… आज के इस विषय पर मुख्य 7 बातें…* 💗
🌻【1】 ❎ इसका मतलब यह नहीं है ❎ *कि कलीसिया के अंदर बुरी बातों और कामों के लिए अनुशासन न करें।* [देखें प्रे.काम 5:1-11; 1 कुरि. 5:1-5, 12, 13]
*🔷 जिस प्रकार पौलुस करता था 🔷*
1 कुरिन्थियों 5:1-5,11-13
[1]यहां तक सुनने में आता है, *कि तुम में व्यभिचार होता है, वरन ऐसा व्यभिचार जो अन्यजातियों में भी नहीं होता, कि एक मनुष्य अपने पिता की पत्नी को रखता है।*
[2]और तुम *शोक तो नहीं करते, जिस से ऐसा काम करने वाला तुम्हारे बीच में से निकाला जाता, परन्तु घमण्ड करते हो।*
[3]मैं तो शरीर के भाव से दूर था, परन्तु आत्मा के भाव से तुम्हारे साथ होकर, मानो उपस्थिति की दशा में ऐसे काम करने वाले *के विषय में यह आज्ञा दे चुका हूं।*
[4]कि जब तुम, और मेरी आत्मा, हमारे प्रभु यीशु की सामर्थ के साथ इकट्ठे हो, *तो ऐसा मनुष्य, हमारे प्रभु यीशु के नाम से।*
[5]शरीर के विनाश *के लिये शैतान को सौंपा जाए, ताकि उस की आत्मा प्रभु यीशु के दिन में उद्धार पाए।*
[11]मेरा कहना यह है; *कि यदि कोई भाई कहला कर, व्यभिचारी, या लोभी, या मूर्तिपूजक, या गाली देने वाला, या पियक्कड़, या अन्धेर करने वाला हो, तो उस की संगति मत करना; वरन ऐसे मनुष्य के साथ खाना भी न खाना।* 🙄
[12] *क्योंकि मुझे बाहर वालों का न्याय करने से क्या काम? क्या तुम भीतर वालों का न्याय नहीं करते?* 🤔
[13] *परन्तु बाहर वालों का न्याय परमेश्वर करता है: इसलिये उस कुकर्मी को अपने बीच में से निकाल दो॥* 😨
🌻【2】 ❎ इसका मतलब यह भी नहीं ❎ *कि हम लोगों को परखे नहीं,* [देखें - 1 यूहन्ना 4:1]
🌷 1 यूहन्ना 4:1 🌷
[1]हे प्रियों, *हर एक आत्मा की प्रतीति न करो: वरन आत्माओं को परखो, कि वे परमेश्वर की ओर से हैं कि नहीं; क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता जगत में निकल खड़े हुए हैं।*
❎ यह भी ठीक नहीं ❎ *कि जो परमेश्वर का स्थान है, 👉 हम वह ले लें और दूसरों को दोषी ठहराएं और उनका न्याय करें*
📋 बल्कि इसके विपरीत परमेश्वर चाहते हैं *_कि हम उन्हें जो गलत करते हैं उनको माफ करें और प्रेम करें*
🌻【3】 क्योंकि अगर हम *दूसरों को दोषी* ठहरा देंगे, *तो हम भी दोषी ठहराए जाएँगे।*
🌷 लूका 6:37 🌷
[37]दोष *मत लगाओ; तो तुम पर भी दोष नहीं लगाया जाएगा: दोषी न ठहराओ, तो तुम भी दोषी नहीं ठहराए जाओगे:* क्षमा करो, तो तुम्हारी भी क्षमा की जाएगी।
🌻 【4】 क्योंकि इस विषय में *जैसा हम दूसरों से बर्ताव करते हैं दूसरे लोग हम से भी वही करेंगे।* [देखें - मत्ती 7:12] 😨
🌷 मत्ती 7:12 🌷
[12]इस कारण *जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो;* क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्तओं की शिक्षा यही है॥
🌻 【5】❎ लेकिन इसका मतलब यह नहीं ❎ *कि इसलिए कि हम दूसरों को जाँचते और आलोचना करते हैं हमें परमेश्वर नरक में डाल देंगे।* 😨 [देखें - अय्यूब 12:11;34:3]
*🔷 हमें लोगों को जांचना और परखना भी है 🔷*
🌷 अय्यूब 12:11 🌷
[11] *जैसे जीभ से भोजन चखा जाता है, क्या वैसे ही कान से वचन नहीं परखे जाते?*
🌷 1 यूहन्ना 4:1 🌷
[1]हे प्रियों, *हर एक आत्मा की प्रतीति न करो: वरन आत्माओं को परखो, कि वे परमेश्वर की ओर से हैं कि नहीं; क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता जगत में निकल खड़े हुए हैं।*
🌻 【6】 इसका मतलब है *कि परमेश्वर हमें जाँचेंगे और ताड़ना (सुधार) करेंगे क्योंकि हम उनके बेटे बेटियाँ हैं।* [जरूर देखें - 1 कुरि. 11:31-32; इब्रा. 12:5-11; 1 पतर. 4:17] 😇
🌷 1 कुरिन्थियों 11:31-32 🌷
[31] *यदि हम अपने आप को जांचते, तो दण्ड न पाते।*
[32] *परन्तु प्रभु हमें दण्ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें।*
🌻 *【7】 क्योंकि अंतिम समय आ चुका है।*
🌷 1 पतरस 4:16-17 🌷
[16]पर यदि *मसीही होने के कारण दुख पाए, तो लज्ज़ित न हो, पर इस बात के लिये परमेश्वर की महिमा करे।*
[17] *क्योंकि वह समय आ पहुंचा है, कि पहिले परमेश्वर के लोगों का न्याय किया जाए, और जब कि न्याय का आरम्भ हम ही से होगा तो उन का क्या अन्त होगा जो परमेश्वर के सुसमाचार को नहीं मानते?* 🙄
📋 यदि हम परमेश्वर की इस आज्ञा *को मानते हैं और दूसरों को दोषी नहीं ठहराते और न्याय नहीं करते तो इसी से लोग जानेंगे कि हम 💟 परमेश्वर से प्रेम 💟 करते हैं ☺ और देखिए जो परमेश्वर से प्रेम करते हैं उनके विषय में क्या लिखा है*
🌷 रोमियो 8:28 🌷
[28]और हम जानते हैं, *कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, 👉👉👉 उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।* 😇
⏪…आगे कल…⏩
*💟 प्रेमी परमेश्वर इस 💖प्रेम संदेश💖 के द्वारा हम सभी को बहुत आशीष दे ! आमीन ॥💟*