30/10/2026
मूमल का संगीत हम अक्सर सुनते हैं, पर काफ़ी लोग ये नहीं जानते की जैसलमेर के लोद्रवा की राजकुमारी मूमल और अमरकोट के सोढ़ा राजकुमार महेंद्र की प्रेम कहानी राजस्थान की अमर लोकगाथाओं में से एक है।
दोनों में गहरा अनुराग था, और महेंद्र रोजाना अपनी चमत्कारी ऊंटनी ‘करह’ पर सवार होकर मूमल से मिलने लोद्रवा आता था।
एक रात, मूमल की बहन सूमल उससे हंसी-मजाक में पुरुष के वेश में मूमल के पास सो गई। जब देर से पहुंचे महेंद्र ने उन्हें देखा, तो उसने गलतफहमी में मूमल को ग़लत समझ लिया और बिना कुछ कहे लौट गया। बाद में मूमल ने अपनी पवित्रता साबित करने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन विरह की इस अग्नि में अंततः दोनों के प्राण पखेरू उड़ गए।
“हाथों री मेहंदी रही, मन रो रहियो मलाल।
मूमल तड़पे अमरकोट, झूरै सोढो भाल।।”