22/10/2026
📚 पढ़ाई ईंट ढोने जैसा काम नहीं है!
कुछ अभिभावक सोचते हैं कि छुट्टी के बाद स्कूल के पहले दिन पढ़ाई नहीं होती, इसलिए बच्चों को स्कूल भेजने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन यह सोच सही नहीं है।
मान लीजिए, एक मजदूर को प्रतिदिन 200 ईंटें ढोनी हैं। वह चार दिन की छुट्टी के बाद काम पर लौटता है, तो पहले दिन भी 200 ईंटें ढो सकता है। क्योंकि ईंट ढोने का काम मुख्य रूप से शारीरिक मेहनत पर निर्भर करता है।
लेकिन पढ़ाई केवल किताब खोलकर पाठ पूरा करने का नाम नहीं है।
जब बच्चे चार-पाँच दिन की छुट्टी बिताकर स्कूल आते हैं, तो उनका ध्यान पढ़ाई से हटकर खेलकूद, घूमने-फिरने और दूसरी गतिविधियों में चला जाता है। ऐसे में शिक्षक को सबसे पहले बच्चों का ध्यान पढ़ाई की ओर लाना होता है, उन्हें कक्षा के माहौल में ढालना होता है और उनकी सीखने की रुचि को फिर से जगाना होता है।
इसलिए छुट्टी के बाद स्कूल का पहला दिन केवल पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि बच्चों को दोबारा पढ़ाई की लय में लाने के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।
अगर अभिभावक यह सोचकर बच्चे को स्कूल नहीं भेजते कि पहले दिन पढ़ाई नहीं होगी, तो वे अनजाने में बच्चे की नियमितता और अनुशासन को कमजोर करते हैं।
याद रखिए, पढ़ाई में निरंतरता भी उतनी ही जरूरी है, जितना पाठ्यक्रम पूरा करना।
बच्चे को स्कूल भेजिए। शिक्षक को अपना काम करने दीजिए और बच्चे को धीरे-धीरे फिर से पढ़ाई की लय में आने दीजिए।
क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ किताबें पूरी करना नहीं, बल्कि सीखने की आदत विकसित करना भी है।
🏫 National Public School, Samastipur
अभिभावकों से विनम्र अनुरोध: छुट्टी के बाद स्कूल खुलने पर अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय अवश्य भेजें।