02/10/2026
*मनिहार समाज का कल, आज और आने वाला कल*
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह!
अगर हम पिछले 25–50 वर्षों के सामाजिक सफर पर नज़र डालें, तो पाएँगे कि देश के अलग-अलग राज्यों, जिलों और शहरों में मनिहार समाज की बहुत-सी तंजीमें बनीं। इन तंजीमों ने अपने-अपने क्षेत्र में समाज की सेवा की, लेकिन उस दौर में संचार के सीमित साधनों के कारण एक शहर या राज्य की तंजीम का दूसरे क्षेत्र की तंजीम और समाज के लोगों से बहुत कम संपर्क होता था।
*डिजिटाइजेशन ने बदल दी तस्वीर*
इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया की क्रांति ने इस स्थिति को पूरी तरह बदल दिया।
आज छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक लोग एक-दूसरे से जुड़े हैं। अलग-अलग क्षेत्रों, अलग-अलग तंजीमों और अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े मनिहार समाज के लोग अब एक-दूसरे से बातचीत कर रहे हैं, मिल रहे हैं और एक-दूसरे के काम को देख एवं समझ रहे हैं।
*यह बदलाव समाज के लिए खतरा नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा अवसर है।*
लेकिन जब अलग-अलग तंजीमों के लोग एक-दूसरे के संपर्क में आने लगे, तो कुछ लोगों में यह डर भी पैदा हुआ कि कहीं उनकी तंजीम का व्यक्ति दूसरी तंजीम से न जुड़ जाए। इसी सोच के कारण कहीं-कहीं अपने ही लोगों को दूसरी तंजीम के कार्यक्रम में जाने, उनके साथ बैठने या सामाजिक कार्यों में सहयोग करने से रोका जाता है।
*मेरा सवाल बहुत सीधा है*
अगर तंजीम बनाने का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, तो समाज के लोगों को आपस में मिलने से रोकना कैसा बिरादरीवाद है?
*तंजीम का मतलब दीवार नहीं, पुल बनाना है*
किसी भी सामाजिक संगठन का असली उद्देश्य इत्तेहाद, मोहब्बत, शिक्षा, तरक्की और आपसी सहयोग होना चाहिए।
अगर कोई दूसरी तंजीम अच्छा काम कर रही है, तो उससे जलने के बजाय उसके अच्छे काम की तारीफ होनी चाहिए। जहाँ संभव हो, सहयोग होना चाहिए और एक-दूसरे के अनुभव से सीखना चाहिए।
एक तंजीम से जुड़ने का अर्थ दूसरी तंजीम का विरोध करना नहीं है।
हमारी पहचान अलग-अलग संस्थाओं से हो सकती है, लेकिन हमारी बिरादरी और सामाजिक उद्देश्य साझा हैं।
किसी व्यक्ति को यह कहना कि “उस तंजीम के साथ मत बैठो, उस व्यक्ति से मत मिलो”—यह सोच समाज को जोड़ने के बजाय बाँटती है। विशेष रूप से तब, जब उसी संस्था के संविधान या bylaws में समाज की एकता, शिक्षा और आपसी सहयोग की बात लिखी गई हो।
*पद से बड़ा उद्देश्य होना चाहिए*
किसी भी संगठन में पद और कुर्सी अस्थायी होती है, लेकिन समाज के लिए किया गया अच्छा काम लंबे समय तक याद रखा जाता है।
अगर किसी को यह डर है कि सभी लोग एक मंच पर बैठ गए तो उसकी व्यक्तिगत अहमियत या पद कम हो जाएगा, तो हमें अपनी सोच पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।
*समाज किसी एक व्यक्ति, एक पद या एक तंजीम से बड़ा है।*
आज का समाज पहले से अधिक जागरूक है। लोग देख रहे हैं कि कौन वास्तव में जमीन पर काम कर रहा है, कौन केवल दावे कर रहा है और किसके पास अपने काम का वास्तविक रिकॉर्ड और डेटा मौजूद है।
*आने वाला समय डेटा और पारदर्शिता का है*
सोशल मीडिया और डिजिटाइजेशन ने सामाजिक कार्यों में एक नई पारदर्शिता पैदा की है।
आने वाले समय में केवल बड़े-बड़े दावे काफी नहीं होंगे। लोगों के सामने सवाल होंगे—
आपने कितने लोगों को शिक्षा से जोड़ा?
कितने जरूरतमंद परिवारों की मदद की?
कितने युवाओं को रोजगार या Skill Development से जोड़ा?
कितने वैवाहिक रिश्तों में सहायता की?
आपकी संस्था के दस्तावेज, Registration और Bylaws की स्थिति क्या है?
आपकी सदस्य संख्या और कार्यों का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है?
अब सामाजिक कार्य धीरे-धीरे दावों से निकलकर Data, Documentation, Transparency और Ground Work की तरफ बढ़ रहा है।
यही बदलाव मनिहार समाज के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
*दिखावे से ज्यादा जरूरी निरंतर काम*
पोस्टर, सोशल मीडिया और प्रचार किसी अच्छे काम की जानकारी लोगों तक पहुँचाने के साधन हो सकते हैं, लेकिन वे स्वयं सामाजिक कार्य का विकल्प नहीं हैं।
अंततः पहचान उसी की बनेगी जिसका काम जमीन पर दिखाई देगा और जिसका रिकॉर्ड समय की कसौटी पर खरा उतरेगा।
*Slow and steady wins the race.*
नकल करके, किसी दूसरे के काम को छोटा दिखाकर या दूसरे की सफलता से परेशान होकर कोई संस्था लंबे समय तक मजबूत नहीं बन सकती।
हर तंजीम को अपनी अलग पहचान, अपना Vision और अपने काम करने का बेहतर तरीका विकसित करना चाहिए।
*मुकाबला नहीं—सहयोग कीजिए*
मेरा मानना है कि हमें किसी व्यक्ति या तंजीम को बुरा साबित करने में अपनी ऊर्जा खर्च नहीं करनी चाहिए।
आप अपना काम कीजिए, हम अपना काम करें और जहाँ समाज का फायदा हो, वहाँ मिलकर काम करें।
किसने कितना काम किया, किसका तरीका बेहतर रहा और कौन केवल दावे करता रहा—इसका फैसला समय और समाज स्वयं कर देगा।
हमें किसी को नीचा दिखाकर ऊपर नहीं उठना है।
हमें अपने काम, अपने अख़लाक़ और अपनी सोच से आगे बढ़ना है।
*मनिहार समाज का आने वाला कल*
मेरा विश्वास है कि आने वाले समय में मनिहार समाज की ताकत किसी एक तंजीम में नहीं, बल्कि अलग-अलग तंजीमों के बीच Cooperation और Collective Vision में होगी।
तंजीमें अपनी-अपनी पहचान के साथ काम करती रहें, लेकिन शिक्षा, रोजगार, Skill Development, स्वास्थ्य, शादी-विवाह, सामाजिक जागरूकता और समाज के अधिकारों जैसे साझा मुद्दों पर एक-दूसरे का हाथ पकड़ें।
हमारी तंजीमें अलग हो सकती हैं,
हमारे पद अलग हो सकते हैं,
हमारे काम करने के तरीके अलग हो सकते हैं,
लेकिन हमारी बिरादरी और हमारा भविष्य साझा है।
*आइए, दीवारें नहीं—पुल बनाएँ।*
प्रतिस्पर्धा नहीं—सहयोग करें।
व्यक्तिगत पद नहीं—समाज के भविष्य को प्राथमिकता दें।
इंशाअल्लाह, हम सब ईमानदारी और निरंतरता से अपना-अपना काम करते रहें। किसी को बुरा साबित करने की आवश्यकता नहीं है। समय, काम और डेटा खुद बता देंगे कि किसने समाज के लिए क्या किया।
*मनिहार समाज को जोड़ना है—तोड़ना नहीं।*
साथ बढ़ना है—एक-दूसरे को रोकना नहीं।
आपका
Adv. Er. Riyazuddin Maniyar
📞 9892919173