05/11/2026
1989 मे मुलायम और भाजपा के हमबिस्तरी से पैदा हुई समाजवादी औलादे (जुम्मन), #चारमिनार के गैर कानूनी मंदीर पर ओवैसी को घेरने की कोशिश कर रहे है.. 😄
जबकि अकबरउद्दीन ओवैसी समेत AIMIM के विधायको ने खुल कर इसको हटाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था.. इसमे अकबरउद्दीन ओवैसी समेत एमआईएम के 6 विधायको को पोलिस हिरासत मे ले लिया गया था, इसके बाद, शहर में कुछ हिंसक घटनाओं की सूचना मिली, जिनमें पथराव और चार एपीएसआरटीसी (APSRTC) बसों, दो कारों, एक एटीएम और एक कपड़ों के शोरूम में तोड़फोड़ शामिल है। शहर प्रशासन ने अस्थायी रूप से चारमीनार में आम लोगों के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया, पास के बाजार को बंद कर दिया और कुछ सड़कों पर बैरिकेड्स लगा दिए। पुलिस ने हिंदू नेताओं को भी मंदिर तक मार्च निकालने से रोका और आयोजकों को हिरासत में ले लिया।
इस घटना का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रभाव यह रहा कि असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पार्टी ने 12 नवंबर 2012 को केंद्र की यूपीए (UPA) सरकार और आंध्र प्रदेश की तत्कालीन किरण कुमार रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया.. ने समाजवादी पार्टी के नेता की तरह संसद मे ये नही कहा की मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बने, या फिर राष्ट्रीय लोक दल जैसी पार्टीयो से गठबंधन नही किया जो दंगो मे शामिल थी.. MIM ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी की सरकार "सांप्रदायिक" हो गई है और पुलिस की मौजूदगी में मंदिर के अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रही है। बाद मे यही कांग्रेस का किरण कुमार रेड्डी भाजपा मे शामिल हुआ..
मामला आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में पहुंचा। 5 नवंबर 2012 को, हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि मंदिर परिसर में 30 अक्टूबर 2012 की स्थिति के अनुसार 'यथास्थिति' (Status Quo) बनाए रखी जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वहां किसी भी प्रकार के नए निर्माण, विस्तार या बदलाव की अनुमति नहीं दी जाएगी..
इस घटना ने हैदराबाद की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला दिया, जिसके कारण MIM और कांग्रेस का पुराना गठबंधन टूट गया और मंदिर का ढांचा (टिन शेड या कैनोपी) यथास्थिति के आदेश के तहत आज भी एक संवेदनशील राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बना हुआ है।